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करवा चैथ बुधवार को मनाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि मंगलवार परधान मृगशिरा नक्षत्र है, जो चंद्रोदय के समय रहेगा। इसके साथ ही अमृत योग और सर्वार्थ सिद्धि योग भी है। यही कारण है कि धर्म के जानकार बुधवार के दिन करवा चैथ पड़ने के कारण इसकी महत्ता और भी अधिक बता रहे है । बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है। करवा चैथ का व्रत महिलाओं के लिए खास होता है। इस दिन महिलाएं अपनी पति के लंबी आयु के लिए दिनभर निर्जला व्रत रखती है। इस दिन पौराणिक रीति रिवाजों के साथ उपवास रखा जाता है। इसके साथ ही सूर्योदय से पहले सरगी खाने की परंपरा भी है। इसके बाद कथा पढ़ी जाती है और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।
ज्योतिषियो की माने तो इस दिन चंद्र उदय का समय रात 8.11 बजे होगा। वामन पुराण में सर्व प्रथम इस व्रत का वर्णन मिलता है। वैसे यह व्रत कठिन है, लेकिन वे महिलाएं जो किसी भी तरह से व्याधि से पीड़ित है, वे भी अपनी शक्ति और सुविधा के अनुसार इस व्रत को कर सकती हैं। गाय के गोबर की एक छोटी से पिंडी बनाएं, उसे गणेश स्वरुप मान लें। स्नान, जनेऊ, मौली धागा, धुप दीप भोग और आरती करें। गणेश चालीसा या गणपत्य अथर्व शीर्ष का पाठ करें। दूसरे दिन पुनः पूजन कर के गणेशजी को विसर्जित करे दें। लाभ होगा।
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