भूपेश सरकार सरासर झूठ बोल रही है – भाजपा… पंजाब में कैसे पहुंच गए बारदाने, यहां केवल छल कपट की राजनीति हो रही

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तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क .  रायपुर

छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रविंद्र चौबे द्वारा केंद्र सरकार पर धान खरीदी प्रभावित करने का आरोप लगाए जाने पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदेव साय ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि कृषि मंत्री श्री चौबे सरासर झूठ बोल रहे हैं। दरअसल कांग्रेस सरकार की नीयत में ही खोट है। भाजपा ने सवाल उठाया है कि कांग्रेस शासित पंजाब में बारदाने की कोई शिकायत नहीं है। वहां रिकार्ड खरीदी हो रही है। छत्तीसगढ़ में भी धान खरीदी के लिए केंद्र सरकार की ओर से सभी सहूलियत और सहयोग दिया जा रहा है इसके बावजूद राज्य के कृषि मंत्री द्वारा केंद्र पर मिथ्या आरोप लगाया जाना छल कपट की राजनीति का प्रकटीकरण है। कृषि मंत्री श्री चौबे द्वारा यह कहे जाने पर कि केंद्र सरकार का सहयोग नहीं मिल रहा है इससे धान खरीदी के काम में देरी हो सकती है, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने पलटवार करते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार किसानों का धान खरीदने में खुद आनाकानी कर रही है। बारदाने की कमी के लिए वह खुद जिम्मेदार है। इसका सबूत यह है कि राज्य की राशन दुकानों से अब तक सवा दो करोड़ बारदाने वापस नहीं बुलाए गए हैं। राज्य सरकार खुद इसके लिए जिम्मेदार है और वह नहीं चाहती कि किसानों का पूरा धान खरीदा जाए। इसीलिए तरह-तरह के बहाने बना रही है।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कहा है कि चालू खरीफ सीजन में देश में 1 माह के भीतर ही धान की सरकारी खरीद दो करोड़ टन के पास पहुंच गई है। केंद्रीय खाद्य मंत्री पीयूष गोयल के हवाले से भाजपा ने कहा है कि इस बार रिकॉर्ड 7.42 करोड़ टन धान की खरीद होने का अनुमान है। भाजपा की केंद्र सरकार किसानों की उपज का अधिक से अधिक हिस्सा खरीदना चाहती है इसलिए सभी उपाय किए गए हैं। पंजाब में अब तक 1.30 पॉइंट करोड़ टन धान की खरीद हो चुकी है। जबकि किसान हित में भाजपा की मांग को अनदेखा करते हुए यहां एक माह बाद धान खरीदने की तैयारी की जा रही है। वह भी तमाम तरह की चालबाजियों के साथ! जाहिर है कि जब कांग्रेस शासित पंजाब में अब तक इतनी बड़ी मात्रा में धान खरीदी की जा चुकी है तब छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार बारदाने की कमी का रोना रो रही है। स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार किसानों के नाम पर केवल छलावा कर रही है और वह किसानों का अधिकाधिक धान खरीदने से बचना चाहती है। इसके लिए केंद्र सरकार पर बेबुनियाद आरोप मढ़े जा रहे हैं।

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