बस में बैंक लाईट नही, सडक पर खडा कर कंडकटर ले रहा था बिरयानी, बाईक चालक चकराया मौके पर ही मौत
सप्ताह भर में हादसे 2 की मौत, सड़कों पर चल रही कंडम बस, नहीं हो रही कार्रवाई
तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
जिले के नागपुर चैकी के अर्तंगत सप्ताह में दो हादसे हुए हैं। सड़कों पर कंडम बसें चल रही है। कुछ बस के आगे व पीछे के कांच ही गायब है। बसो में सिंगल हेड लाईट, बैंक लाईट गायब, बसो में जरुरी मेडिकल सामान न होने के बावजूद परिवहन विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। विभाग के अफसर स्टाफ की कमी बता रहे हैं। जिसकी वजह से बीती रात 7 बजे के करिब अम्बिकापुर से कोरिया जा रही गुप्ता बस क्रमांक सी जी 15 ए बी 0113 का कंडक्टर बिरयानी खरीद रहा था कि दौरान मोटर सायकल सवार युवक पीछे से खडी बस में जा टकराया । टक्कर ईतनी जबरदस्त थी कि युवक का सर फटने की वजह से उसकी मौत मौके पर ही हो गई। बस वाले की मनवाता इतनी थी कि वो युवक को मरता देख मौके से बस लेकर फरार हो गया। जबकि स्थानिय लोगो ने पुलिस को ततकाल इसकी सूचना दी। वही पर कुछ दिनो पूर्व चिरमिरी से बनारस जाने वाली ने नागपुर रेलवे फाटक के पास एक मोटर सायकल सायकल को पीदे से ठोकर मार दिया जिससे मोटर सायकल सवार की मौत हो गई।
फोटो – पोडी थाने में खडी बस

नही होती कार्यवाई, जिम्मेदार मौन
जिला मुख्यालय बैकुन्ठपुर शहर से रोजाना विभिन्न रूटों पर 100 बसों का संचालन/गुजरति है। किसी भी बस में बस के ड्राइवर व कंडक्टर वर्दी नहीं पहनते हैं। वहीं बसों में साइड ग्लास अग्निशमन यंत्र व फर्स्ट एड बॉक्स नहीं हैं। ऐसे में घटना होने पर राहत कार्य में परेशानी आती है। वहीं फिटनेस को लेकर अमला कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। जबकि विभाग को माह में एक बार वाहनों की जांच करना चाहिए। वाहनों की गति पर रोक लगाने के लिए परिवहन कार्यालय में स्पीड गर्वनर जाने के आदेष भी रहे हैं।
कंडम बसे के अनुमति क्यो
ध्यान देने वाली बात ये है कि परिवहन विभाग इन कंडम बसों को सड़कों पर चलनेे की अनुमति कैसे दे देता है जिले में आए दिन हो रही दुर्घटनाओं में जितनी जिम्मेदार खस्ताहाल रोड हैं, उससे कहीं अधिक इन सड़कों पर बेलगाम भागती कंडम बसें हैं। मगर यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि परिवहन विभाग इन कंडम बसों को सड़कों पर भागने की अनुमति कैसे दे देता है। पर लगता है परिवहन विभाग इन सबसे बेखबर होकर चैन की नींद सो रहा है। जी हां, तभी तो क्षेत्र की सड़कों पर कंडम बसें फर्राटा मारती हुई दौड़ रही हैं।
नही होती क्षमता की जाॅच
कोरोना काल में षासन के निर्देषो को ठेंगा दिखाते हुए कोरोना नियमो की धज्जिया उठाई जा रही है। लगातार इन बसो में इन बसों में क्षमता से ज्यादा सवारियों को भरा जा रहा है। और बसे कम होने का बहाना बनाकर यात्रियो से ज्यदा किराया वसूला जा रहा है। मगर प्रशासन कार्यवाही करने में अक्षम साबित हो रहा है। हादसे के बाद जागने वाले प्रशासन के अधिकारियों की समय रहते अनफिट व कंडम बसों के संचालन पर रोक लगाने में रुचि नहीं है। नगर से अनेक स्थानों के लिए बसों का संचालन किया जाता है। जिन पर कंडम बसों को चलते हुए अकसर ही देखा जाता है। मनेन्द्रगढ, चिरमिरी, जनकपुर, सहित वाराणसी आदि मार्गों पर खटारा बसों का संचालन किया जा रहा है। ये कंडम बसें कहीं पर भी खडी़ हो जाती है।
यात्रा में यात्रियो की जान आफत में
यात्री बेबस है गंतव्य पर पहुंचने से पूर्व ही बसे रास्ते में ही खड़ी हो जाती हंै। जिससे यात्रियों को परेशानियों से गुजरना पड़ता है। हालात तो यह है कि गत दिनो अम्बिकापुर से आने वाली एक बस का बे्रक मनेन्द्रगढ माग्र में फेल हो गया वाहन चालक ने बस नियत्रंण न होता देख बस को सडक किनारे पेड पर दे मारा। इस दौरान यात्रियो को पहले से बता दिया था जिस कारण यात्रियो को सिफ्र चोट आई। जिम्मेदारों द्वारा कार्यवाही के नाम पर मात्र खाना पूर्ति की जाती है। वैसे नियमों की बात की जाए तो परिवहन विभाग से ही यात्री बसों को फिटनेस व परमिट जारी किया जाता है, लेकिन परिवहन विभाग द्वारा सटीक ढंग से जांच नहीं करने के कारण कई बसें कंडम हालत में संचालित हो रही हैं।
लंबी दूरी की बसों में एक ही फाटक
जिले से वाराणसी, राची व गढवा, पटना बिहार अन्य स्थानों लिए चलने वाली लंबी दूरी की यात्री बसों में चढने उतरने के लिए मात्र एक ही दरवाजा है। जबकि दो गेट के साथ ही इमरजेंसी गेट भी आवश्यक रूप से होना चाहिए। मगर लंबी दूरी की किसी भी बस में दो गेट व इमरजेंसी गेट नजर नहीं आता है। इमरजेंसी गेट पर तो सीट ही लगा दी गई है। परिवहन विभाग के नियम के तहत बस के पीछे लगे कांच पर ग्रिल नहीं होनी चहिए, लेकिन बसों में इस नियम की भी अनदेखी की जा रही है। चालक व परिचालक के लिए भी आरटीओ विभाग के द्वारा डे्रस कोड जारी किया गया है, लेकिन किसी भी बस के चालक व परिचालक के द्वारा डे्रस कोड का पालन नहीं किया जा रहा है।
चल रहा बस मुनाफे का खेल
अम्बिकापुर से कोरिया जिले में संचालित होने वाली बसों को बस मालिक जानबूझकर इस मार्ग पर कंडम बसों का संचालन कर रहें हैं, क्योंकि इस सड़क का निर्माण जारी है, सड़क खुदी पड़ी है। परिवहन विभाग द्वारा बसों के समय में कोई परिवर्तन नहीं किया गया, जिससे बस स्टैंड से सवारियों को उठाने के चक्कर में चालक तेज गति से बस दौड़ाते हैं, जो गड्ढों में उतरकर अनियंत्रित होकर हादसे का शिकार होती हैं। विभाग ने कंडम बसों पर भी कार्रवाई कर रोक नहीं लगाई।
वर्जन……..
समय-समय पर बसों की जांच की जाती रही, कंडम बस चलाई जा रही हैं, तो जांच कर कार्रवाई करते रहे हैं किन्तु वर्तमान में हमारे पास स्टाप की कमी होने के कारण मैं कुछ नही कर सकता । पिछले कुछ समय से हमारे पास जो स्टाप था उन्हे चेक पोस्ट में भेज दिया गया।
अरविन्द भगत – जिला परिवहन अधिकारी
मैं एसपी सर से र्चचा करता हॅू। जबकि इस दौरान एक दो दिन के भीतर बस आपरेटरो की बैठक लेकर उन्हे अलटीमेटम दिया जायेगा । यदि फिर भी बसो में सुधार नही होता हे तो फिर किसी को बख्सा नही जायेगा।
धीरेन्द्र पटेल – डी एस पी कोरिया

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