सामुदायिक वन और वन संसाधन के 1669 पट्टों का भी वितरण
Baikunthpur @ Tahkikat News
राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासियों के जल, जंगल एवं जमीन के अधिकार को सुरक्षित रखकर उनके जीवन स्तर में प्रगति करने की प्रतिबद्धता के फलस्वरुप जिले में अब तक 15 हजार 384 हितग्राहियों को व्यक्तिगत वनाधिकार पट्टे प्रदाय किया गया है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सर्वाेच्च प्राथमिकता वनवासियों के अधिकारों की रक्षा एवं वनों का प्रबंधन स्थानीय समुदाय को सौंपने का है। मुख्यमंत्री की इसी मंशा के अनुरुप जिले में वनाधिकार मान्यता पत्र पात्र हितग्राहियों को प्रदान किया जा रहे हैं। वनाधिकार पट्टो के माध्यम से जनजातीय एवं वन निवासियों को अपनी जमीन का हक पाने का सपना पूरा हो रहा है। व्यक्तिगत पट्टों के साथ ही जिले में 1 हजार 512 सामुदायिक वन अधिकार एवं 157 सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पट्टे का वितरण किया गया है।
जिले में वनाधिकार पट्टे प्रदाय सहित भूमि समतलीकरण एवं मेड़ बंधान के लिए सहायता प्रदान करने के ज़रिए खेती-किसानी को बढ़ावा मिला है। डबरी निर्माण के जरिये मछलीपालन एवं साग-सब्जी उत्पादन से हितग्राहियों की आय दुगनी हो रही है। उल्लेखनीय है कि अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासी वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत 13 दिसम्बर 2005 के पूर्व वन भूमि में काबिज हितग्राहियों को वनाधिकार मान्यता पत्र प्रदाय किया जा रहा है।
आदिवासी विकास विभाग सहायक आयुक्त ने बताया कि 7 हजार 854 व्यक्तिगत वन अधिकार पटटे, 3 हजार 453 वन अधिकार पत्र धारकों को प्रधानमंत्री आवास योजना से लाभन्वित किया गया है। 436 हितग्राहियों को भूमि पर डबरी निर्माण, 384 हितग्राहियों को भूमि पर कूप निर्माण का कार्य कराया गया है। इसके अतिरिक्त 500 हितग्राहियों को स्प्रिकलर का भी वितरण एवं 8 हजार 825 हितग्राहिरयों का प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि दिया गया है। व्यक्तिगत वनाधिकार में कृषि भूमि, बाड़ी, आवासीय सुविधा एवं जीवन-यापन को उन्नत करने हेतु अन्य प्रयोजन की भूमि सम्मिलित है। सामुदायिक वनाधिकार पत्रों के तहत वनोपज, जलाशय, चारागाह, जैव विविधता इत्यादि प्रयोजन हेतु भूमि का अधिकार ग्राम पंचायतों को प्रदान किया गया है।
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