आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को बहुमत मिलने का दावा करने वाली भाजपा ने अब विधानसभा क्रमांक 1 व 2 के सभी मंडलो में बैठक कर अपने कार्यकर्ताओ को रिचार्ज करने एवं आगामी विधानसभा चुनाव के मददेनजर तैयारियो का जायजा ले रही है। इस दौरान प्रदेश कार्य समिति के सदस्य व सरगुजा संभाग प्रभारी अखिलेश सोनी व पूर्वमंत्री भैयालाल राजवाडे ने खडगवा, चिरमिरी, नागपुर, मनेन्द्रगढ में सभी मंडलो की बैठक कर लिया है जबकि आज केल्हारी, जनकपुर और कोटाडोल की मंडलो की बैठक आयोजित हो रही है जिसमें बड़ी संख्या में भाजपाई नेता मौजूद रहे । जहा प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत की बात कही गई।
अखिलेश सोनी ने प्रदेश सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि गंगाजल हाथ में लेकर कसम खाने वाली भूपेश सरकार ने एक भी वादा पूरा नहीं किया। वहीं केंद्र की योजनाओं में भी जमकर इसका खामियाजा 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भुगतना पड़ेगा। इसके अलावा उन्होंने धर्मांतरण और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर प्रदेश सरकार को घेरा। वहीं मोर आवास मोर अधिकार में छत्तीसगढ़ के लगभग 11 लाख परिवारों को अपनी आवाज से वंचित करने वाली यह सरकार कैसे अपनी पीठ थपथपा सकती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण पंचायत मंत्री का इस्तीफा अपने आप में प्रमाण है।
पूर्वमंत्री भैयालाल राजवाडे ने कहा कि भाजपा के पहले दिन शक्ति केंद्रों के पदाधिकारियों को जो फीडबैक मिला है उससे स्पष्ट है कि 2023 के चुनाव में भाजपा की वापसी तय है। प्रदेश में लगातार धर्मांतरण का काम चल रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों के पत्र और धर्मांतरण की शिकायत हुई है। शिकायत के बाद भी राज्य सरकार ने कार्रवाई नहीं की। इसके साथ ही बीते 4 सालों में कोई भी काम प्रदेश सरकार द्वारा नहीं किया गया है। कांग्रेस लुभावने घोषणा पत्र लेकर आए राज्य सरकार अपना एक भी वादा पूरा नहीं कर पाई है। 2023 में परिवर्तन होगा जनता मन बना चुकी है। भाजपा 2023 के चुनाव में यहा की तीनो सीटो पर वापसी करेगी।
गौरतलब हो कि सरगुजा की सभी आदिवासी सीटों पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने 12 जातियों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने का निर्णय लिया था। इसमें से पांच से छह जातियां सरगुजा संभाग में रहती हैं। केंद्र सरकार के निर्णय के बाद से इस समाज में भाजपा के पक्ष में माहौल है। भाजपा इनको अपने पाले में करने की कोशिश में है।
आरक्षण और धर्मांतरण से नाराज हैं आदिवासी
हाई कोर्ट द्वारा आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था निरस्त किए जाने के बाद से आदिवासी समाज में आक्रोश है। राज्य सरकार ने विधानसभा में 76 प्रतिशत आरक्षण का बिल तो सर्वसम्मति से पारित करवा लिया लेकिन बिल अब तक राजभवन में ही है। राज्यपाल ने अभी तक इस बिल पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। हालांकि, इसे लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच जमकर सियासत भी हो रही है। दूसरी तरफ, बस्तर में धर्मांतरण के मुद्दे को लेकर भी आदिवासी समाज में आक्रोश है। भाजपा इन दोनों मुद्दों पर आदिवासी समाज को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही है।
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