Baikunthpur @ Tahkikat News
जिला अस्पताल बैकुन्ठपुर प्रबंधन की मिली भगत व कमिशन के लालच के चलते लोगों को अस्पताल के बाहर बनी केमिस्ट की दुकानों की तरफ रुख करना पड़ता है। यह सरासर जरूरतमंद मरीजों के साथ धक्केशाही है। जिला अस्पताल में ज्यादातर वही मरीज पहुंचते हैं जो प्राइवेट अस्पतालों का खर्च नहीं उठा सकते पर अफसोस उन्हें यहां पर भी परेशानी उठानी पड़ता है। जिले के सीएचएमओ के लालच की भटठी में न जाने कितने ही जरुरममंदो को दवा खरीदने के लिए क्या क्या करना पडा होगा। किन्तु इससे कुछ लोगो को कोई फर्क नही पडता किसी का घर बार बर्बाद होता है हो जाये। सीएचएमओ साहब के थैली का वजन बढते रहा चाहिए। अपने मोटे कमिशन के चक्कर में सएचएमओ साहब ने जिला अस्पताल के जन औषधि केन्द्र को जिला अस्पताल के बाहर के एक मेडिकल चलाने वाले केमिस्ट विकास श्रीवास्तव को दिनॉक 23 अगस्त 2019 को गलत तरिके से बगैर रेडक्रास सोसायटी अधयक्ष को अंधेरे में रख कर दिये दे दिया गया।
डाक्टरो की मोटी कमीशन बन रहा बाधक
एक ओर यह बात भी सामने आ रहा है कि विभाग की तरफ से भी व्यापक प्रचार प्रसार न होने से आज कई साल बीतने के बावजूद जेनरिक दवाओं के बारे में लोगों को जानकारी नहीं हो पा रही है। जिला अस्पताल के ओपीडी में चिकित्सकों के पास जेनरिक दवाओं की सूची तक उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। जिससे मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं, ब्रांडेड दवा के थोक और अधिकतम खुदरा मूल्य में भारी अंतर होता है। मोटी कमीशन के चक्कर में चिकित्सक ब्रांडेड दवाओं को लिखने का मोह नहीं छोड़ पा रहे।
प्रधानमंत्री की सबसे महत्वाकांक्षी योजना
अस्पताल की डिस्पेंसरी में पिछले कई सालों से दवा की कमी चल रही है। सरकार के मुताबिक डिस्पेंसरी में 640 दवाएं होनी चाहिए, लेकिन बमुश्किल से इसमें 300 दवा उपलब्ध रहती हैं। दवाओं की कमी के चलते ही और मरीजों की सहुलियत को देखते हुए इस केंद्र को रेडक्रॉस सोसायटी ने अस्पताल जन औषधि केन्द्र खोले गये। प्रधानमंत्री ने जनऔषधि केंद्रों के जरिए देश के कोने कोने में बाजार भाव से 80 फीसदी तक सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के उददेश्य से देश भर में जन औषधि केंद्रों की स्थापना की गई थी।
इनकी जिम्मेदारी भी तय हो
बड़ी अजीब विडंबना है कि जिला अस्पताल परिसर में संचालित किए जा रहे जन औषधि केंद्र के बारे में जिला अस्पताल प्रबंधन को कुछ भी मालूम नहीं है। वहीं पर सिर्फ इतनी सी बात कहकर जिला अस्पताल प्रबंधन एवं जिला अस्पताल के सलाहकार अंकित ताम्रकार नहीं बच सकते कि इस मामले को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी स्वयं देख रहे थे। इन साहब की नैतिक जिम्मेदारी की छोडिये इनकी पदीय दायित्व कहा गई जब जन औषधि केंद्र के अंदर 50 से अधिक प्रकार की एक्सपायरी दवाइयों का जखीरा पाया गया। विगत दिनों में लगातार सुर्खियां बटोरने वाले जिला अस्पताल के सलाहकार अंकित ताम्रकार एक बार फिर अपनी जिम्मेदारियों पर लापरवाह नजर नहीं आए और यही कारण है कि अस्पताल परिसर में खुलेआम चल रहा खेल पर ऑख मुदे रहे। या फिर इनकी कमिश्न भी तय थी यह तो आगे जॉच में सामने आयेगा। सवाल है कि इनके द्वारा एक बार भी पत्र लिखकर उच्च अधिकारियों के संज्ञान में मामले को लाने का प्रयास क्यो नही किया गया इसलिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की जिम्मेदारी के साथ-साथ इनकी लापरवाही भी तय होनी ही चाहिए।
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