नवरात्र आरम्भ, मंदिरो में शुरु हुआ सोसल डिस्टंेसिंग के साथ पूजा

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तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर


कोरोना काल में देवी भक्तों का इंतजार खत्म हुआ। आज से शहर में जगह-जगह दुर्गा पूजा पंडाल सज गये हैं इस दौरान रमदईया धाम में विधि-विधान पूजा किया जा रहा है। माता के भक्तो के द्धारा सोसल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा रहा है हालांकि भीड कम होने से इसे नियत्रण की जरुरत नही पडी। वही शाम होते ही शहर के सभी पंडाल रोशनी से जगमग हो जायेगें हिंदू धर्म में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक नवरात्रि का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास व श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। नवरात्रि में माता दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जायेगी। हर तिथि का एक विशेष महत्व होता है और माता के एक विशेष रूप की पूजा की जाती है। यह समय सिद्धि प्राप्ति के लिए भी उचित माना जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, इन दिनों में माता के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करने से भक्तों की हर मनोकामना पूरी हो सकती है। इस दौरान शहर का वातावरण रंग-बिरंगी रोशनी और माता के भजनों में वातावरण और भी भक्तिमय हो जाता है। इस बार भी शहर के सभी प्रमुख स्थानों पर माता की मूर्ति स्थापित की जा रही है। इस बार शारदीय नवरात्र आज 17 अक्टूबर से शुरू हो रहे हैं नौ दिनों तक चलने वाली इस पूजा में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जायेगी। हिन्दू परंपरा के अनुसार इन 9 दिनों का विशेष महत्व होता है मां दुर्गा की पूजा में विशेष पूजा स्थल पर ध्यान दिया जाता है।

ऐसे करें कलश स्थापना
जानकारो का कहना है कि कलश स्थापना के लिए जरूरी है सबसे पहले पूजा स्थल को अच्छे से शुद्ध किया जाए और उसके बाद एक लकड़ी के पाटे पर लाल कपड़ा बिछाएं। उसके बाद हाथ में कुछ चावल लेकर भगवान गणेश का ध्यान करते हुए पाटे पर रख दें। अब जिस कलश को स्थापित करना है उसमें शुद्ध जल भरें, आम के पत्ते लगाएं और पानी वाला नारियल उस कलश पर रखें। इसके बाद उस कलश पर रोली से स्वास्तिक का निशान बनाएं। अब उस कलश को स्थापित कर दें। नारियल पर कलावा और चुनरी भी बांधें। अब एक तरफ एक हिस्से में मिट्टी फैलाएं और उस मिट्टी में जौं डाल दें। इस तरह कलश की स्थापना हो गई और इसके बाद 9 दिनों की देवी मां की पूजा प्रारंभ होती है।

कन्या पूजन और उसका फल
अष्टमी और नवमी वाले दिन देवी के पूजन के बाद कन्या पूजन किया जाता है। कुछ लोग अष्टमी के दिन कन्या पूजन करते हैं तो वहीं कुछ लोग नवमी के दिन कन्या पूजन करते हैं। जिन कन्याओं का पूजन किया जाता है उन्हें एक दिन पहले ही आमंत्रण दे दिया जाता है और फिर पूजन वाले दिन उनकी पूजा कर उन्हें खाना खिलाया जाता है, पैर धोए जाते हैं और फिर दान स्वरूप बाद में फल, पैसे, कपड़े जैसी चीजें दी जाती हैं। चूंकि कन्या देवी का स्वरूप होती हैं इसलिए माना जाता है कि कन्याओं का पूजन करने से देवी मां खुश हो जाती हैं और उसका करोड़ों गुना फल देती हैं, सुख-समृद्धि देती हैं।

देर रात तक पंडालों में चलता रहा सजावट
मूर्ति स्थापना के एक दिन पहले बुद्धवार को पंडालों को दुल्हन की तरह सजाने के काम में कारीगर लगे रहे। देर रात तक यह सिलसिला चलता रहा। शहर के पंडालो और माता के मंदिर में भव्य तरीके से दुर्गा पूजा पंडालों को सजाने में कारीगरों के साथ समिति के लोग जुटे रहे।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ होगा आयोजन
शहर के दुर्गा पूजा पंडालों में मंगलवार से सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच दुर्गा मूर्तियां स्थापित होंगी। चरचा और बैकुन्ठपुर में कई समितियों की ओर से जगराता और अन्य आयोजन किया जायेगा।

भक्तों को हर मुश्किल होगी दूर
नवरात्र में मां भगवती की पूजा समस्त मनोकामनाओं को पूरा करने वाली मानी जाती हैं लेकिन अगर सही मुहूर्त में कुछ खास विधि-विधान के साथ मां के मंत्रों का जाप कर लिया जाए तो देवी नौ इच्छाओं के पूरा होने का वर दे देती हैं लक्ष्मी स्थायी वास करने लगती हैं और बेरोजगारों को नौकरी मिल जाती है जो लोग संतान की खुशियों से वंचित हैं उनका घर आंगन चहक उठता है और रोगियों को मिलता है निरोगी काया का आशीर्वाद यही नहीं व्यापार में आने वाली अड़चनें भी मां के आशीर्वाद से दूर हो जाती हैं।

ऐसे होगी मां के रूपों की पूजा
माता की भक्ति में ये दिन कब गुजर जाते हैं पता ही नहीं चलता। दसवें दिन माता की मूर्ति को नदी में प्रवाहित किया जाता है और यह प्रार्थना की जाती है कि माता सबके जीवन के दुरूखों का अंत करें और सुख-शांति लाएं। लाइफ मैनेजमेंट की दृष्टि से यदि देखा जाए तो यह पर्व मन, वाणी व व्यसनों पर काबू करने की सीख देता है। यही इस त्योहार का मुख्य उद्देश्य भी है।

प्रतिदिन होगी मां की आराधना
रविवार 29 सितंबर को स्थापना में मां शैलपुत्री की पूजा शुरू होगी। जिसके बाद सोमवार को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, मंगलवार को मां चंद्रघंटा पूजा, बुधवार को मां कुष्मांडा की पूजा, गुरुवार के दिन पंचमी को मां स्कंदमाता की पूजा, शुक्रवार के दिन षष्ठी मां कात्यायनी की पूजा, शनिवार के दिन सप्तमी को मां कालरात्रि की पूजा, रविवार के दिन अष्टमी को मां महागौरी दुर्गा महाअष्टमी पूजा, दुर्गा महानवमी पूजा संपन्ना होगी। सोमवार के दिन नवमी को मां सिद्घिदात्री नवरात्रि पारणा पूजा संपन्ना होगी। जिसके बाद मंगलवार को दशमी दुर्गा विसर्जन व विजयदशमी के रूप में मनाया जाएगा।

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