वैज्ञानिक भी खून बना नहीं सकते है और न ही कोई ऐसी मशीन
अपने खून को मौका दें किसी और की रगों में बहने का, ये लाजवाब तरीका है कई जिस्मों में जिंदा रहने का । कोई भी वैज्ञानिक खून बना नहीं सका है। ना ही कोई ऐसी मशीन बनी है, जिससे खून का निर्माण किया जा सके। ऐसे में जरूरत पड़ने पर एक इंसान का खून ही दूसरे के काम आ सकता है। इसका दूसरे कोई विकल्प नहीं हैं। लोगों ने इसके महत्व को काफी समझा है, खुद भी आगे आते हैं और लोगों को भी ब्लड डोनेशन के लिए मोटिवेट करते हैं। शहर में एक प्रतिष्ठित व्यापारी ऐसे भी हैं जो लोगों की सिर्फ जिंदगिया रौशन ही नहीं करते, बल्कि खून देकर बचाते भी हैं।
35 बार किया रक्तदान
ये हैं लक्ष्मी जायसवाल, पेशे से खाद्ध-बीज के विक्रेता हैं और बैकुण्ठपुर के पराने बस स्टैंड में 3 दशक से कोरिया कृषि सेवा केन्द्र का व्यवसाय कर रहे है। लेकिन पहचान एक रक्तदाता के रूप में भी है। लगभग 50 बसंत पार कर चुके लक्ष्मी जायसवाल ने ब्लड डोनेशन 35 बार दिया है। 22 साल की उम्र से ब्लड डोनेट कर रहे हैं। 35 बार करने के बाद भी जज्बा पहली बार की तरह ही है। इनका कहना है लोगों को जरूरत का हर वो सामान देने से भी जितनी खुशिया नहीं मिलती, उससे कई ज्यादा किसी जरूरतमंद को एक यूनिट ब्लड देने से मिल जाती है। श्री जायसवाल ब्लड डोनेशन को लेकर काफी जागरूक हैं। खुद तो ब्लड डोनेशन करते ही हैं, लोगों से भी लगातार रक्तदान के लिए अपील करते हैं।

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