कोरिया जिले में आखिर क्यों नहीं हो रहा कलेक्टर के आदेश का पालन?……संलग्न कर्मचारियों की वापसी पर उठे सवाल

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संलग्न कर्मचारियों की वापसी पर उठे सवाल

बैकुंठपुर।

कोरिया जिले में प्रशासनिक व्यवस्था और आदेशों के पालन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। जिले के विभिन्न विभागों में वर्षों से संलग्न कर्मचारियों को उनके मूल विभागों में वापस भेजने संबंधी आदेश जारी होने के बाद भी कई कर्मचारियों की वापसी नहीं होने से चर्चा का विषय बन गया है। इससे यह प्रश्न उठ रहा है कि जब जिले के सर्वाेच्च प्रशासनिक अधिकारी कलेक्टर के आदेश का ही पूर्ण रूप से पालन नहीं हो रहा है, तो अन्य प्रशासनिक निर्देशों की स्थिति क्या होगी।

जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ऑनलाइन शिकायत पोर्टल के माध्यम से जिले के विभिन्न विभागों में लंबे समय से कार्यरत संलग्न कर्मचारियों की शिकायत की गई थी। शिकायत में उल्लेख किया गया था कि शासन के निर्देशों के बावजूद कई कर्मचारी अपने मूल पदस्थापना स्थल के बजाय अन्य कार्यालयों में संलग्न होकर कार्य कर रहे हैं। शिकायत के बाद मामले की जांच और प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू हुई।

बताया जाता है कि शासन स्तर पर 05 जून 2015 को संलग्नीकरण समाप्त करने संबंधी निर्देश जारी किए गए थे, जिसके अनुसार अनावश्यक संलग्नीकरण समाप्त कर कर्मचारियों को उनके मूल विभाग या पदस्थापना स्थल पर वापस भेजा जाना था। इसके बावजूद कई विभागों में संलग्नीकरण की व्यवस्था वर्षों तक जारी रही।

मुख्यमंत्री ऑनलाइन शिकायत के बाद कलेक्टर कार्यालय द्वारा गत 07 अप्रैल को आदेश जारी कर विभिन्न विभागों में संलग्न कर्मचारियों को उनके मूल विभाग में वापस भेजने के निर्देश दिए गए थे। सूत्रों के अनुसार यह आदेश राजस्व विभाग, खनिज विभाग, सर्व शिक्षा अभियान तथा सहायक आयुक्त कार्यालय सहित अन्य विभागों से संबंधित था। हालांकि आदेश जारी होने के कई सप्ताह बाद भी कुछ कर्मचारियों की वापसी नहीं होने की चर्चा प्रशासनिक गलियारों में बनी हुई है।

इस स्थिति को लेकर आम नागरिकों एवं शिकायतकर्ताओं के बीच नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि यदि कलेक्टर द्वारा जारी आदेश का समयबद्ध पालन नहीं हो रहा है, तो इससे प्रशासनिक अनुशासन पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। वहीं कुछ लोगों का यह भी मानना है कि संबंधित विभागों द्वारा आदेश के पालन में विलंब के कारणों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

हालांकि इस संबंध में प्रशासन की ओर से आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन विभागों में आदेश का पालन हो चुका है और किन मामलों में प्रक्रिया अभी लंबित है। यदि किसी कर्मचारी की सेवा संबंधी या प्रशासनिक बाध्यता के कारण वापसी नहीं हो सकी है, तो उसकी जानकारी भी सार्वजनिक किए जाने की मांग उठ रही है।

जिले में यह मामला अब पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ता नजर आ रहा है। नागरिकों का कहना है कि कलेक्टर द्वारा जारी आदेशों का पालन सुनिश्चित होना चाहिए तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही या आदेश की अवहेलना हुई है तो उसकी भी जांच कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और संलग्न कर्मचारियों की वापसी संबंधी आदेश का पूर्ण पालन कब तक सुनिश्चित किया जाता है।

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