यातायात जागरूकता पर शोध कर राष्ट्रपति पदक प्राप्त ट्रैफिक मैन डॉ. महेश मिश्रा ने प्राप्त की पीएचडी उपाधि

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बैकुंठपुर।

छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले में यातायात नियमों के परिपालन संबंधी जागरूकता पर किए गए महत्वपूर्ण एवं समाजोपयोगी शोध कार्य के आधार पर ट्रैफिक मैन के नाम से मशहूर राष्ट्रपति पदक प्राप्त हवलदार डॉ.महेश मिश्रा को संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा, अंबिकापुर द्वारा डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी पीएच.डी. की उपाधि प्रदान की गई। गौरतलब है कि डॉ.मिश्रा अकादमिक क्षेत्र में एम.ए. संस्कृत, राजनीति विज्ञान एवं समाजशास्त्र विषयों की परीक्षा में विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान हासिल कर स्वर्ण पदक प्राप्त हैं।

डॉ.महेश मिश्रा ने अपना शोध कार्य यातायात नियमों के परिपालन संबंधी जागरूकता का अध्ययन रू छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले के विशेष संदर्भ मेंष् विषय पर पूर्ण किया। यह शोध वर्तमान समय में सड़क सुरक्षा, यातायात अनुशासन एवं जन-जागरूकता की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शोध में कोरिया जिले के नागरिकों एवं सड़क उपयोगकर्ताओं के बीच यातायात नियमों के प्रति जागरूकता, नियमों के पालन की स्थिति, दुर्घटनाओं के कारणों तथा सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने हेतु आवश्यक सुझावों का समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से विस्तृत अध्ययन किया गया।

डॉ.महेश मिश्रा ने वर्ष 2019 में संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा अंबिकापुर द्वारा आयोजित प्री-पीएचडी प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके पश्चात वर्ष 2021-22 में कोर्स वर्क सफलतापूर्वक पूर्ण किया व वर्ष 2023 में शोध शीर्षक का पंजीयन कराया। दीर्घकालीन अध्ययन, क्षेत्रीय सर्वेक्षण एवं वैज्ञानिक शोध पद्धति के माध्यम से शोध कार्य को पूर्ण करते हुए जून 2026 में अंतिम मौखिक परीक्षा फाइनल वाइवा सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

इस शोध कार्य का निर्देशन डॉ. रवीन्द्र नाथ शर्मा पीएचडी रसायन शास्त्र एवं समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र विभाग, श्री साई बाबा आदर्श स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अंबिकापुर एवं संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा अंबिकापुर के समाजशास्त्र विषय के अध्ययन बोर्ड के अध्यक्ष द्वारा किया गया। वहीं शोध के बाह्य परीक्षक के रूप में प्रो. महेश शुक्ला, अध्यक्ष, मध्य भारत सोशियोलॉजी संगठन व अत्यंत ही ख्याति लब्ध विद्वान ने शोध का मूल्यांकन कर अंतिम मौखिक परीक्षा लिया। जिन्होंने डॉ.मिश्रा द्वारा किए गए शोध को समाजोपयोगी बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में यातायात नियमों की जानकारी एक अत्यंत ही आवश्यक पहलू है जिस पर सभी को जागरूक होने की आवश्यकता है। निश्चित रूप से यह शोध मानव समाज के लिए अत्यंत ही लाभकारी होगा।

शोध कार्य के दौरान डॉ.महेश मिश्रा का शोध केंद्र शासकीय राज मोहिनी देवी कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अंबिकापुर रहा, जहाँ उन्होंने शोध के नियम एवं बारीकियों को अच्छी तरह से जाना व आवश्यकतानुसार ग्रंथालय एवं समाजशास्त्र विभाग का पूर्ण सहयोग लिया।

डॉ.महेश मिश्रा नें शोध के दौरान विगत 7 वर्षों में मिले अतुलनीय सहयोग के लिए अपने माता-पिता, परिवार एवं गुरुजनों के साथ डीआईजी राजेश पाण्डेय, कोरिया जिले की तत्कालीन कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी, वर्तमान कलेक्टर रोक्तिमा यादव, पुलिस अधीक्षक रवि कुमार कुर्रे,संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा अंबिकापुर के कुलपति प्रो. राजेंद्र लाकपाले, कुलसचिव डॉ.शारदा प्रसाद त्रिपाठी, शोध समन्वयक डॉ.पीयूष पांडेय, शोध केंद्र के प्राचार्य डॉ.एजेन टोप्पो, शोध समिति प्रमुख डॉ. विश्वासी एक्का, जिला सेनानी संजय गुप्ता, यातायात प्रभारी बीरबल राजवाड़े, शोध के टंकड़ कार्य हेतु मो. आरिफ ढ़ेवर के साथ जनप्रतिनिधि, मीडिया के पदाधिकारी व प्रतिनिधि, प्रशासन, पुलिस एवं नगर सेना के अधिकारी/कर्मचारी, सहकर्मी, जिले के जनता जनार्दन के साथ सड़क उपयोगकर्ताओं व उत्तरदाताओं एवं शोध कार्य के दौरान प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से सहयोग प्रदान करने वालों के प्रति अपना आभार व्यक्त किया है।
गौरतलब है कि डॉ. महेश मिश्रा विगत दो दशकों से यातायात जन जागरूकता अभियान संचालित करने एवं समाज सेवा के क्षेत्र में निरंतर अग्रसर रहने के लिए लिए जाने जाते हैं। इन्होंने स्वयं के व्यय पर 500 से अधिक यातायात जागरूकता शिविरों के माध्यम से 5 लाख से अधिक लोगों को यातायात नियमों, संकेतों एवं चिन्हों की जानकारी प्रदान कर मानव जीवन रक्षा जैसे पुनीत कार्य में निरंतर लगे हैं। वृहद पैमाने पर चलाए गए यातायात जागरूकता अभियान हेतु इनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज है। डॉ.मिश्रा की उपलब्धि पर सहकर्मियों, मित्रों एवं शुभचिंतकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दी हैं। यह शोध न केवल समाजशास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान है, बल्कि सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने में भी उपयोगी सिद्ध होगा।

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