न हार्वेस्टर का रिकार्ड, न मजदूरों पड़ताल कृषि विभाग की लापरवाही से लूटने को विवष किसान

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तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर


आदिवासी बाहुल्य कोरिया जिले में धान की फसल काटने के लिए अक्टूबर माह से ही हार्वेस्टर लेकर चालक पंजाब व हरियाणा से आ रहे हैं। इस दौरान चालक व मजदूरों की पुलिस वैरिफिकेषन और न ही जांच पड़तान हो रही है। अजिब विडंबना है कि इसके साथ ही आरटीओ विभाग को भी मालूम नहीं कि जिले में कितने हार्वेस्टर काम कर रहे हैं।
जिले के ज्यदातर हिस्से ग्रामिण होने के कारण बाहरी लोगो की जानकारी पुलिस व विभाग तक नही पहुॅच पाती है। जिले के पाचो ब्लाको में धान की फसल काटने के लिए अक्टूबर माह से ही हार्वेस्टर लेकर चालक पंजाब व हरियाणा से आ रहे हैं। रामानुगंज में हार्वेस्टर में मजदूर की मौत के बाद भी जिले के अधिकारियो के कान खउे नही हुए है। यहीं स्थिति रही तो आने वाले दिनों में अंचल में कोई घटना होती है, तो पुलिस को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
गौरतलब हो कि यहां बताना लाजिमी होगा कि पड़ोसी जिलो में कई बार हरियाणा से आए हार्वेस्टर में काम करने वाले लोग अपराध में शामिल हो चुके हैं। इस कारण हार्वेस्टर व उनके मजदूरों की जांच जरूरी है। जिले के सभी ब्लाकों में दीगर प्रदेशों से फसल काटने के लिए हार्वेस्टर चालक पहुंच रहे हैं। जो ठेके पर लेकर फसल कटाई, मिंजाई करते हैं।
वहीं कृषि विभाग द्वारा फसल कटाई, मिंजाई रेट का निर्धारण नहीं होने से किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। प्रशासन को चाहिए कि इन मशीनों के रेट निर्धारित की जाए, ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान न हो।

किसानों को नहीं मिला योजना का लाभ
हार्वेस्टर की खरीदी के लिए किसानों के लिए कई योजना लाया गया हैं। आर्थिक स्थिति से कमजोर किसान भी अब खेती के लिए खरीद सकते हैं। इसके लिए शासन इन किसानों को बागवानी उपकरणों के लिए सब्सिडी देगा। एससी और एसटी व कम खेती वाले किसान को मशीनों के उपकरण खरीदने पर उन्हें 60 फीसद की छूट दी जाएगी। यही नहीं अन्य कोई भी किसान हो सब को बागवानी के लिए मशीन खरीदने पर 40 फीसद तक की सब्सिडी देने के लिए योजना भी शामिल की गई हैं। कृषि विभाग भी किसानों को सब्सिडी देता है। कोई भी किसान विभाग के माध्यम से ट्रैक्टर, फसल काटने की मशीन, सिंचाई की मशीन, हल आदि खेती से संबंधित उपकरण खरीदता है तो शासन किसान को सब्सिडी देता है। लेकिन इस तरह हार्वेस्टर खरीदने के लिए ज्यादातर किसानों को योजना का लाभ नहीं मिला ळें

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