शुष्क हवा आने से तापमान में आई गिरावट, ठंड बढ़ी——ठंड बढ़ने के साथ ही बढ़ सकता है कोरोना संक्रमण

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पटाखों का धुआं कर सकता है कोरोना संक्रमितों को नुकसान

तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर

कोरोना वायरस का संक्रमण ठंड में और बढ़ सकता है। ऐसा चिकित्सकों का मानना है। वहीं कुछ डाक्टरों का कहना है कि अभी पहली ठंड है। ऐसे में इस बारे में कहना जल्दबाजी होगी। बावजूद इसके चिकित्सकों ने कहा कि वर्तमान में कोरोना का संक्रमण थोड़ा कम अवश्य हुआ। इसे देखकर लोग सावधानी न छोड़े। मास्क और शारीरिक दूरी का पालन अवश्य करें। डाक्टरों के अनुसार वायरस से जुड़ी बीमारियां ठंड या आद्रर्ता के समय बढ़ जाती है। इंफ्लुंजा वायरस नवंबर-दिसंबर से बढ़ना शुरू हो जाता है। कोरोना भी वायरस संबंधी बीमारी है। ऐसे में ठंड में इसका प्रभाव बढ़ सकता है। स्वाइन फ्लू, कोरोना व अन्य इंफ्लुंजा चूंकि वायरस हैं, इसका समय मार्च तक होता है। इसमें सिर्फ बचाव ही उपाय है।

गत दो दिन से शुष्क हवाओ ने शहर में सुबह-षाम ठंड पड़ने लगी है। जबकि ग्रामिण के इलाकों में तो ठीक-ठाक ठंड पड़ने लगी है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो लोग गरम कपड़े पहनना शुरू कर दिए हैं। पिछले तीन चार में दिनों की तुलना में न्यूनतम तापमान में 4 डिग्री तक गिरावट हुई है। मौसम विभाग के अनुसार लगातार शुष्क हवाएं आ रही है। आने वाले दिनों में न्यूनतम तापमान में और गिरावट आने संभावना है। एक-दो स्थानों पर हल्की बादल छाए रह सकते हैं। आकाश मुख्यतः साफ रहेगा। मौसम के जानकारों का कहना है कि अगले दो हफ्तों में तापमान में खासी गिरावट देखी जाएगी।

जिससे लोगों को सुबह शाम ठंड का अहसास होना शुरू हो जाएगा। मौसम में आए बदलाव के चलते अब रात में ठंड का प्रभाव बढ़ना शुरू हो गया है। ठंड से बचने के लिए लोगों ने रजाई कंबल ओढ़ने शुरू कर दिए हैं। दिन में धूप खिली रहने के बावजूद अधिकतम तापमान 30 से गिरकर 20 डिग्री पर पहुंच गया है। ठंड से बचने के लिए लोगों ने गर्म कपड़ों का उपयोग शुरू कर दिए हैं। सुबह-सुबह बाइक सवार भी ठंड से बचने के लिए गरम कपड़ों का सहारा ले रहे हैं। मौसम विज्ञानियों के अनुसार आगामी दिनों में मौसम साफ रहेगा व तापमान में गिरावट आएगी। इससे ठंड का प्रभाव बढ़ेगा। पिछले चार दिन से लगातार रात का तापमान गिर रहा है। इस कारण रात के समय अब थोड़ी सर्दी का असर दिखाई दे रहा है।

पटाखों का धुआं कर सकता है कोरोना संक्रमितों को नुकसान
दीपावली त्योहार आते ही चारों तरफ जगमग दीये की रोशनी के साथ ही पटाखों की आवाज सुनाई देती है। मगर इस बार पटाखों को जलाना कई लोगों के लिए घातक साबित हो सकता है। दरअसल इससे निकलने वाला धुआं दमा के मरीजों के साथ ही उन लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है जो कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए हैं। कई कोरोना संक्रमित अभी उपचार करवा रहे हैं। वहीं कई लोग स्वस्थ होकर घर भी लौट चुके हैं। दोनों ही मामलों में पीड़ित व्यक्तियों के फेफड़ों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।

पटाखों का धुआं उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। पटाखों का धुआं वैसे तो सभी के लिए घातक है, लेकिन कोरोना संक्रमण के लिहाज से भी यह बेहद संवेदनशील बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पटाखों के धुएं से फेफड़ों में सूजन आ सकती है। जिससे फेफड़े अपना काम ठीक से नहीं कर पाते और हालात यहां तक भी पहुंच सकता है कि अंग फेल हो जाए। इसलिए धुएं से बचने की कोशिश करनी चाहिए। स्थानीय व जिले के स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों से अपील की है कि कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके वे लोग जो फेफड़े और शरीर में कमजोरी तथा अस्थमा व एलर्जी से पीड़ित हैं। उनको पटाखों के धुएं से यथासंभव दूरी बनाने का प्रयास करना चाहिए।

अटैक और स्ट्रोक का खतरा

बताया जाता है कि पटाखों के धुएं से अटैक और स्ट्रोक का खतरा भी पैदा हो सकता है। पटाखों में मौजूद लेड के कारण अटैक और स्ट्रोक की आशंका बढ़ जाती है। जब पटाखों से निकलने वाला धुआं सांस के साथ शरीर में जाता है तो खून के प्रवाह में रुकावट आने लगती है। दिमाग को पर्याप्त मात्रा में खून न पहुंचने के कारण व्यक्ति स्ट्रोक का शिकार हो सकता है। ऐसे लोगों के लिए पटाखे का धुआं बहुत खतरनाक हो सकता है। इसकी वजह से अस्थमा का अटैक आ सकता है।

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