उदीयमान सूर्य को अघ्र्य के साथ छठ का होगा समापन
तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
गेज नदी और पैलेश तालाब के घाटों और शहर के कई हिस्सो में विभिन्न तालाबों पर रविवार सुबह सूर्य की पहली किरण की राह तक रहे हजारों श्रद्धालुओं की प्रतीक्षा आगामी सुबह खत्म होगी। सुबह करीब घंटे भर ठण्डे ठिइुरन भरे पानी में खड़े रहकर छठ व्रतियों ने दिनकर की प्रथम किरण पानी में उतरने के साथ अघ्र्य अर्पित करेगें। स्वास्थ्य, सुख-समद्धि और संतान की कामनापूर्ति से जुड़े सूर्य षष्ठी व्रत पर शहर के कई क्षेत्रों में उत्सव का माहौल रहा।

खासकर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से आये लोगो में सुबह चार बजे के बाद चहल-पहल शुरू हो जायेगी। लोग वाहनों के साथ नदी और तालाबों की घाटो पहुॅचेगें। निरोगी काया और जन-धन की कामना के साथ अघ्र्य देकर व्रतियों ने 36 घंटे के निर्जला व्रत का पारण व्रती अपने परिजनों को आशीर्वाद और प्रसाद देकर करेंगें।
इसके साथ ही नहाय-खाय से शुरू हुए चार दिन के छठ पर्व की पूर्णाहुति हों जायेगी। सुबह छह बजते-बजते घाट और तालाब खचाखच भरे रहेगें और नदी और तालाबो की घाटो आदि जगहों पर सुबह व्रत्री जल में खड़े होकर सूर्य के उदय होने की राह जोहोगें। सूर्य की पहली किरण के साथ ही अघ्र्य दिलाने के बाद व्रतियों के द्धारा भगवान भास्कर को घाट पर पूजा-अर्चना कर हवनादि करेंगें।

शुक्रवार को अस्ताचलगामी सूर्य को लोगो ने दिया अर्घ्य
इससे पूर्व खरना संपन्न होने के साथ ही 36 घंटे का कठोर निजर्ला व्रत शुरू हुआ और शुक्रवार को व्रती छठ घाटों पर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। इस मौके पर सबसे अधिक पैलेष तालाब घाटों में भारी भीड देखी गई। इसके साथ ही चार दिवसीय छठ महापर्व का समापन हो जायेगा। इसके पहले महापर्व के दूसरे दिन बुद्धवार को खरना का अनुष्ठान किया गया। दिन भर व्रतियों ने उपवास रखा। व्रती दोपहर से ही प्रसाद बनाने की तैयारी में लग गयी थीं। शाम से पहले खीर, रोटी बना कर तैयार कर लिया गया था। कई व्रतियों ने अरवा चावल, दाल व पिदा बनाया। दिन भर छठी मइया की लोकगीत के बीच उनका ध्यान किया गया और सूर्यास्त के बाद पूजा-अर्चना की गयी। भगवान भास्कर को नैवेद्य अर्पित करने के साथ सभी की मंगलकामना के लिए प्रार्थना की। इसके बाद उन्होंने प्रसाद को ग्रहण किया। फिर प्रसाद बांटा गया। इससे पूर्व बैकुन्ठपुर सब्जी बाजार को नगर पालिका ने छठ को ध्यान में रखकर एक ओर पहले ही शिफट कर दिया था। इससे श्रद्धालुओ की भारी भीड को ध्यान में रखकर व्यवस्था बनाने की हर संभव कोशिष की गई थी। सडको पर डाले लेकर व्रतियो से आने से पूर्व साफ सफाई और पानी का छिडकाव कर दिया गया था। ताकि श्रद्धालुओ को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना ना करना पडे। 3 बजे से ही लोग डाले लेकर छठ घाट पर आने शुरु हो गये थे।
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