भू-माफियाओं ने साबित कर दिया है कि या तो प्रदेश सरकार का उनको संरक्षण

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तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . रायपुर     

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान राजधानी में भू-माफियाओं द्वारा शहर से लगे इलाकों में की गई अंधाधुंध प्लॉटिंग को लेकर प्रदेश सरकार और प्रशासन तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल दागा है। श्री श्रीवास्तव ने जानना चाहा कि कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान जब सभी तरह के निर्माण कार्य ठप थे, तब ज़मीन-माफियाओं ने इस मौक़े का फ़ायदा उठाकर अवैध प्लॉटिंग करने का दुस्साहस किसके संरक्षण में किया? श्री श्रीवास्तव ने इस पूरे गोरखधंधे के तमाम तथ्यों का खुलासा कर दोषियों को दंडित करने की मांग की है।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री श्रीवास्तव ने कहा कि नगर निगम के ज़ोन दस्तों द्वारा पिछले तीन माह में लगभग डेढ़ सौ एकड़ अवैध प्लॉटिंग सड़कें काटकर खली कराए जाने के बाद सामने आए इस मामले ने प्रदेश सरकार और प्रशासन की भूमिका को संदेह के दायरे में ला दिया है। श्री श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ज़मीन माफियाओं के कई ग़िरोह एकाएक सक्रिय हो गए हैं और सत्तारूढ़ दल के राजनीतिक संरक्षण में वे सरकारी ज़मीनों और भोले-भाले किसानों के ख़ेतों की ग़ैर क़ानूनी प्लॉटिंग कर रहे हैं जिससे अपने घर का सपना संजोए लोग इन प्लॉट्स को लेने के बाद ख़ुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं। श्री श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश सरकार की कुनीतियाँ भी इस तरह के क़ारोबार की प्रमुख वज़ह बनी हैं। प्रदेश सरकार द्वारा खाली पड़ी सरकारी ज़मीनों को लीज़ पर देने की घोषणा के बाद से भू-माफियाओं के ग़िरोह कुकुरमुत्तों की तरह पूरे प्रदेश में उग आए हैं। भाजपा के कड़े विरोध और मामले के कोर्ट में विचाराधीन होने के बावज़ूद भू-माफियाओं का यह दुस्साहस निश्चित रूप से बेहद चिंता का विषय है। श्री श्रीवास्तव ने कहा कि कोरोना काल में भी भू-माफियाओं ने अपने इस क़ारोबार को अंजाम देकर यह साबित कर दिया है कि या तो प्रदेश सरकार का उनको संरक्षण मिला हुआ है या फिर ‘अपनी प्रदेश सरकार’ के राज में उनको क़ानून का कोई ख़ौफ़ ही नहीं रह गया है और उन्हें न्यायालय के सम्मान की भी ज़रा फ़िक्र नहीं है। श्री श्रीवास्तव ने कहा कि न केवल राजधानी व उससे लगे आऊटर में, अपितु पूरे प्रदेशभर में इस तरह की गई अवैध प्लॉटिंग को खाली कराकर सरकारी ज़मीन को संरक्षित किया जाए और भोले-भाले किसानों के ख़ेत उन्हें वापस दिलाने की तत्काल पहल शुरू की जाए।

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