कंगारू मदर केयर नवजात शिशुओं के लिए वरदान

Estimated read time 1 min read

तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर


कुपोषण मुक्ति के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक आहार को प्रमुखता, बाड़ी, किचन गार्डन को बढ़ावा और अधिक से अधिक जनसमुदाय की सहभागिता जैसे कई प्रयास एक साथ और लगातार किए जा रहे हैं। इससी क्रम में काम वजन के बच्चों के लिए ृकंगारू मदर केयर’ वरदान है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता- सहायिका द्वारा गर्भवती महिलाओं व शिशुवती माताओं को कम वजन के नवजात शिशुओं को कंगारू मदर केयर देने की जानकारी भी दी जा रही है।
दूर दराज जगहों में जहां इन्क्यबेटर या अन्य सुविधाएँ नहीं होती हैन वहाँ कंगारू मदर करे सस्ता और उपयोगी तरीका होता है काम वजन के नवजातों को बचाने के लिए
जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज खलखो ने बताया, बेहतर स्वास्थ्य के लिए ‘सही पोषण ही बेहतर विकास की नींव मानी जाती है, इसलिए जो चीजें हमारे आसपा सही मौजूद हैं उसका भरपूर उपयोग करें। शिशु व स्वयं के स्वास्थ्य के प्रति गंभीर लाभाथी महिलाएं सजगता के साथ समय-समयपर जरूरी सलाह लेती रहेंगी तो कुपोषण के खिलाफ जारी लड़ाई जीतने में निश्चित तौरपर बड़ी मदद मिलेगी।
कुपोषण मुक्ति के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्रियों के उपयोग के गृहभेंट के माध्यम से जानकारी दी जा रही है। जिसमें प्रमुख रूप से मूंगफली, केला, कुंदरू, कद्दू, अंडे,पपीता, सोयाबड़ी, चना, उड़द, अरहर दाल, बटरा, पापड़, प्याज, आलू, मुनगा-भाजी, कांदाभाजी, पोईभाजी और मीठानीम जैसी खाद्य सामग्रियो के सेवन से होने वाले फायदे भी बताए जा रहे है।
आंगनवाडी कार्यकर्ता डोंगरीपारा सीमा शर्मा ने बताया, कोरोना संक्रमण से बचाव हेतु साफ-सफाई बरतने, मा ंद्वारा शिशु को कम से कम 6 माह तक सिर्फ स्तनपान कराने तथा माता को स्वयं मौसमीफलों, हरी सब्जियों और रेडीटूईट का उपयोग करने हेतु समझाइश दी जा रही है। इसके साथ-साथ रेडीटूईट, हरीसब्जियों, अंडा और खास करमुनगा जैसी चीजों को अपने दैनिक जीवन मे अपना कर कुपोषण से मुक्ति के लिए सहयोग की अपील कर रही है।
जाने क्या है कंगारू मदर केयर
कंगारू मदर केयर वह तकनीक है जिसमें बच्चे को मां के सीने से लगाकर रखा जाता है ताकि मां के शरीर की गर्माहट बच्चे के भी शरीर को मिल पाए। ऐसा करने से बच्चे के शरीर का तापमान स्थिर रहता है और उसे ठंडा बुखार होने की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जन्म के समय जिन बच्चों का वजन 2 किलो या उससे कम होता है, ऐसे बच्चों को जन्म के तुरंत बाद जितना जल्दी हो सके कंगारू मदर केयर दी जानी चाहिए।
इसके अलावा जिले में 6 पोषण पुनर्वास केन्द्र संचालित हैं ,जिसमें नियमितरूप से बच्चों को लाभ देने का प्रयास किया जा रहा है। अति गंभीर कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केन्द्र का लाभ मिलता है। पोषण पुनर्वास केन्द्र में 14 दिवस लाभ लेने के बाद घर पर बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण पर विशेष ध्यान देने के लिए अभिभावकों की काउंसलिंग स्वास्थ्य विभाग एवं महिला बाल विकास विभाग द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है।

as

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours