तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
कोरोना कही गया नही है सावधान रहिए….कही टिका लगवाने के चक्कर में आप कोरोना का षिकार तो नही बन रहे हैं। ध्यान दिजिए आजकल टिकाकरण केन्द्र पर जिस प्रकार का लोगो में जोष नजर आ रहा है कही वो जोष आप पर भारी न पड जाये। इस समय टीका लगवाने के लिए एपीएल वर्ग के युवा कई बार केन्द्रों के चक्कर काट रहे हैं। इसके बावजूद उनका टीकाकरण नहीं हो पा रहा है। टीका लगवाने के लिए युवा इस कदर उत्सुक हैं कि केन्द्र खुलने के दो घंटे पहले से ही केन्द्रों के बाहर लंबी लाइन लग जा रही है। बैकुनठपुर के मानस भवन टिकाकरण केन्द्र में सुबह के वक्त इस लाइन में किसी भी तरह की सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो रहा है, क्योंकि केन्द्र के बाद पुलिस के जवान केन्द्र खुलने के समय ही पहुंच रहे हैं, पर गेट के बाहर लाइन पहले से लग जा रही है। वही पर केन्द्र के भीतर का नजारा और भी खजरनाक नजर आ रहा है। जहा सोसल डिस्टंेसिंग का पालन कही नजर नही आता है।
रोजाना टीकाकरण केन्द्रों के बाहर लग रही इस लाइन की वजह टोकन है। दरअसल जो टीके स्वास्थ्य विभाग को प्राप्त हुए हैं, उसमें वर्गवार निर्धारण कर दिया गया है। शासन के निर्देश पर टीके में से 20 प्रतिशत टीके फ्रंट लाइन वर्करों को, 16 प्रतिशत टीके अंत्योदय परिवार को, 52 प्रतिशत टीके बीपीएल परिवार को और 12 प्रतिशत टीके एपीएल परिवार को लगने हैं। बीपीएल परिवार के युवाओं को टीका लगवाने में ज्यादा दिक्कत नहीं हो रही है क्योंकि उनके लिए पर्याप्त संख्या में डोज रहते हैं।
वे अपना पंजीयन कराते हैं और केन्द्र में जाकर टीका लगवाते हैं, पर एपीएल परिवार के युवाओं का काम सिर्फ पंजीयन से नहीं हो पा रहा है। रोजाना सैकड़ों की संख्या में युवा अपना पंजीयन कर रहे हैं और टीका एक केन्द्र में एपीएल के लिए सिर्फ सौ से दो सौ डोज होते हैं। ऐसी दशा में पहले आओ पहले पाओ के हिसाब से निर्धारित टीके की मात्रा के अनुसार टोकन बांट दिया जाता है। इसके बाद सिर्फ उन्हीं युवाओं को टीका लग पाता है, जिनके पास उस दिन का टोकन होता है। उसको पाने के लिए केन्द्र के बाद सुबह 8 बजे से ही युवा पहुंचने लगते हैं और खुद ही कतार में खड़े हो जाते हैं, पर संक्रमण का डर काफी ज्यादा है।
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