कृषि अधिकारियों ने किसानों को दी अकरासी जोताई की सलाह

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तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर

कृषि अधिकारियो ने जिले के किसानों को आगामी खरीफ मौसम के लिए ग्रीष्मकालीन जुताई करने की सलाह दी है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि अकरासी जुताई से मिट्टी की उर्वरा शक्ति में सुधार होता है। इससे फसल उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी होती है। जिले के किसानों को तकनीकी जानकारी पहुंचाने कृषि अधिकारियों द्वारा कोविड काल के दौरान भी पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। जिले में बीते दिनों आंधी तूफान के साथ वर्षा हुई है, जिन गांवों की खेतों के मिट्टी में हल चलाने लायक नमी है, वहां के सभी किसान इस नमी का लाभ उठाते हुए ग्रीष्मकालीन जुताई करें तथा जिन किसानों की खेत के मिट्टी में नमी हल चलाने लायक नहीं है, वे इंतजार करें तथा जैसे हल चलाने के लिए पर्याप्त वर्षा होती है तो खेतों की जोताई करें।
अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी है कि ग्रीष्मकालीन जोताई दो प्रकार से की जा सकती है, पहला मिट्टी पलटने वाली हल से तथा दूसरा देशी हल अथवा कल्टीवेटर से। मिट्टी पलटने वाली हल से खेत की जोताई तीन साल में एक बार अवश्य करना चाहिए। ग्रीष्म कालीन जुताई के लाभ-खेत की एक ही गहराई पर बार-बार जोताई करने अथवा धान की रोपाई के लिए मिट्टी की मचाई से कठोर परत बन जाती है, जिसे ग्रीष्म कालीन जोताई से तोड़ा जा सकता है। इससे फसलों में लगने वाले कीड़े, जैसे धान का तना छेदक, कटुआ, सैनिक कीट, उड़द-मूंग की फल भेदक, अरहर की फली भेदक, चना की इल्ली, बिहार रोमल इल्ली इत्यादि कीट गर्मी केमौसम के दौरान जीवन चक्र की शंखी अवस्था में फसल अवशेष, ठूठ व जड़ों के पास अथवा मिट्टी में छुपे रहते हैं। गर्मी के मौसम में जोताई करने से कीट की शंखी अवस्था अथवा कीट के अंडे धूप के सीधे संपर्क में आने से गर्मी के कारण मर जाते हैं अथवा चिडियों द्वारा चुग लिए जाते हैं, जिससे कीटनाशियों का प्रयोग करना नहीं पड़ता है अथवा कम करना होता है। फसलों में रोग फैलाने वाले रोगाणु जैसे बैक्टीरिया, फफूंद आदि फसल अवशेष अथवा मिट्टी में जीवित बने रहते हैं और अनुकूल मौसम मिलने पर फिर से प्रकोप शुरू कर देते हैं। ग्रीष्म कालीन जोताई करने से ये रोगाणु सूरज की रोशनी के सीधे संपर्क में आने से अधिक ताप के कारण नष्ट हो जाते हैं। ग्रीष्म कालीन जोताई से मिट्टी वर्षा जल को ज्यादा सोखती है और प्रतिकूल परिस्थिति अथवा अल्प वर्षा की स्थिति में मिट्टी में संग्रहित वर्षा जल का उपयोग पौधा द्वारा किया जाता है। फसलों की जड़ को अच्छी तरह बढने के लिए भुरभुरा एवं हवा युक्त मिट्टी की जरूरत होती है, ताकि जड़ ज्यादा से ज्यादा मिट्टी में फैल सके। अकरासी जोताई के परिणामस्वरूप मिट्टी भुरभुरा एवं पोला होता है, जिससे पौधे के जड़ की वृद्घि अच्छी होती है। मिट्टी में जैविक एवं कार्बनिक पदार्थ के अपघटन के लिए सूक्ष्म जीव आवश्यक होते हैं।

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