राजीव गांधी न्याय योजना में उद्यानिकी फसलो के लिए 3 साल तक मिलेगी सहायता

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Baikunthpur @ Tahkikat News

उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने के लिये प्रदेश सरकार ने अब राजीव गांधी न्याय योजना में उद्यानिकी फसलों को शामिल कर लिया है। उद्यानिकी खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ नौ हजार रुपये अनुदान मिलेगा। धान के बदले पौधरोपण करने वाले किसानों को 10 हजार प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि शासन से तीन साल तक मिलेगी।

जानकारी मिली कि धान की खेती अभी तक किसान अधिक कर रहे थे। धान की खेती में किसानों को पानी की अधिक जरूरत होती है, जिसमें श्रम अधिक है। सोसाइटियों पर खाद बीज के लिये लाइन लगानी पड़ती है। दिसम्बर और जनवरी माह में धान उपार्जन के लिये किसानों को टोकन से लेकर तौल कराने में फजिहत झेलनी पड़ती है। प्रदेश सरकार की ओर से समर्थन मूल्य पर ही किसानों को पैसा मिलता है। ऐसे में किसानों की आय में वृद्धि अधिक नहीं हो पाती है। इस परम्परागत खेती से किसानों को मुक्ति दिलाने के लिये अब उद्यानिकी फसलों पर जोर दिया जा रहा है। उद्यानिकी खेती करने में किसानों को अधिक मुनाफा होगा। कम पानी में फसल तैयार हो जाती है। बाजार भाव की दर से किसान अपनी फसल बेच लेते हैं। इस खेती को बढ़ावा देने के लिये उद्यान विभाग के माध्यम से किसानों को सब्जी एवं पौधे बांटे जाते हैं।

सब्जी स्टोरेज के लिए पैक हाउस

किसानों को सब्जी स्टोर कर रखने के लिये पैक हाउस एवं अन्य अनुदान पर बनाया जा रहा है। धान की खेती की तरह उद्यानिकी की खेती को भी प्रदेश सरकार ने राजीव गांधी न्याय योजना में शामिल कर लिया है। राजीव गांधी न्याय योजना में शामिल होने पर किसानों को प्रोत्साहन राशि मिलेगी। ऐसे में किसानों को अधिक से अधिक लाभ होगा। उद्यानिकी फसलों में टमाटर, बैगन, बरबट्टी, करेला, कद्दू वर्गीय, फलदार, वानिकी पौध रोपण पर किसानों को प्रोत्साहन राशि मिलेगी। उद्यानिकी फसल लगाने वाले किसानों को हर साल 9 हजार प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि प्रदेश सरकार राजीव गांधी न्याय योजना में देगी। वर्ष 2020-21 में जिस रकबे में धान की खेती किये थे और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान का विक्रय किया था। यदि उक्त धान के बदले इस साल उद्यानिकी फसल या पौध रोपण करते हैं तो उन्हें प्रति एकड़ की दर से 10 हजार प्रोत्साहन राशि दी जावेगी। किसानों को राजीव गांधी न्याय योजना में यह राशि उन्हें लगातार तीन वर्ष तक मिलेगी। इस योजना का लाभ लेने के लिये किसानों को कृषि, उद्यान और राजस्व विभाग में अपना पंजीयन कराना अनिवार्य है।

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