फलो का राजा कहा जाने वाला आम पिछले दिनों में मौसम ने बौरों को प्रभावित कर दिया है। आम के बौर प्रभावित होने के कारण आने वाले दिनों में आम के उत्पादन में कमी आने की संभावना है। बीते कुछ दिनों के मौसम के बदलते मिजाज ने आम के चाहने वालों को निराश कर दिया है। मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण आम के बौर में फफूंद लग गए हैं। इससे बौर सूखकर गिरने लगे हैं। जल्दी गर्मी आने और तापमान में अचानक हुई बढ़ोतरी के कारण ऐसी स्थिति बन रही है। किसान भी इसे लेकर चिंतित हैं। इससे भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही। किसानों के खेत और बाड़ी में आम के पेड़ हैं। क्षेत्रों में आम के पेड़ों पर मौसम को प्रकोप साफ नजर आ रहा है। सभी जगहों पर जनवरी माह के दूसरे पखवाड़े से बौर लग गए थे और फरवरी में पेड़ व पत्तियां बौर से ढंक गए थे। अब आम के पेड़ों के बौर में भुनगा कीट का प्रकोप है। वे पराग चूसते हैं और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक पहुंचते हैं। उनके द्वारा चिपचिपा पदार्थ पत्तों पर छोड़ा जाता है और वही फफूंद का रूप ले लेता है। आम की बौर निकलने से लेकर फल लगने तक की अवस्था काफी संवेदनशील होती है। आगामी कुछ दिनों में आम की फसल पर बौर निकलना शुरू होगा।
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