भारत सरकार द्वारा के निर्देषन में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर जिले के लीड बैंक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के सानिध्य में भारत सरकार द्वारा भेजे गए उस समय के कुछ घटनाक्रम की फोटो प्रदर्शनी सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शाखा बैकुंठपुर में 14 अगस्त से अग्रणी जिला प्रबंधक कोरिया विकास कुमार गुप्ता के द्वारा किया गया। इस दौरान सीनियर सिटीजन पुनाराम पासवान, कैलाशपति सिंह, सरोज गुप्ता, वीरेंद्र सिंह, एन सिंह, प्रदीप तिवारी, संजय गुप्ता, मुकेश अग्रवाल, मयंक अग्रवाल, विश्वनाथ भदोरिया उपस्थित रहे कार्यक्रम का संचालन सेंट्रल बैंक के मुख्य प्रबंधक घनश्याम साहू और संतोष कुमार सिंह तथा श्री पांडे के द्वारा किया गया। अग्रणी जिला प्रबंधक जिला कोरिया मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
इस दौरान विभाजन विभीषिका के संबंध में चित्रों की प्रदर्शनी के द्वारा उसके संबंध में चर्चा करते हुए एलडीएम विकास कुमार गुप्ता ने बताया कि 14 अगस्त 1947 की तारीख भारत भला कैसे भूल सकता है! एक तरफ 200 वर्षों की गुलामी के बाद आजादी मिलने वाली थी तो वहीं दूसरी ओर देश के दो टुकड़े हो रहे थे। लाखों लोग इधर से उधर हो गए. घर-बार छूटा। परिवार छूटा। लाखों की जानें गईं। यह दर्द था, विभाजन का. भारत के लिए यह विभीषिका से कम नहीं थी। इसी दर्द को याद करते हुए पिछले साल आजादी की सालगिरह से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा ऐलान किया. ऐलान, 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने का।
गौरतलब हो कि अब हर साल स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका दिवस के तौर पर याद किया जाएगा। देश का विभाजन कैसे हमारे लिए विभीषिका बनी, इसे याद करने के लिए 14 अगस्त को यह खास दिवस मनाया जाएगा। एक साल पहले यानी 14 अगस्त देश बंटवारे के दर्द को याद करते हुए यह दिवस मना रहा है।
कभी नहीं भूली जा सकती वह रात
विभाजन की घटना को याद किया जाए तो 14 अगस्त 1947 का दिन भारत के लिए इतिहास का एक गहरा जख्म है। वह जख्म तो आज तक ताजा है और भरा नहीं है। यह वो तारीख है, जब देश का बंटवारा हुआ और पाकिस्तान एक अलग देश बना. बंटवारे की शर्त पर ही भारत को अंग्रेजों से आजादी मिली। भारत-पाक विभाजन ने भारतीय उप महाद्वीप के दो टुकड़े कर दिए। दोनों तरफ पाकिस्तान (पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान) और बीच में भारत। इस बंटवारे से बंगाल भी प्रभावित हुआ। पश्चिम बंगाल वाला हिस्सा भारत का रह गया और बाकी पूर्वी पाकिस्तान. पूर्वी पाकिस्तान को भारत ने 1971 में बांग्लादेश के रूप में स्वतंत्र राष्ट्र बनाया।
दिलों और भावनाओं का भी बंटवारा
देश का बंटवारा हुआ लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से नहीं। इस ऐतिहासिक तारीख ने कई खूनी मंजर देखे. भारत का विभाजन खूनी घटनाक्रम का एक दस्तावेज बन गया जिसे हमेशा उलटना-पलटना पड़ता है। दोनों देशों के बीच बंटवारे की लकीर खिंचते ही रातों-रात अपने ही देश में लाखों लोग बेगाने और बेघर हो गए। धर्म-मजहब के आधार पर न चाहते हुए भी लाखों लोग इस पार से उस पार जाने को मजबूर हुए। इस अदला-बदली में दंगे भड़के, कत्लेआम हुए। जो लोग बच गए, उनमें लाखों लोगों की जिंदगी बर्बाद हो गई. भारत-पाक विभाजन की यह घटना सदी की सबसे बड़ी त्रासदी में बदल गई। यह केवल किसी देश की भौगोलिक सीमा का बंटवारा नहीं बल्कि लोगों के दिलों और भावनाओं का भी बंटवारा था। बंटवारे का यह दर्द गाहे-बगाहे हरा होता रहता है। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस इसी दर्द को याद करने का दिन है।
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