➡️➡️ तीसरी मंजिल पर जाने, लिफ्ट और रैम्म नही……अस्पताल ने शासन को किया गुमराह
➡️➡️ मौके पर 38 स्मार्ट कार्ड मिले, जबकि अस्पताल में मात्र 16 मरीज ही थे भर्ती
छत्तीसगढ़ में आयुष्मान योजना को नर्सिंग होम और अस्पताल मालिकों का लूटपाट ही नही शासन के खजाने में डाका का एैसा जरिया बनाया कि प्रदेश में लगभग 800 करोड़ की योजना में अस्पताल मालिकों ने 2200 करोड का क्लेम कर दिया । प्रदेश स्तर पर हो रहे खुलासे से पूर्व कोरिया जिले में पहले सरकारी अस्पतालो के 86 लाख फर्जीवाडे कर डकारने का मामले में 81 लाख अब तक शासन के पास वापस नही हुए है अैर न ही घोटालेबाजो पर कोई कार्यवाई ही की गई। वही जैसे जैसे कागज बाहर आ रहे हैं इसके प्राईवेट अस्पतालो के कारनामें से जिले ही नही पूरा स्वास्थ्य विभाग हिला हुआ है।
स्मार्ट कार्ड घोटाले में कोरिया जिला मुख्यालय बैकुठंपुर के शर्मा हॉस्पिटल के कारनामों के चिट्ठे आरटीआई से मिले कागज से प्याज के पतरो के तरह बाहर आ रहे हैं। जिसमें शर्मा अस्पताल द्वारा स्मार्ट कार्ड से मरीज का इलाज करने के बावजूद उनसे नगद पैसे लेने के आरोपो जांच अधिकरियो को जॉच के दौरान सही पाया। जाच अधिकारियो से जाच के दौरान सैकडो मरीज ने अस्पताल पर कई तरह के गंभीर शिकायते दर्ज कराई। जॉच में कई प्रकरण तो ऐसे सामने आए जिसमें अस्पताल ने एक मरीज का इलाज किया और उसके एवज में फर्जी तरिके से चार अन्य स्मार्ट कार्डों से पैसे का आहरण किये गये ।
जॉच के दौरान क्या कहा मरिजो ने
केश न. 01
शर्मा हास्पिटल के खिलाफ शिकायत पर हुए जॉच में अधिकारियों के समक्ष जो बयान मरीजो ने दिऐ उसमें एक मरीज सुनील ने अपने दिए बयान में कहा कि उसके स्मार्ट कार्ड से 40 हजार रुपए का आहरण किया गया वहीं पर एक्सरे के लिए ₹700 और ₹200 दवा के नाम पर उससे नगद अलग से लिया गया । यानी कुल ₹900 उससे अलग से अस्पताल प्रबंधन द्वारा लिया गया।
केश न. 02
मरीज मनराज ने बताया कि अस्पता द्धारा उसके स्मार्ट कार्ड से ₹17000 काटे गए । जबकि ₹2000 नगद एवं ₹3000 की दवाई अलग से दी गई । यानि कुल 5 हजार रु अतिरिक्त लिया गया।
केश न. 03
मरिज बसंती बाई ने अपनी शिकायत में जांच अधिकारियों को बयान दिया कि उसके स्मार्ट कार्ड से 4400 काटा गया एवं लैब टेस्ट के नाम पर ₹350 अतिरिक्त लिए गए ।
केश न. 04
मरिज रूबी ने जांच अधिकारियों को दिए बयान में कहा है कि उसके स्मार्ट कार्ड से ₹10 हजार लिया गया जबकि जांच के दौरान पाया गया कि मरीज रुबी अस्पताल में भर्ती थी ही नहीं ।
केश न. 05
भगवत प्रसाद ने जांच अधिकारियों के समस्त समक्ष अपने दिए बयान और शिकायत में कहा कि वह अस्पताल में भर्ती नहीं था और उसे सामान्य इलाज के लिए 430 रुपए नगद राशि लिया गया । यात्रा भत्ता भी नहीं दिया ।
केश न. 06
सियामती के पति ने बताया कि शर्मा अस्पताल के द्वारा ₹15000 स्मार्ट कार्ड से इलाज किया गया एवं उससे नगद के नगद ₹11000 लिया गया । जबकि महिला नसबंदी का पैकेज शासन द्वारा स्वीकृत राशि मात्र 2625 रुपए का निर्धारित है एवं महिला मरिज को ब्लड चढ़ाने के लिए ₹2000 की अतिरिक्त राशि ली गई । जाच अधिकरियो को मरिज ने बताया कि महिला का सामान्य प्रसव हुआ जबकि अस्पताल ने उसका आपरेशन होना बताया ।
घर-घर जाकर लिया बयान
सभी बयान व मरिजो से जो शिकायत जाच दल ने लिया वह तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस एल चावडा के समक्ष लिया गया। जांच दल ने मरीजों के घर-घर जाकर बयान लिया गया। जिसमें यह जानकारी प्राप्त हुआ कि ऑपरेशन के नाम पर दो से तीन अन्य स्मार्ट कार्डों का फर्जी प्रकरण बनाकर राशि का आहरण किया गया है ।
फर्जी प्रकरण बनाकर निकाला पैसा
जॉच में पाया गया कि अस्पताल द्वारा फर्जी प्रकरण बनाकर स्मार्ट कार्ड पैकेज का दुरुपयोग किया गया। जाच अधिकारियो ने पाया कि अस्पताल ने एक मरीज को मोतियाबिंद का ऑपरेशन के लिए भर्ती कराया किंतु ऑपरेशन नहीं हुआ । जबकि अस्पताल के द्वारा उसके स्मार्ट कार्ड से पथरी के इलाज का प्रकरण बनाकर पैसा निकाल लिया गया ।
अस्पताल ने शासन को गलत जानकारी दे लिया लाभ
जाच में स्मार्ट कार्ड का लाभ लेने की मंशा से अस्पताल ने शासन को गलत जानकारी दे गुमराह किये जाने की पुष्टी हुई। जांच दल द्वारा अस्पताल के निरीक्षण में पाया कि अस्पताल के जनरल वार्ड में मेडिकल बेडो के स्थान पर लकड़ी के तखत पर मरीजों का इलाज किया जा रहा है जोकि शासन के तय मापदंडों के विपरीत है एवं अस्पताल के नेत्र विभाग का ऑपरेशन थिएटर शासन की योजना का पालन नहीं किया गया है । तो अस्पताल के तीसरे मंजिल पर जनरल वार्ड तक मरिजो के लिए लिफ्ट या रैम्म की सुविधा उपलब्ध नहीं है । वही पर जाच दल ने मौके पर अस्पताल में 38 स्मार्ट कार्ड प्राप्त किये जबकि अस्पताल में मात्र 16 मरीज ही भर्ती थे।

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