मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में फील्ड स्टाफ की बैठक संपन्न….शीतलहर से बचाव को लेकर दिए गए आवश्यक दिशा-निर्देश…..ठंड में शराब सेवन को बताया घातक

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शीतलहर से बचाव को लेकर दिए गए आवश्यक दिशा-निर्देश…..ठंड में शराब सेवन को बताया घातक

बैकुंठपुर।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के सभा कक्ष में फील्ड स्टाफ की बैठक आयोजित की गई, जिसमें ठंड एवं शीतलहर से बचाव को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह ने फील्ड स्टाफ को जनसामान्य को जागरूक करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।

डॉ. सिंह ने नागरिकों से अपील की कि वर्तमान मौसम परिस्थितियों को गंभीरता से लें और आवश्यक सावधानियाँ अपनाएँ। उन्होंने बताया कि अत्यधिक ठंड लगना, सांस फूलना, सीने में दर्द अथवा अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क कर उपचार सुनिश्चित करें, जिससे शीतजनित रोगों से बचाव संभव हो सके।

ठंड से बचाव के लिए जरूरी सावधानियाँ

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि ठंड से होने वाले दुष्प्रभावों से बचने के लिए नागरिकों को बहु-परत ऊनी या गर्म कपड़े पहनने चाहिए तथा सिर, कान, हाथ एवं पैरों को पूरी तरह ढंककर रखना चाहिए।उन्होंने प्रातःकाल एवं रात्रिकाल में अत्यधिक ठंड के दौरान अनावश्यक बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त कैलोरी युक्त आहार एवं गर्म तरल पदार्थों के सेवन की सलाह दी। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं व बच्चों को विशेष ध्यान रखने की बात कही। उन्होंने अस्थमा, टीबी, ब्ल्डप्रेशर व शुगर से पीड़ितों को समय समय पर जांच उपचार कराने की सलाह दी गई है।

ठंड में शराब सेवन को लेकर भ्रांति से बचने की अपील

डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया कि ठंड में शराब सेवन को लेकर फैली भ्रांति खतरनाक है। शराब शरीर की ऊष्मा को बनाए रखने के बजाय उसे और कम कर देती है, जिससे हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ जाता है। अतः ठंड के मौसम में शराब का सेवन पूर्णतः वर्जित है। बुजुर्गों और बच्चों का विशेष ध्यान रखने, हाइपोथर्मिया अथवा फ्रॉस्टबाइट से पीड़ित व्यक्ति को शीघ्र चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने तथा नाक बहने या बंद होने जैसे लक्षणों पर चिकित्सक से परामर्श लेने की सलाह दी। इसके साथ ही उन्होंने आग को बिना निगरानी के न छोड़ने की अपील की और बंद एवं हवादार न होने वाले कमरों में हिटर, मोमबत्ती, लकड़ी या कोयले की सिगड़ी न जलाने की चेतावनी दी, ताकि कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता से बचा जा सके।

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