अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर न्यू लाइफ हेल्थ एंड एजुकेशन सोसाइटी में योगमय हुआ वातावरण

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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर न्यू लाइफ हेल्थ एंड एजुकेशन सोसाइटी में योगमय हुआ वातावरण

डॉ. प्रिंस जायसवाल के प्रेरणादायी उद्बोधन ने विद्यार्थियों में जगाई स्वस्थ जीवनशैली की चेतना

बैकुंठपुर ।

भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर एवं विश्व मानवता को स्वस्थ जीवन का संदेश देने वाली योग परंपरा के सम्मान में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर न्यू लाइफ हेल्थ एंड एजुकेशन सोसाइटी में उत्साह, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्था के संचालक डॉ. प्रिंस जायसवाल के प्रेरणादायी नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं एवं समस्त स्टाफ ने योगाभ्यास कर स्वस्थ, संतुलित और जागरूक जीवनशैली का संदेश दिया। योग की दिव्य चेतना से ओतप्रोत इस आयोजन ने न केवल स्वास्थ्य संवर्धन का संकल्प दोहराया, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति नई पीढ़ी को जागरूक करने का भी सार्थक प्रयास किया।
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बैकुंठपुर। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के पावन अवसर पर न्यू लाइफ हेल्थ एंड एजुकेशन सोसाइटी परिसर योगमय वातावरण से सराबोर हो उठा। संस्था के संचालक डॉ. प्रिंस जायसवाल के कुशल मार्गदर्शन एवं प्रेरणादायी नेतृत्व में आयोजित विशेष योग कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं तथा समस्त स्टाफ ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए योगाभ्यास किया और स्वस्थ जीवन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।


कार्यक्रम का शुभारंभ सामूहिक योगाभ्यास से हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान की क्रियाओं का अभ्यास कर शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन का अनुभव किया। योग के माध्यम से स्वास्थ्य, अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश पूरे परिसर में प्रतिध्वनित होता रहा।
इस अवसर पर अपने प्रेरक उद्बोधन में संस्था के संचालक डॉ. प्रिंस जायसवाल ने कहा कि योग केवल एक दिवस का आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, स्वस्थ और ऊर्जावान बनाने की एक सतत प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की वैश्विक थीम “स्वस्थ आयु के लिए योग” मानव जीवन में योग की बढ़ती प्रासंगिकता को दर्शाती है। आज के तनावपूर्ण और व्यस्त जीवन में योग ही वह अमूल्य साधन है, जो व्यक्ति को शारीरिक सुदृढ़ता, मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन प्रदान करता है।
डॉ. जायसवाल ने कहा कि योग भारत की प्राचीन संस्कृति, गौरवशाली परंपरा और आध्यात्मिक विरासत का अनुपम उपहार है, जिसे आज सम्पूर्ण विश्व अपनाकर लाभान्वित हो रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनाएं और अपने परिवार तथा समाज को भी इसके लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास से न केवल रोगों से बचाव संभव है, बल्कि व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास भी होता है।
कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि योग उन्हें आत्मविश्वास, एकाग्रता और मानसिक शांति प्रदान करता है। विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि वे नियमित रूप से योगाभ्यास करेंगे और स्वस्थ समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएंगे। योगाभ्यास के दौरान विद्यार्थियों का उत्साह और अनुशासन देखते ही बन रहा था।
संस्था के शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने भी योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग मानव जीवन को स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक दिशा प्रदान करता है। उन्होंने सभी नागरिकों से नियमित योग अपनाने तथा स्वस्थ भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
अंत में समस्त प्रतिभागियों ने योग को जन-जन तक पहुंचाने और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को उत्कृष्टता, संतुलन और आत्मिक उन्नति की ओर ले जाने वाला एक संपूर्ण विज्ञान है। न्यू लाइफ हेल्थ एंड एजुकेशन सोसाइटी द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम स्वास्थ्य जागरूकता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल साबित हुआ।

योगाचार्य ने कराया विभिन्न आसनों और प्राणायाम का अभ्यास

सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम में योगाचार्य द्वारा प्रतिभागियों को ग्रीवा चालन, हस्त चालन, कटि चालन, ताड़ासन, वृक्षासन, वज्रासन, मंडूकासन, दण्डासन और पद्मासन सहित अनेक योगासन कराए गए। इसके साथ ही अर्धहलासन, उत्तानपादासन, भुजंगासन, शलभासन और शशांकासन जैसी योग मुद्राओं का भी अभ्यास कराया गया। श्वास आधारित प्राणायाम के अंतर्गत अनुलोम-विलोम, कपालभाति एवं भ्रामरी प्राणायाम की विधि और उनके लाभों की जानकारी दी गई।

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