डीजल-पेट्रोल सहित खाद्य तेल की मूल्य वृद्धि ने आम लोगो का तेल निकाल दिया है। बाजार में इनके दाम सुनकर ही लोगों के होश फाक्ता होने लगे है। जिसके कारण बढ़े दाम से हर वर्ग का बजट बिगड़ गया है। लाकडाउन के बीच खाद्य तेल से लेकर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई बेतहाशा वृद्धि ने कमजोर आर्थिक वर्ग के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। अधिकतम सौ रुपये लीटर बिकने वाला खाद्य तेल बीते एक माह के अंदर डेढ़ गुना बढ़कर 150 रुपये किलो पर पहुंच गया है, जबकि पेट्रोल 92 रुपये और डीजल 92 रुपये लीटर पर पहुॅच गया है।
तेल की बढ़ती कीमतों से सर्वाधिक मार मध्यम वर्ग पर पड़ा है। जानकारी के मुताबिक पिछले एक माह में पेट्रोल-डीजल के दाम में धीरे-धीरे हुई वृद्धि से कीमत रिकार्ड तोड़ चुकी है। वहीं लाकडाउन की वजह से खाद्य तेल की कीमत भी आसमान छू रहा है। किराना व्यापारीये का कहना है कि दाम में इतनी वृद्धि होगी यह किसी ने भी नहीं सोचा था। सामान्य फल्ली तेल की कीमत बढ़ने से रिफाइन और सरसों तेल की कीमतों में भी इजाफा हो रहा है।
एक साल में 24 रुपये तक बढ गये डीजल पेट्रोल दाम
गत वर्ष ठिक 1 साल पहले षहर में मई के महिने में पेट्रोल की कीमत 71.04 रुपये प्रति लीटर थी जो अब बढ़कर 92.90 रुपये हो गई है। इस तरह से 12 महिने में पेट्रोल की कीमत में करीब 21 रुपये प्रतिलीटर की वृद्धि हुई है। तो वही पर डीजल की दाम पिछले साल मई के महिने में 68.21 था जो अब बढकर 92.52 पैसा हो गया है। बैकुन्ठ फ्यूल की संचालिका सीमा रानी हस्सा का कहना है कि विगत एक वर्ष में डीजल के दाम करीब 24 रुपये प्रतिलीटर बढ़ी है।
तेल में प्रति टीन ढाई सौ रुपये का इजाफा
खाद्य तेल की कीमतों की बात करें तो फल्ली तेल लाकडाउन के पहले दो हजार रुपये प्रति टीन था जो लाकडाउन के बाद बढ़कर 2250 रुपये हो गया है। इसमें अलग अलग कंपनी के तेल की कीमतें है जिसमें कुछ 23 सौ रुपये प्रति टीन है। वहीं चिल्हर में तेल 160 रुपये प्रतिकिलो के भाव से बिक रहा है। व्यापारियों का कहना है कीमतों में और कितनी वृद्धि होगी उन्हें भी नहीं मालूम, लेकिन इससे व्यवसाय जरुर प्रभावित हो रहा है।
as

+ There are no comments
Add yours