आठ दिनो की नवरात्री का कल से हो रहा आरम्भ…..

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Baikunthpur @ Tahkikat News

शक्ति का पर्व नवरात्रि आज गुरुवार से शुरू हो रहा हैं। साल में 2बार नवरात्रि आती है लेकिन सबसे अधिक जोश और उमंग अश्विन माह की नवरात्रि में देखने को मिलती है। इसमें मां दुर्गा के सभी नौ रूपों की साधना कर उत्सव मनाया जाता है। जगह-जगह माता की प्रतिमा स्थापित की जाती है। फिर दशहरे के दूसरे दिन विसर्जन किया जाता है।
पितृ पक्ष में एक तिथि दो दिन पड़ने से पितृ पक्ष 16 दिनों तक मनाया गया। वहीं गुरुवार सात अक्टूबर को शुरू हो रही शारदीय नवरात्र में दो तिथि एक ही दिन पड़ेगी। एक ही दिन दो तिथि पड़ने से नवरात्रि आठ दिनों की रहेगी। आठ दिनों में ही नौ देवियों की पूजा-अर्चना की जाएगी। शास्त्र के जानकारो की माने तो इस बार नवरात्रि सात अक्टूबर को शुरू होकर 14 अक्टूबर को समाप्त होगी। नौ अक्टूबर को तृतीया और चतुर्थी तिथि एक साथ मनाई जाएगी। इसी दिन माता के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा और चौथे स्वरूप कुष्मांडा देवी की पूजा एक साथ की जाएगी।

एैंसे करें नवरात्रि में पूजन

पूजा स्थान पर कलश की स्थापना करने से पहले उस जगह को गंगा जल से शुद्घ कर कलश को पांच तरह के पत्तों से सजाएं। उसमें हल्दी की गांठ, सुपारी, दूर्वा, आदि रखें व कलश को स्थापित करने के लिए उसके नीचे मिट्टी की वेदी बनाएं। जिसमें जौ बोये, जौ बोने की विधि धन-धान्य देने वाली देवी अन्नपूर्णा को खुश करने के लिए की जाती है। मां दुर्गा की फोटो या मूर्ति को पूजा स्थल के बीच स्थापित करें। जिसके बाद मां दुर्गा को श्रृंगार, रोली ,चावल, सिंदूर, माला, फूल, चुनरी, साड़ी, आभूषण अर्पित करें। कलश में अखंड दीप जलाया जाए, जिसे व्रत के आखिरी दिन तक जलाया जाना चाहिए।

नवरात्रि में क्या करें, क्या न करें

इन दिनों व्रत रखने वाले को जमीन पर सोना चाहिए। ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। व्रत करने वाले को फलाहार ही करना चाहिए। नारियल, नींबू, अनार, केला, मौसमी आदि फल तथा अन्न का भोग लगाना चाहिए। व्रत करने वाले को संकल्प लेना चाहिए कि हमेशा क्षमा, दया, उदारता का भाव रखेगा। इन दिनों व्रती को क्रोध, मोह, लोभ आदि दुष्प्रवृत्तियों का त्याग करना चाहिए। देवी का आह्वान, पूजन, विसर्जन, पाठ आदि सब प्रातःकाल में शुभ होते हैं, अतः इन्हें इसी दौरान पूरा करना चाहिए।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना व अखंड दीपक जलाया जाता है। इसके बाद नौ दिनों तक ये कलश स्थापित रहता है। आखिरी दिन इसका विसर्जन किया जाता है। इस बार शारदीय नवरात्र पर कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 9ः33 बजे से 11ः31 बजे तक रहेगा। इसके बाद दोपहर 3ः33 बजे से शाम 5ः05 बजे तक रहेगा। लेकिन बेहतर है कि आप सुबह के समय ये स्थापना करें।

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