सोनहत में दोहराई गई 9 वर्ष पुरानी रामगढ छात्रावास कान्ड…….

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नाबालिक छात्रा ने लगभग 6 महिने के नवजात को दिया जन्म

कोरिया जिले के सोनहत विकासखण्ड के मुखयालय स्थित सरकारी एकलव्य आर्दश कन्या छात्रावास के पीछे नवजात का शव मिलने की घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि छात्रावास में निवास करने वाली 14 वर्षीय नाबालिग छात्रा, दुष्कर्म से गर्भवती हो गई थी। छात्रावास में ही उसने समय पूर्व मृत नवजात को जन्म दिया था। बाद में उसके शव को मिली भगत कर छात्रावास के पीछे फेंक दिया गया। गुरुवार को कुछ ग्रामिणो ने जब नवजात का शव देखा तो इसकी सूचना पर पुलिस को दिया। वही पर एक ओर यह भी बात चल रही है कि छात्रावास प्रबंधन के द्धारा 28 फरवरी की रात 11 बजे सोनहत थाने को मामले की सूचना दे दी गई थी। जिसके बाद लडकी के मा को इसकी सूचना दी गई जिस पर नाबालिक लडकी के मॉ के द्धारा बेटी और मृत नवजात के शव को अपने गृहग्राम में दफना दिया गया। सुबह मामले में हो हल्ला मचने के बाद चरचा पलिस ने छात्रा के गृहग्राम में पहुॅकर मृतक नवजात का शव निकवाकर उसका पीएम कराया जिसके बाद अन्य फारेसिंक जॉच/परिक्षण के लिए उसे अम्बिकापुर मेडिकल कॉलेज भेज दिया।

बताया जा रहा है कि नाबालिग छात्रा के साथ संबंध बनाने बाला भी नाबालिग है। बयान के आधार पर कोरिया जिले के ही एक थाने में संबंधित नाबालिग के विरुद्ध दुष्कर्म व लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण अधिनियम की धारा व 376 के तहत प्राथमिकी की गई है। घटना 29 फरवरी की बताई जा रही है।
कन्या छात्रावास में रह रही छात्रा के बच्चे के जन्म देने से प्रशासनिक अमले में भी हड़कंप है। घटना की जानकारी के बाद सहायक आयुक्त आदिवासी विकास जांच के लिए छात्रावास में पहुंची थी। उन्होंने पूरे प्रकरण की जानकारी ली है। अभी तक किसी के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जांच के बाद छात्रावास प्रबंधन पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई संभावित है। मामले में एसडीओपी कविता ठाकुर ने कहा कि दोनों नाबालिग हैं। कम उम्र के कारण छात्रा समझ नहीं पाई और प्रसव हो गया। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट हो सकेगा कि नवजात कितने माह का है।

9 साल बाद आई दूसरी घटना प्रकाश में

कोरिया जिला सामन्यतः पिछडा आदिवासी जिला माना जाता है यही कारण है कि सेंसरसीप के कारण जिले के वनांचल क्षेत्रो में क्या क्या हो रहा है किसी को पता ही नही चल पाता है। गाहे बगाहे जो कुछ मामले प्रकाश में आ जाते है वो प्रशासन की नाकामी की मिशाल ही बन जाते हैं। 22 जनवरी 2015 को एक एैसा ही मामला सामने आया था उस समय मामला प्रकाश में आने के बाद तात्कालिन सहायक आयुक्त कोरिया ने शासन को गुमराह करते हुए जानकारी दिया था कि इस तरह की कोई घटना नहीं है, मीडिया में आ रही खबरें गलत और निराधार हैं। लेकिन कलेक्टर एस प्रकाश की जांच में छात्रा के गर्भवती होने की बात सामने आई। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत की थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए आदिम जाति विकास मंत्री ने सहायक आयुक्त ए.के.गढ़ेवाल के खिलाफ निलम्बन की कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उस समय श्री गढ़ेवाल पर कोरिया जिले के रामगढ़ (विकासखंड सोनहत) स्थित आदिवासी प्री मेट्रिक कन्या छात्रावास की एक नाबालिक छात्रा के गर्भवती होने और उसकी डिलीवरी होने के मामले में शासन को गुमराह करने की कोशिश की। मामले में नाबालिक के परिजनो समेत कई को सजा भी हुई थी। आज लगभग 9 साल बाद एैसा ही मामला एक बार फिर सामने आया है। इस तरह का कृत्य बीना मिलीभगत के अंजाम देना संभव ही नही लगता। फिर देखना होगा कि मामला प्रकाश में आने के बाद विभाग के मुखिया, छात्रावास के जिम्मेदार और सुरक्षा प्रहरी पर कब और क्या कार्यवाई होती है। छात्रावासो खासकर बालिका छात्रावासो का बेहद बुराहाल है वहा पर शोषण की खबरे गाहे बगाहे सामने आती ही रहती है । जबकि सारे मामले को दबा दिया जाता है वही पर यह मामला भी मैंनेज करने का प्रयास चल रहा है। कुछ जानकार लोग तो बता रहे है रामगढ छात्रावास और सोनहत छात्रावास के कान्ड में एक कॉमन फैक्टर है बेहतर हो जिला प्रशासन इसकी निश्पक्ष जॉच कराये और इस तरह के कुकृत्य पर जोरदार प्रहार कर समाज के सामने मिशाल पेश करे ताकि इस प्रकार के मामले की पुर्नरावृति को मजबूती से रोका जा सके।

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