32वीं बार रक्तदान कर बोले लक्ष्मी जायसवाल…..जरूरतमंदों के लिए रक्तदान करना सुखद अनुभूति का एहसास

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बैकुंठपुर।

जरूरतमंदों के लिए रक्तदान करने में गजब की सुखद अनुभूति का एहसास होता है। ऐसे में बस यूं हीं मुंह से निकल जाता है कि एक बार रक्तदान कर देखो तो बड़ा ही सुकून मिलता है। यह कहना है अब तक 32वीं बार रक्तदान करने वाले बैकुंठपुर के व्यापारी लक्ष्मी नारायण जायसवाल का। उन्होंने कहा कि रक्तदान करने की प्रेरणा मिलने के बाद स्वयं रक्तदान करने की ठान ली। अब तो ऐसा लगता है कि कब किसी जरूरतमंद का फोन आए और हमारे रक्त से उसकी जान बच सके।


वह कहते हैं कि रक्तदान करने की अब तो मानो आदत सी लग गई है और बस इसी स्लोगन के साथ रक्तदान करने को अग्रसर रहता हूं कि खून देकर देखो सुकून मिलता है। लक्ष्मी नारायण जायसवाल कहते हैं कि जब 18 की उम्र हुई तो पहली बार रक्तदान किया। शुरू में रक्तदान करने में अंदर से थोडा डर व असहज सा महसूस हो रहा था, लेकिन एक बार रक्तदान करते ही भय मन से भाग गया। उसके बाद तो उत्साह के साथ रक्तदान करने में आनंद आता है कि मेरा रक्त किसी को काम आया। अब तो इंतजार रहता है कि कब रक्त के लिए फोन आए और स्टाफ के भरोसे दुकान छोड़कर रक्तदान करने चला जाऊं।

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