रूठे मानसून ने घुघट खोला अब मिलेगी अटकी खेती को गति………मंगलवार की सुबह से क्षेत्र में मेहरबान हुए बदरा……..बारिश का दौर
बैकुंठपुर।
पिछले एक सप्ताह से रुठे मानसून ने तीन दिनो से हो रही मानसूनी बारिश ने धान की खेती को गति दे दी है। सप्ताह भर से अधिक समय से रुठे मानसून के कारण खेतों में लगाई गई फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई थी। इससे किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें खिच गई थीं। पानी नहीं मिलने से फसल अंकुरण के बाद बर्बाद होने की कगर पर पहुंच गई थी। मौसम में आए बदलाव के बाद हो रही बारिश से किसानों के चेहरे खिल गए हैं। वहीं लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली है।
फसल का अंकुरण भी हो गया था इस समय खरीफ की फसल का सीजन चल रहा है। किसानों की फसल का अंकुरण भी हो गया है। बीते कुछ दिनों से बारिश नहीं होने के कारण किसान फसल को लेकर पशोपेश में थे। अचानक मौसम बदल गया और बारिश होने लगी। बारिश के बाद किसानों का कहना है कि यह बारिश फसलों के लिए काफी फायदा पहुंचाएगी। फसल के लिए बारिश संजीवनी साबित होगी। बारिश से किसानों को सिंचाई नहीं करना पड़ेगा। साथ ही यूरिया का छिड़काव भी किसान कर लेंगे। खासतौर पर यह पानी उन किसानों के लिए फायदेमंद है जिनकी फसलों का अंकुरण हो चुका है।
किसानों ने कहा-अब जोरदार बारिश का है इंतजार-मानसून आने के बाद जिले में खरीफ की बोवाई लगभग पूरी चुकी है और धान के साथ अन्य फसल भी खेतों में नजर आने लगी है। इधर आसमान से बादल छाए रहने के बाद भी बारिश नहीं होने के कारण गर्मी से लोग बेहाल हुए तो खेतों की फसलें भी मुरझाने लगीं। यह देखकर किसान परेशान हो गए थे।
किसानों का कहना है कि इस साल मानसून ने समय पर दस्तक तो दे दी, लेकिन शुरूआत में अच्छी बारिश होने के बाद मानसून रूठ गया। इससे रोपा पद्धति से धान लगाने वालों को दिक्कतें हो रही है। किसानों का कहना है कि जल्द ही जोरदार बारिश नहीं हुई तो रोपा पद्धति से धान की फसल लगाने वाले किसानों को नुकसानी का सामना करना पड़ सकता है।
उमस से लोग परेशान
क्षेत्र में पिछले दिनों से बारिश नहीं होने के कारण उमस अपना रौद्र रूप दिखा रही है। गर्मी से लोग परेशान हो रहे है। वहीं फसलें भी प्रभावित हो रही हैं। लेकिन इससे किसानों और लोगों को राहत मिली है। गर्मी, उमस के कारण लोगों को कूलर पंखे भी राहत नहीं दे रहे थे। लोग चिपकन भरी गर्मी से काफी परेशान रहे। इससे पूर्व मानसून की दस्तक के बाद शुरूआती दिनों में जोरदार बारिश होने के कारण किसानों के चेहरे खिल उठे थे। किसानों ने धान, मक्का, उड़द आदि फसलों की जोरदार बोनी भी कर दी थी।



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