जब भगवान गोपियो से बोले …… तुम्हे मेरा वियोग कभी नहीं हो सकता, क्योंकि मैं आत्मरूप हूॅं सदैव मेरे ध्यान में लीन रहो, शीघ्र ही मुझे प्राप्त करोगी

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तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर

बैकुन्ठपुर के कंचनपुर में चल रहे सात दिवसीय भागवत कथा के छठे दिन कथावाचक देवी मानस माधुरी ने कंस वध का प्रसंग सुनाया। उन्होने कहा कि कंस वध के पश्चात भगवान श्री कृष्ण जी का वापस गोकुल आने पर माता यशोदा का श्री कृष्ण जी से पूछना कि क्या तुम्हें अपनी माता की याद नहीं आई तथा इस दौरान गोकुल की गोपियों की तरफ से रोजाना नया माखन त्याग कर श्री कृष्ण का इंतजार करना कि कब कान्हा गोकुल वापिस आए व माखन का भोग लगा उनके साथ पवित्र रास रचाए का भी वृतांत संगत को सुनाया। कथा के आखिर में भगवान श्री कृष्ण जी का रुक्मणी से विवाह की पूरी गाथा पर भी मानस माध्ुारी ने रोशनी डाली। भगवान श्री कृष्ण व रूक्मणी के विवाह का प्रसंग आते ही सारी संगत की तरफ से जयकारों लगाए गए व संगत खुशी से नाचने झूमने लगी। जिससे पूरा वातावरण कृष्णमय हो गया। इस मौके प्रभाकर सिंह ने बताया कि कल कथा के आखरी दिन गुरुवार को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा करवाए जाएंगे।


किया उद्धव चरित्र का वर्णन


श्री भवानी मंदिर चीका में छठवें दिन श्री भागवत कथा में कथावाचिक ने कहा कि दूसरे की पीड़ा को समझने वाला और मुसीबत में दूसरों की सहायता करने के समान कोई पुण्य नहीं है। अतः जीव को धन, प्रतिष्ठा के साथ सामाजिक कार्यों में सेवा करनी चाहिए। मानस माध्ुारी ने कथा के संबोधन में उद्धव चरित्र का वर्णन किया। उद्धव साक्षात ब्रहस्पति के शिष्य थे। मथुरा प्रवास में जब श्री कृष्ण को अपने माता-पिता तथा गोपियों के विरह दुख का स्मरण होता है तो उद्धव को नंदवक गोकुल भेजते है। गोपियों के वियोग-ताप को शांत करने का आदेश देते है। उद्धव सहर्ष कृष्ण का संदेश लेकर ब्रज जाते है और नंदिदि गोपों तथा गोपियों को प्रसन्न करते हैं और श्री कृष्ण जी के प्रति गोपियों के कांता भाव के अनन्य अनुराग को प्रत्यक्ष देखकर उद्धव अत्यंत प्रभावित होते है। वे श्री कृष्ण का यह संदेश सुनाते हैं कि तुम्हे मेरा वियोग कभी नहीं हो सकता,क्योंकि मैं आत्मरूप हूॅं। सदैव मेरे ध्यान में लीन रहो। तुम सब वासनाओं से शून्य शुद्ध मन से मुझ में अनुरक्त रहकर मेरा ध्यान करने में शीघ्र ही मुझे प्राप्त करोगी।
भगवान श्री कृष्ण कथा का आरम्भ करते हुए साध्वी जी ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उपस्थित भक्तजन नाचने पर मजबूर होकर भगवान कृष्ण का गुणगान किया। भवानी मंदिर प्रांगण में श्री मद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में वासियों की बहुत अधिक भागीदारी रही और सब ने आनंदमय भक्तिमय वातावरण में कृष्ण भावना मृत भक्ति में डूबकर कथा का आन्नद लिया।

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