तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क
कोरोना के बाद प्रदेश में जापानी बुखार यानी जैपनीज इंसेफलाइटिस से बचाव के लिए पांच जिलों में टीकाकरण अभियान शुरू होने वाला है। यह अभियान 23 नवंबर से 18 दिसंबर तक चलेगा। बताया जा रहा है कि बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, धमतरी और कोंडागांव जिले में स्वास्थ्यकर्मी टीकाकरण अभियान चलाएंगे। यह बुखार जानलेवा है जिसमें 70 प्रतिशत रोगी की या तो मौत हो जाती है, या वह दीर्घकालिक न्यूरोलाजिकल विकलांगता से ग्रसित हो जाता है। यह बीमारी 15 वर्ष के बच्चों को ही ज्यादा प्रभावित करती है, जिसकी रोकथाम टीकाकरण से ही संभव है। राज्य टीकाकरण अधिकारी डा. अमर सिंह ठाकुर ने बताया कोविड-19 नियमों का पालन करते हुए चार सप्ताह तक जेई टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। इस सबंध में सरगुजा संभाग में भी एतियात की जरुरत है।
मच्छर के काटने से होता है जापानी बुखार
डेंगू मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारियों के अलावा मच्छर एक और ऐसी बीमारी फैलाते हैं जिसका सीधा असर रोगी के हाथ पैरों पर नहीं बल्कि रोगी के दिमाग पर पड़ता है। इतना ही नहीं इस बीमारी में मरीज को दौरा पड़ने के बाद वो कोमा तक में जा सकता है। जी हां इस बीमारी का नाम है जापानी बुखार। यह एक प्रकार का दिमागी बुखार है जो वाइरल संक्रमण की वजह से होता है। बता दें, यह एक खास किस्म के वायरस की वजह से होता है जो मच्छर या सूअर की वजह से होता है। इसके अलावा ये गंदगी से भी उत्पन्न हो सकता है।
जापानी बुखार का वायरस शरीर के संपर्क में आते ही सबसे पहले सीधे दिमाग पर असर करता है। दिमाग में इस वायरस के पहुंचते ही ये रोगी के सोचने, समझने, देखने और सुनने की क्षमता को प्रभावित कर देता है। इस वायरस में ज्यादातर 1 से 14 साल के बच्चे और 65 वर्ष से ज्यादा के लोग ही चपेट में आते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इस बीमारी का प्रकोप सबसे ज्यादा साल के इन तीन महीनों में अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में अधिक बना रहता है।
मच्छर से पैदा होने वाले इस वायरस का नाम अमरीका के विस्कॉन्सिन राज्य के ला क्रोसे शहर के नाम पर पड़ा, जहां पहली बार 1963 में, इसका पता चला था। यह एक दुर्लभ बीमारी है। इस बीमारी में पीड़ित व्यक्ति को बुखार, सिरदर्द, उल्टी, थकान और सुस्ती रहती है। इस बीमारी के गंभीर होने पर कब्ज, बेहोशी, कोमा और लकवे के साथ यह लिंफटिक फाइलेरिया या हाथीपांव तक के शिकार हो सकते हैं। इस बीमारी के लार्वा के कृमि बनने में करीब एक साल का समय लगता है।
बीमारी के लक्षण
-तेज बुखार
-सिरदर्द
-गर्दन में जकड़न
-कमजोरी
-उल्टी होना
-हमेशा सुस्त रहना
-भूख कम लगना
-अतिसंवेदनशील होना
ऐसे करें बचाव
-गंदे पानी के संपर्क में आने से बचें
-मच्छरों से बचाव के लिए घर के आसपास पानी न जमा होने दें
-बारिश के मौसम में बच्चों को बेहतर खान-पान दें
-मच्छरदानी या कीटनाशक दवा का उपयोग करें
-बच्चों को पूरे कपड़े पहनाएं ताकि शरीर का हर हिस्सा ढका रहे
-इन्सेफेलाइटिस से बचने के लिए टीकाकरण भी मौजूद है


+ There are no comments
Add yours