12535 से अधिक घरों तक पहुंचेगा स्वास्थ्य विभाग
तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
मलेरिया मुक्त कोरिया अभियान का शुभारंभ मंगलवार से बैकुंठपुर जिले में हो चुका है। इस अभियान में 725406 लोगों की मलेरिया जांच कर उनको दवाइयां बांटी जानी है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. एके करण ने बताया अभियान के दौरान 104 ग्राम के 7.25 लाख लोगों की मलेरिया जांच कर उन्हें दवा वितरित करने का कार्य किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक ग्राम में स्वास्थ्य कार्यकर्ता व मितानिन घर-घर जाकर लोगों की जांच करेंगे। जांच के लिये 302 दलों का गठन किया गया है। 30 जनवरी 2021 तक चलने वाले इस अभियान में जिले के 12535 घरों तक स्वास्थ्य विभाग अपनी पहुंच बनाएगा। जांच के दौरान मलेरिया पॉजिटिव पाए जाने वाले लोगों का तत्काल इलाज शुरू किया जाएगा। पूर्ण इलाज सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ता मलेरिया पॉजिटिव पाए गए लोगों को पहली खुराक अपने सामने ही खिलाएंगे। स्थानीय मितानिन पीड़ितों के फॉलो-अप खुराक सेवन की निगरानी स्वयं करेगी। पीड़ितों द्वारा दवा की पूर्ण खुराक लिए जाने के बाद खाली रैपर भी संग्रहित किये जाएंगे। मलेरिया जांच वाले घरों पर स्टीकर चिपकाया जाएगा । इन स्टीकर पर दवा के खुराक की जानकारी का भी उल्लेख रहेगा ।

सीएमएचओ डॉ. रामेश्वर शर्मा ने जिले वासियों से अपील करते हुए कहा, “घर-घर भ्रमण के दौरान आए स्वास्थ्यकर्मी से अपनी जांच कराएं, घर या ऑफिस के आसपास पानी जमा न होने दें। नालियों को साफ रखें। जिले को मलेरिया मुक्त बनाने के लिये अपना सहयोग दें।“
लोगों की जागरूकता और स्वास्थ्य कर्मियों की प्रतिबद्धता की वजह से मलेरिया को मात देने में सफलता मिल रही है। मलेरिया मुक्त कोरिया जैसा बड़ा अभियान चलाकर ठोस रणनीति के साथ मलेरिया को यहां से मिटाने की मुहिम चलाई गई है, जो अब सफल हो रही है।
मादा एनाफिलीज मच्छ के काटने से होता है मलेरिया
मलेरिया मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। खून के जरिए शरीर में घुसते ही विषाणु यकृत (लीवर) तक पहुंच जाते हैं। लीवर में मलेरिया का विषाणु परिपक्व हो जाता है और बच्चे पैदा करने लगता है। विषाणुओं की संख्या बढने के साथ ही शरीर बीमार होने लगता है। शुरुआत में रोगी को शरीर में दर्द के साथ बुखार, सिरदर्द, उल्टी या गले में सूखे कफ की शिकायत होती है। ऐसा होने पर अगर खून की जांच कराई जाए तो मलेरिया का पता आसानी से चल जाता है। लापरवाही की जाए या समय से इलाज न किया जाए तो रोगी की हालत गंभीर भी हो सकती है ।

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