वैसे तो शासकीय जमीनो पर कब्जा किया जाना कोई नई बात नहीं है शमशान से लेकर देव स्थल ,गौचर ,स्कूल मैदान, वन भू खंडों जैसे तमाम शासकीय जमीनो पर कब्जा किये जाने का सिलसिला काफी समय से चला आ रहा है इसी तारतम्य में राजस्व दस्तावेजों में दर्ज क्षेत्र के नदी किनारे शासकीय कछारी भूमियों पर अतिक्रमणकारियों द्वारा अवैध कब्जा कर कृषि कार्य बड़े पैमाने में किया जा रहा है जिससे नदीयो के अस्मिता पर खतरा मंडराने लगा है लखनपुर- तहसील क्षेत्र के चुल्हट नदी चन्दनई नदी के अलावा ऐसे कई छोटी बड़ी नदिया है जिनके दोनों किनारों के भू-भाग को पाटकर खेतों में तब्दील कर दिया जा रहा है। भौगोलिक दृष्टि कोण से नदी कछारों का दायरा घटने कारण नदियों के चौड़ाई भी पूर्व के अपेक्षा काफी कम हो गई है । जिससे नदिया सक्रीण होते जा रहे हैं। नदी भूमि पर अवैध कब्जा किए जाने से पानी का धारा प्रवाह अवरुद्ध होने के साथ नदी कछार में बने खेतों पर लगे फसलों में रासायनिक उर्वरक जहरीली किटनाशक अन्य दवाईयां डाले जाते है जिसके कारण नदियों का पानी बुनियादी तौर पर प्रदूषित होने लगा है फलत आम जन-जीवन ही नहीं पशु पक्षीयो में जलजनित रोग होने के साथ सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने का अंदेशा बना रहता है। पानी दूषित एवं जहरीली हो जाती है जिसका उपयोग इन्सान पशु पक्षी अन्य जीव जंतु खासतौर पर करते हैं।ऐ नदिया नगर गांव कस्बों को एक दूसरे से जोड़ते हैं यदि बात करें चुल्हट नदी की तो लखनपुर- नगरीय निकाय क्षेत्र से बहते हुए कई ग्रामों में इस नदी का पानी पहुंचता है जिसका उपयोग कई ग्रामों के लोग करते हैं उक्त दूषित पानी के उपयोग करने मनुष्य जीव जंतुओं में नाना प्रकार के बीमारियां भी हो रही हैं यदि समय रहते इसकी रोकथाम नहीं की गई तो भयावाह परिणाम सामने आ सकते हैं राजस्व विभाग की मौन सहमति से क्षेत्र के तमाम नदी के किनारों को मनमाने ढंग से कब्जे में लिया जा रहा है तथा प्रकृति द्वारा प्रदत्त स्वच्छ पानी को दूषित किया जा रहा है क्षेत्रवासियों का मानना है कि यदि इस पर समय रहते लगाम नहीं लगाया गया तो नदी के कछारी भूमि पर बेजा कब्जा किये जाने का खेल यूं ही चलता रहेगा। शासन प्रशासन चाहे तो नदी तटों पर से अवैध कब्जा हटाया जाकर आम जन-जीवन को दूषित जहरीले पानी से ही नहीं वरन प्राकृतिक नदियों को प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है।
नदी किनारे के शासकीय जमीनो पर अवैध कब्जा का सैलाब – विभाग मौन
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