तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर 30 जनवरी से प्रारंभ हुए राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन पखवाड़े के अंतर्गत कुष्ठ रोग जागरुकता अभियान 13 फरवरी तक चलाया जा रहा है। इस दौरान कुष्ठ रोगियों की पहचान की जा रही है साथ ही उनको उपचार भी उपलब्ध कराया जा रहा है ।
कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डा डी. के. चिकनजुरी ने बताया, “पखवाडे के दौरान कुष्ठ रोग के मरीजों के रूप में 06 नये रोगी चिचिन्हित किये गए है। कुष्ठ रोग से जुड़ी हुईं भ्रांतियों पर लोगों को ध्यान नहीं देना चाहिए, पखबाड़े में मरीजों और लोगों को इसके कारणों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। हमारे जिले मे 23 रोगियो का इलाज जारी है उन्होंने बताया सफलतापूर्वक उपचार के बाद 47 रोगी इस रोग से मुक्त हो चुके है इसलिए यह सच है कि कुष्ठ रोग का इलाज संभव है।“
जानकारी देते हुए सीएमएचओ डा रामेश्वर शर्मा ने बताया,”स्वास्थ्य विभाग द्वारा शिक्षा, पंचायत, स्वास्थ्यकर्मी व अन्य विभागों से सहयोग लेकर कुष्ठ रोग से जिले को मुक्त करने जागरुकता अभियान जारी है ।कुष्ठ रोग से उपचारित हो चुके व्यक्तियों की परिवार और समाज से जोडने के लिए लोगो मे जागरूकता लाने के लिए हमारे प्रयास निरंतर जारी है।“
कुष्ठ रोग के संकेत व लक्षण
त्वचा पर घाव होना कुष्ठ रोग के प्राथमिक संकेत हैं। यदि इसका उपचार न किया जाए तो कुष्ठरोग पूरे शरीर में फैल सकता है जिससे शरीर की त्वचा, नसों, हाथ-पैरों और आंखों सहित शरीर के कई भागों में स्थायी क्षति हो सकती है। इस रोग से त्वचा के रंग और स्वरूप में परिवर्तन दिखाई देने लगता है। कुष्ठ रोग में त्वचा पर रंगहीन दाग हो जाते हैं जिन पर किसी भी चुभन का रोगी को कोई असर नहीं होता। इस रोग के कारण शरीर के कई भाग सुन्न भी हो जाते हैं।
कुष्ठ रोग के कारण प्रभावित अंगों में अक्षमता एवं विकृति आ जाती है, इसलिए छुपे हुए केस को जल्दी से जल्दी खोज कर एवं जांच उपचार कर कुष्ठ रोग का प्रसार रोका जा सकता है और सामाज को कुष्ठ मुक्त कर सकते हैं। कुष्ठ से प्रभावित दो तरह के मरीजों के होने की संभावना देखी जाती है। एक मल्टीबेसिलरी और दूसरा पोसिबेसिलरी। मल्टीबेसिलरी मरीज को 12 माह और पोसिबेसिलरी मरीज को छह माह तक दवा लेनी होती है। हमारे समाज में आज भी अंधविश्वास के कारण कई लोग पूर्व जन्म का पाप मानते हैं ऐसे छुपे हुए रोगी ही कुष्ठ रोग का प्रसार करते हैं, जबकि यह बीमारी एक जीवाणु (लेप्रा बेसीलाई) के कारण होता है।
कुष्ठ रोग के लक्षण क्या हैं?
कुष्ठ रोग के मुख्य लक्षण हैं:
- त्वचा में घाव,
- पैरो के तलवे में अल्सर होना,
- त्वचा मोटी, कठोर और शुष्क होना,
- हाथ, बांह, पैर और टांगों का सुन्न होना,
- नाक से खून निकलना और नाक से पानी बहना,
कुष्ठ रोग होने के कारण
- यह रोग आमतौर पर दो प्रकार का होता है – पहले प्रकार का कुष्ठ रोग ट्यूबरकुलॉयड और दूसरे प्रकार का कुष्ठ रोग लैप्रोमैटस है। लैप्रोमैटस कुष्ठरोग बहुत ज्यादा खतरनाक होता है और इसके कारण शरीर की त्वचा में बड़े-बड़े उभार और गांठे बन जाती हैं।
- कुष्ठ रोग बीमारी अत्यधिक संक्रामक नहीं है, पर संक्रामक बीमारी है , इसलिए यह छींक और खांसी से निकलने वाली नाक के तरल पदार्थ की बूंदों (droplets) के फैलने के कारण अन्य व्यक्ति को भी हो जाता है। हालांकि यह बीमारी कुष्ठ रोगी को छूने से नहीं होती है।
- इस बिमारी के होने का कारण माइकोबैक्टीरियम जीवाणु बनता है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, इस बीमारी की औसत ऊष्मायन अवधि (संक्रमण के बीच का समय और पांच साल के पहले लक्षण) 5 साल है। इसके लक्षण 20 वर्षों तक दिखाई नहीं देते। कुष्ठ रोग के लिए जिम्मेदार जीवाणु बहुत धीरे-धीरे बढ़ता है।
कुष्ठ रोग के जोखिम इस प्रकार हैं-
- अधिक भीड़ भाड़ वाली जगहों पर यह बीमारी दूसरे व्यक्ति में फैल सकती है।
- कुपोषण (malnutrition) के कारण भी कुष्ठ रोग हो सकता है।
- लंबे समय तक एक ही बिस्तर और चादर का उपयोग करने से भी यह बीमारी हो सकती है।
- खुले में नहाने से भी कुष्ठ रोग होने का खतरा बढ़ सकता है।
कुष्ठ रोग की जांच
- कुष्ठ रोग का निदान रोगी के शरीर में दिखने वाले लक्षणों और त्वचा के आधार पर किया जाता है। डॉक्टर रोगी के स्किन की जांच को न्यूरोलॉजिक परीक्षण से करते हैं।
- इसके अलावा प्रयोगशाला में स्किन बायोप्सी (skin biopsy) भी की जाती है।
- ब्लड टेस्ट, नाक के द्रव का टेस्ट और नर्व बायोप्सी भी की जाती है।
कुष्ठ रोग का इलाज कैसे किया जाता है?
1995 में , W.H.O ने सभी प्रकार के कुष्ठ रोग को ठीक करने के लिए एक मल्टीड्रग थेरेपी विकसित की , जो की दुनिया भर में मुफ्त उपलब्ध है। इसके अलावा कई एंटीबायोटिक दवाओं के कारण होने वाले जीवाणुओं को मारकर कुष्ठ रोग का इलाज करते हैं। जैसे की –
- डैपसोन,
- रिफैम्पिन,
- क्लोफ़ाज़िमाइन,
- मिनोसाइक्लिन,
- ओफ़्लॉक्सासिन,
डॉक्टर आपको एस्पिरिन, प्रेडनिसोन, या थैलिडोमाइड जैसी एक एंटी-इंफ्लामेट्री लेने की सलाह दे सकते हैं। इसका इलाज लगभग 1 से 2 साल तक चल सकता है। और इस बात का ध्यान रखे की अगर आप गर्भवती हैं या हो सकती हैं तो आप कभी भी थैलिडोमाइड न ले। क्योंकि , यह गंभीर जन्म दोष पैदा कर सकता है।
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