12 साल बाद भी नही जिले में षिक्षा अधिकार कानून का नही पालन

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तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर


जिले में निजी स्कूलों द्वारा ट्यूशन फीस के आड़ में पालकों से अवैध वसूली करने का आरोप लगाया अभिभावक लगा रहे है। अभिभावको का कहना है कि निजी स्कूलों द्वारा न्यायालय के फैसले की आड़ में ट्यूशन फीस में समस्त फीस को समायोजित कर वसूली करने बार-बार मैसेज व फोनिक सूचना दी जा रही है। जबकि लॉकडाउन के दौरान की कोई फीस स्कूलों को नहीं देने की बात कही गई थी। स्कूलों द्वारा कोर्ट के आदेश की अवमानना करते हुए नियम विरुद्ध फिस वसूली की जा रही है। वही पर बैकुन्ठपुर में ही किसी स्कूल द्धारा एक ही कक्षा का 5000 तो किसी स्कूल द्धारा 12 हजार वसूला जा रहा है।
जबकि नियमो के मुताबिक जिन पालकों के पास अपने बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने के लिए संसाधन नहीं हैं, उसकी व्यवस्था जब तक स्कूल मुहैय्या नहीं करवाता तब तक कोई भी पालक स्कूल को कोई भी फीस देने के लिए बाध्य नहीं है।
जबकि शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धारा 16 में साफ कहा गया है कि कोई भी स्कूल फीस नहीं देने पर किसी भी छात्र को ना तो स्कूल से निकाल सकता है और न ही उनकी शिक्षा को बाधित कर सकता है और न ही उनको किसी भी परीक्षा में बैठने से वंचित कर सकता है।

निजी स्कूलों पर नही कार्रवाई
जानकार बता रहे हैं कि स्कूल के विरुद्ध शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धारा 17 के तहत मान्यता समाप्त करने की कार्रवाई किया जाना सुनिश्चित है। गौरतलब हो कि शिक्षा में सुधार लाने के लिए 2009 में तत्कालीन सरकार आरटीई कानून लेकर आई थी कानून का मकसद सरकारी स्कूलों की दशा को सुधारना और निजी स्कूलों की मनमानी को रोकना था, लेकिन कानून बनने के 12 साल बाद भी इसका पालन प्रभावी रूप नहीं हो रहा है।

नियम विरुद्ध हो रहा स्कूलो का संचालन
जिले में लगभग 350 निजी स्कूल है, जिसमें से कई किराएं के मकान में संचालित हो रहे हैं तो किसी के स्कूलों के पास खेल का मैदान भी नहीं है इसके बावजूद संचालित हो रहे है। हर साल मान्यता रिन्यूअल भी किया जाता रहा है, जबकि नियमानुसार स्वयं का स्कूल भवन हो, खेल का मैदान हो।

नौकरी देने के नाम पर उनका शोषण
सिर्फ नौकरी देने के नाम पर उनका शोषण किया जा रहा है। आरटीई के अंतर्गत प्रवेशित बच्चों को अच्छी गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देने का प्रावधान है, जिसके लिए स्कूलो द्धारा प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं किया जा रहा है। शिक्षा का अधिकार कानून को लागू हुए 12 साल बीत चुका है किन्तु आज भी प्रायवेट स्कूलों में शिक्षकों को नियुक्ति पत्र नहीं दिया जाता और न ही उनकी सेवा पुस्तिका संधारित किया जाता है और न ही उन्हें बोर्ड द्वारा निर्धारित वेतन दिया जा रहा है।

मान्यता पर सवाल
निर्धारित मानक और मापदंड़ों का पालन करने वाले जिले में निजी स्कूलों की संख्या बहुत ही कम है लेकिन हर साल डीईओ के द्वारा सुविधाविहीन स्कूलों को स्कूल संचालित करने की अनुमति/मान्यता दिया जा रहा है। ऐसे स्कूलों को बोर्ड से संबंद्धता भी दे दिया जाता है। ज्यादातर प्रायवेट स्कूल रेसिडेंसियल भवन में संचालित है, जबकि स्कूल संचालित करने के लिए स्कूल भवन एवं ग्राउंड का प्रावधान है। उदाहरण स्वरुप कोरिया जिले के जिला मुख्यालय बैकुन्ठपुर के कचहरीपारा, महलपारा, हररापारा, ओडगीनाका, छिदडाढ, भाडी, गढेलपारा, प्रेमाबाग सहित विभिन्न ईलाको इस प्रकार के स्कूलो का संचालन हो रहा है।

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