प्रेशरहार्न वाले वाहनों पर कार्रवाई नहीं, लोग परेशान

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तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर

यातायात नियमों के तहत की अनदेखी कर कुछ बिगड़ैल किस्म के युवक इन प्रतिबंधित क्षेत्रों के आसपास से प्रेशर हार्न बजाकर तेज गति में निकल जाते हैं। जिससे वहां से गुजरने वाले और स्थानीय लोगों को काफी परेशानी होती है। क्योंकि ये अपने वाहन में लगे प्रेशर हार्न का इतना उपयोग करते हैं कि जब तक उनके वाहन गुजर नहीं जाते तब तक कुछ सुनाई ही नहीं पड़ता।
वाहनों में प्रेशर हार्न का उपयोग प्रतिबंधित होने के बावजूद जिला मुख्यालय बैकुन्ठपुर की सड़कों पर धड़ल्ले से चार पहिया तथा दो पहिया चालक इसका उपयोग कर रहे हैं। एजेंसी द्वारा वाहन बेचते वक्त सामान्य हार्न लगा होता है। लेकिन खरीदी के बाद लोग अपने वाहनों में तेज आवाज करने वाले प्रेशर हार्न लगवा रहे हैं। युवक बाइक में मौज मस्ती के चलते प्रेशर हार्न लगवा लेते हैं। जिससे आम नागरिकों को परेशानी होती है।
विदित हो कि शासन द्वारा शहर में कई ऐसे शासकीय कार्यालयों, चिकित्सालयों, न्यायालय व विद्यालयों के पास साइलेंस जोन घोषित किये जाने के बावजूद तेज ध्वनि वाले हार्न का प्रयोग नहीं किया जा सकता। लेकिन नियम कायदों को ताक पर रखकर वाहन चालक प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रेशर हार्न बजाकर शासन को चुनौती देते हैं। वाहनों में प्रेशर हार्न लगाने व बजाने पर 10 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रविधान है। नए मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ट्रैफिक पुलिस द्वारा किसी भी बस या दूसरे वाहन का प्रेशर हार्न का चालान नहीं किया गया है।

तेज आवाज से हो सकता है हार्ट अटैक
शहर के बीच प्रेशर हार्न बजाने से सुनने की क्षमता प्रभावित होती है। हमारा कान 30-50 डेसिबल तक सुनने की क्षमता रखता है। इससे अधिक क्षमता के हार्न सीधे-सीधे हमारे दिमाग व कान को प्रभावित कर रहे हैं। इससे तमाम बीमारियों का लोग शिकार हो रहे हैं। इस पर पूरी तरह नियंत्रण होना चाहिए। सड़क पर चल रहे पैदल चल रहे बच्चो, बुजुर्ग, साइकिल सवारों को प्रेशर हार्न की वजह से तेज आवाज के कारण सीधे दिल पर अटैक होता है।

100 डेसिबल से अधिक का शोर हृदयाघात का कारण
मेडिकल एक्सपर्ट की अगर माने तो प्रेशर हार्न के कारण लोगों में चिड़चिड़ापन और बहरेपन की समस्या बढ़ती जा रही है। डाक्टर बताते है कि अधिक डेसिबल से बहरापन मस्तिष्क से संबंधित बीमारियां भी पैदा होती है। बुजुर्ग और बधों अधिक प्रभावित है। इस संबंध में डाक्टरों का कहना है कि 80 डेसिबल से अधिक शोर चिड़चिड़ापन, बहरापन, ब्लड प्रेशर, तनाव, अनिद्रा जैसी बीमारी को जन्म देता है। 100 डेसिबल से अधिक का शोर हृदयाघात का कारण बन सकता है।

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