साग-सब्जी विके्रता ने जिला प्रषासन को दिखाया ठेंगा, लगा दी दुकाने

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तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर

कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने जिले में लाकडाउन बढ़ाए जाने के साथ ही फल, सब्जी व राशन खरीदी के लिए प्रशासन द्वारा नियमों में कढाई के बाद भी जिला मुख्यालय बैकुन्ठपुर में इसका असर विगत 2 दिनो से समाप्त नजर आ रहा है। यहा के सब्जी विक्रेताओ ने लगता है कोरिया कलेक्टर के आदेष एवं महामारी के नियमो को ठेंगा दिखतो हुए अपनी दुकाने सडक के किनारो पर लगाने ष्षुरु कर दिये है। जबकि लाक डाउन जिले में 28 तक लगाई गई है।
जिसके अनुसार सब्जी विक्रताओ को एसडीएम को अपना कोविड नेगेविट रिर्पोट दिखाकर अनुमति पास लेकर गली मोहल्लो में घुमकर सब्जी बेचना था। लेकिन यह सब नियम इन लोगो के आगे कागजी ही नजर आ रहा है। ष्
षुक्रवार को कुछ सब्जी दुकानदारो ने हनुमान मंदिर के पास सडको पर अपनी दुकाने लगााने का साहस दिखाया। जिसके बाद इन पर कोई कार्यवाई नही होने के कारण षनिवार को 50 से 60 दुकानदारो ने अपनी दुकाने सजा लिया । जिसमें से कुछ तो दोपहर 1 बजे तक बाजार अपनी दुकाने लगाये नजर आये।

जिले में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण पर काबू पाने जिला प्रशासन द्वारा 11 अप्रैल से जिले को लाकडाउन किया गया है। पहले लाकडाउन 11 से 19 अप्रैल तक किया गया था। लेकिन बाद में इसकी अवधि से 19 फिर 28 अप्रैल कर दी गई।
दूसरी बार लाकडाउन बढ़ाए जाने के साथ ही प्रशासन ने फल, सब्जी व राशन सामग्री खरीदी के लिए नियमों में छूट दिया जिसके तहत स्ट्रीट वेंडर सुबह छह से दोपहर 12 बजे तक गली, मोहल्लों अथवा कालोनियों में पहुंचकर सामानों की बिक्री कर सकते हैं।

फल, सब्जी विक्रेताओं को किसी भी स्थान पर पसरा नहीं लगाना है। लेकिन प्रशासन द्वारा दी गई ढील का लोग बेजा फायदा उठा रहे हैं। स्ट्रीट वेंडर सुबह से देर शाम तक फल,सब्जी बेच रहे हैं। वहीं कई लोग शहर के अलग-अलग मार्गों पर पसरा लगाकर फल,सब्जी बेच रहे हैं। जबकि प्रशासन के आदेशानुसार सामान बेचने के लिए किसी भी स्थान पर भीड़ नहीं लगाना है।

चैर-चैराहों पर लग रहा मजमा

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए लोगों को घरों के भीतर ही रहना है। किसी भी तरह की भीड़ नहीं जुटानी है लेकिन लाकडाउन बढ़ने के साथ ही कई लोगों का धैर्य जवाब देने लगा हैे। कहीं-कहीं चैक-चैराहों पर लोग मजमा लगाए नजर आ रहे हैं। लोग बाहर खड़े होकर आपस में बतिया रहे हैं। बच्चे भी खेलने-कूदने के नाम पर बाहर निकलने लगे हैं।

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