लाकडाउन में बढी महंगाई व कालाबाजारी से लोग परेषान

Estimated read time 1 min read

तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर

लाकडाउन में तमाम प्रशासनिक सख्ती के बाद एक तरह से महंगाई को बढावा देने वाला बनता जा रहा है। इन दिनो दैनिक उपयोग की सभी चीजों की कीमतों में खासा वृद्घि नजर आ रही है। वही पर व्यवसाय से जुड़े हुए लोगों का कहना है कि मामला चाहे किराने का हो फल हो या सब्जी हो सभी के दामों में इजाफा हुआ है, जिसके चलते लोगों को पहले की तुलना में डेढ़ गुना से दोगुना तक कीमत देनी पड़ रही है। सब्जी व्यवसाय से जुड़े हुए लोगों को कहना है कि लोकल सब्जी की आवक ही हो रही है। बाहर से सब्जी की आवक बंद है। किराना दुकान से जुड़े हुए थोक दुकानों के बंद होने केचलते किराना विक्रेताओं ने दाम बढ़ा दिए हैं।

कुछ इसी तरह के हालात अनाज व्यापार से जुड़े हुए लोगों का कहना है कि पर्याप्त माल की आवक नहीं होने तथा बाजार में बराबर डिमांड होने के चलते दामों में इजाफा किया गया है। हालांकि स्पष्ट रूप से कोई भी यह बताने को तैयार नहीं है कि आखिर दामों में हुई वृद्घि के लिए जिम्मेदार कौन है।

इन सबके अलावा लगातार लाकडाउन के बने हालात का कुछ लोग नाजायज फायदा भी उठा रहे हैं। हालांकि प्रशासनिक सख्ती भी देखी जा रही है तथा इन पर समुचित कार्रवाई लगातार की भी जा रही है, किंतु इन सबके बाद भी शहरी क्षेत्रों तथा ग्रामीण अंचलों में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो पिछले दरवाजे से अपने व्यवसाय को बखूबी अंजाम देकर महंगाई बढ़ाने में कोई कसर बाकी नहीं रखे हैं।

बहरहाल इन तमाम हालात से समाज के मध्यम वर्ग पिस रहे हैं, जिन्हें अपने दैनिक उपयोग की चीजों के लिए पहले की तुलना में डेढ़ गुना से दोगुना तक रकम खर्च करनी पड़ रही है। एक ओर लाकडाउन केबने हालात केआमदनी केरास्ते तो बंद हो गए हैं पर खर्च डेढ़ गुना से दोगुना बढ़ रहे हैं। इसके चलते मध्यम वर्गीय परिवार कराह रहा है किंतु आखिर मध्यम वर्गीय परिवार की सुने तो सुने कौन।

आसमान छूने रहे फलों के दाम

फलों के दाम भी आसमान छू रहे हैं। सेब 200 रुपये प्रति किलो, संतरा 140 रुपये प्रति किलो, अंगूर 120 रुपये प्रति किलो, केला 50 से 60 रुपये दर्जन बिक रहा है। जबकि लाकडाउन से पूर्व सेब 100 से लेकर 140 रुपये, संतरा 50 से 60 व अंगूर की कीमत 80 रुपये थी। महंगाई केइस दौर में फल खरीदने के लिए लोगों की जेब पहले की अपेक्षा ज्यादा ढीली हो रही है। व्यापारियों के मुताबिक लाकडाउन व अन्य राज्यों की सीमाएं सील होने से फलों की पर्याप्त आवक नहीं हो पा रही है। इस वजह से दाम बढ़ गए हैं। ठेले वालों को ही ज्यादा कीमत पर खरीदनी पड़ रही है। हालांकि कई ठेले वाले भी ज्यादा दाम बढ़ाकर फल बेच रहे हैं। लाकडाउन के कारण फलों का स्टाक भी नहीं है।

फिर बढ़ी महंगाई व कालाबाजारी

मध्यमवर्गीय व गरीब परिवारों को फलों के दाम सुनकर ही झटका लग रहा है। वहीं दूसरी ओर त्योहारी सीजन होने की वजह से कई लोग फलों पर ही निर्भर रहते हैं। पिछले वर्ष के लाकडाउन में फल-सब्जी बेचने की अनुमति थी, जिससे फलों की कीमत काफी कम थी। वहीं इस बार सख्त लाकडाउन में कीमतें ज्यादा हैं। लाकडाउन ने महंगाई को दोगुना कर दिया है। एक बार फिर महंगाई व कालाबाजारी बढ़ गई है। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार पर पड़ रहा है।

ठेले में घूम-घूम कर फल की बिक्री

नियम और शर्तों में कुछ छूट मिलने के बाद ठेले में घूम-घूम कर फल बेच रहे हैं। फल व्यवसायियों द्वारा लाकडाउन के कारण घरों व कालोनियों में जाकर फल का रेट बढ़ाकर बेचा जा रहा है। उनका कहना है कि थोक मंडी में ही हमें ऊंचे दाम में फल खरीदना पड़ रहा है

as

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours