तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
सन्त रहीम दास ने सदियों पहले पानी का महत्व बताते हुए कहा था रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून, पानी गये ना ऊबरे, मोती मानुष चून। आज इस युग में इनकी कही हुए बातो उतनी ही प्रासंगिक नजर आती है। बीते लगभग एक माह से मानसून दस्तक दे चुका है, लेकिन आज भी तेज धूप तथा उमस भरी गर्मी से लोग काफी परेशान है। हालांकि बीते सप्ताह कुछ घंटों की बारिश से लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन इतना पर्याप्त नहीं है।
भले ही बारिश का मौसम लग चुका है, लेकिन मौसम के फेरबदल के चलते कभी बारिश तो कभी उमस भरी गर्मी या फिर कभी तेज धूप से लोगों के स्वास्थ्य में काफी विपरीत असर पड़ रहा है, इसके चलते लोग हास्पिटल तथा मेडिकल दुकानों के चक्कर काट रहे हैं। इन दिनों लोग मौसम के बदलाव के चलते तथा तेज धूप से बचते नजर आ रहे हैं। जिले में अल्प व खंड वर्षा के कारण अकाल की काली छाया मंडराने लगी है। तेज धूप व उमस से लोगों का हाल बेहाल होने लगा है। रोजाना तेज धूप व उमस से लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
उल्लेखनीय है कि जिले में लगभग 90 प्रतिशत धान बोने का कार्य पूर्ण हो गया है, अंकुरित धान के पौधों को पानी की आवश्यकता है, परंतु जिले में अल्प वर्षा के साथ ही तेज धूप के कारण जमीन की नमी सूखने से खेतों में दरारें आने लगी है। बारिश नहीं होने से अंकुरित धान पौधे नष्ट होने पर किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। रोपाई के लिए किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
फसल परिवर्तन पर किसानों को मिलेगा अनुदान
उल्लेखनीय है कि अल्प खंड वर्षा के मद्देनजर प्रदेश सरकार द्वारा फसल परिवर्तन की अपील किसानों से की गई है। जिसमें कम वर्षा में भी तैयार होने वाले कोदो, कुटकी, ज्वार, मक्का के अलावा फलदार वृक्ष लगाने की सलाह दी जा रही है। फसल परिवर्तन किए जाने पर किसानों को राज्य सरकार से प्रति वर्ष दस हजार अनुदान प्रदान किया जाएगा।
खेतो में पडने लगी दरारे
बरसात की लंबी खींच के कारण खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं। लगभग एक माह से पानी नहीं गिरने के कारण फसलों की स्थिति खराब हो रही है। पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है। भीषण गर्मी के चलते खेतों की नमी सूखने लगी है व खेतों में दरारें पड़ने लगी है। इस समय पूरे क्षेत्र में धान रोपाई का काम चल रहा है, परंतु पानी के अभाव में फसल सूखने के कगार पर पहुंचने लगी है। बारिश के अभाव में फसल व किसान का ही नहीं आमजन का भी जीना दुश्वार हो गया है। बारिश नहीं होने के कारण उमस भरी गर्मी से लोगों का हाल बेहाल हैं। पंखे व कूलर के सामने बैठने के बाद भी लोगों के पसीने की धार बह रही है।
बादल आते हैं पर बरसते नही
इस समय सभी बड़ी बेसब्री से बारिश का इंतजार कर रहे हैं। हर दिन आसमान में बादल गहरा जरूर रहे हैं, परंतु बरस नहीं रहे हैं। उल्लेखनीय है कि एक माह पूर्व जब आवश्यकता नहीं थी तब यहां पर प्रतिदिन झमाझम बारिश हो रही थी। अब जब पानी की जरूरत है तो एक बूंद बरसने को तैयार नहीं है। किसानों ने धान तो लगा दी है परंतु पानी के अभाव में धान सूखने की कगार पर पहुंच गई है। बिना पानी के धान का कोई अस्तित्व ही नहीं है धान को तो सिर्फ पानी की ही आवश्यकता होती है। यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो किसान अपनी आंखों के सामने अपनी फसल बर्बाद होते देख रहे हैं। कई किसानों ने जैसे तैसे धान लगा दी है तो वह पानी का इंतजार कर रहे हैं व कई किसान आधी धान लगाकर अब पानी गिरने का इंतजार कर रहे हैं। कुल मिलाकर बारिश नहीं होने के कारण किसान पूरी तरह से परेशान हो गया है। अगर ऐसे ही हालात बने रहे व बारिश नहीं हुई तो धान की फसल पानी के अभाव में पूर्ण रूप से चौपट हो जाएगी।
प्रबल हो रही अकाल की आषंका
क्षेत्र में अल्प वर्षा के कारण अकाल की आशंका बनती नजर आ रही है। खेतों में दरार दिखने लगी है। जिससे किसानों के चहरों पर मायूसी दिखाई देने लगी है। इस क्षेत्र में सिंचाई का साधन नहीं है जिसके कारण किसान एक ही फसल ले पाते हैं। क्षेत्र में सिंचाई सुविधा का अभाव होने से जिस समय कम बारिश होती है उस वर्ष निश्चित ही अकाल पड़ने की आशंका बनी रहती है। इस वर्ष भी अभी तक औसतन 30 फीसदी से कम बारिश हुई है इस वर्ष शुरू में अच्छी बारिश होने से किसानों को लगा कि फसल अच्छी हो जाएगी। जिसकी तैयारी शुरू से ही करते हुए अच्छी किस्म की बीज व खाद खरीद के रख लिए थे।
नदी-नाले और तालाब में पानी कम
अच्छी बारिश नहीं होने से नदी नाले व तालाब में भी पानी नहीं भरा है। जिसके कारण आने वाले समय में पेयजल व निस्तारी की समस्या निर्मित हो जाएगी। इस वर्ष क्षेत्र की जनता, मजदूर व किसान महंगाई से त्रस्त है। अब अकाल पढ़ने की आशंका से परेशान व चिंतित दिख रहे हैं। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि सिंचाई सुविधाएं यदि पूरा रहती तो आज क्षेत्र में कम बारिश होने पर अकाल की आशंका नहीं रहती।
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