जानकारी न देने वाले अफसर पर राज्य सूचना आयोग ने लगाया 25 हजार का जुर्माना

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जुर्माना राशि अफसर के वेतन से वसूल करने सीएमओ को दिए निर्देश।

तहकीकात न्यूज  @ अयुब अंसारी . चिरमिरी
चिरमिरी। सूचना का अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी न देना नगर पालिका बैकुंठपुर के तत्कालीन जन सूचना अधिकारी को महंगा पड़ गया। दरअसल आरटीआई के तहत लगे एक आवेदन में आरटीआई कार्यकर्ता को जानकारी ना देने के कारण राज्य सूचना आयुक्त एके अग्रवाल ने इंजीनियर शुभेन्दू कुमार श्रीवास्तव पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। वही जुर्माने की राशि जन सूचना अधिकारी के वेतन से वसूल करने के लिए सीएमओ बैकुंठपुर को निर्देशित किया है।

गौरतलब है कि, सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जन सूचना का जवाब न देने और राज्य सूचना आयुक्त के समक्ष नाेटिस का समुचित जवाब नहीं देने पर नगर पालिका परिषद बैकुंठपुर के जनसूचना अधिकारी व उप अभियंता पर 25 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया है। साथ ही राज्य सूचना आयुक्त एके अग्रवाल ने नपा सीएमओ को जुर्माना वसूली वेतन से करने का निर्देश दिया है। चिरमिरी हल्दीबाड़ी के आरटीआई कार्यकर्ता राजकुमार मिश्रा ने 4 सितंबर 2017 काे जन सूचना अधिकारी कार्यालय नगर पालिका परिषद से सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत वर्ष 2013 में नगर पालिका बैकुंठपुर से अपर कलेक्टर कोरिया को जारी समस्त नंबर अथवा क्यू क्रमांक वाले पत्रों की जानकारी मांगी थी। 30 दिन बाद भी जानकारी नहीं मिलने पर 28 अक्टूबर 2017 को प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष प्रथम अपील आवेदन पेश किया था अपील अधिकारी के द्वारा भी समुचित जानकारी ना मिलने से व्यथित होकर 18 जून 2018 को राज्य सूचना आयोग के समक्ष द्वितीय अपील प्रस्तुत किया गया था। जिसपर आयोग ने तत्कालीन जनसूचना अधिकारी व उप अभियंता शुभेंदू कुमार श्रीवास्तव को दोषी पाया तथा 4 सितंबर 2017 की स्थिति में जानकारी नहीं देने पर 250 रुपए प्रतिदिन के मान से 25 हजार रूपए का अर्थदण्ड लगाया है।

साथ ही मुख्य सूचना आयोग ने सीएमओ नगर पालिका बैकुंठपुर को निर्देशित किया है कि अर्थदंड की वसूली जनसूचना अधिकारी के वेतन से कर शासन कोष में जमा करवाए साथ ही भविष्य में समयावधि में जानकारी देने के लिए सचेत किया है। जिसके पश्चात आरटीआई कार्यकर्ता राजकुमार मिश्रा ने नपा सीएमओ को पत्र लिखकर दंड सेवा अभिलेख में शामिल करने के साथ आयाेग के निर्देश का अनुपालन करते हुए जनसूचना अधिकारी पर कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। कार्रवाई से पहले आयोग की तरफ से जन सूचना अधिकारी को पर्याप्त समय देते हुए नोटिस जारी किया गया था। आयोग ने माना कि प्रतिवादी जन सूचना अधिकारी प्रस्तुत प्रकरण को लेकर गंभीर नहीं है। ऐसे में जनसूचना अधिकारी को दोषी मानते हुए उसके विरुद्ध सूचना अधिकार की धारा 20(1) के तहत 25 हजार रुपए जुर्माना लगाया है।

चार साल बाद भी जानकारी नहीं देने पर राज सूचना आयोग ने ठहराया दोषी :-

नगर पालिका परिषद बैकुंठपुर के कार्यालय में 7 सितंबर 2017 को आरटीआई के तहत आवेदन कर जानकारी मांगने के बावजूद भी वर्ष 2021 तक आवेदक को जानकारी नहीं दी गई। जिस पर राज सूचना आयोग ने अपने निर्णय में कहा कि, 30 दिन के समय अवधि के भीतर निराकरण किया और ना ही आयोग द्वारा जारी आर्डर शीट दिनांक 03.12.2019 की कंडिका 6/2/ के तहत जारी कारण बताओ सूचना पत्र का समुचित जवाब दिया। इससे यह स्पष्ट है कि तत्कालीन जन सूचना अधिकारी द्वारा अधिनियम में प्रावधानित समुचित निराकरण नहीं किया गया है और इसके लिए शुभेंदु कुमार श्रीवास्तव दोषी पाए जाते हैं।

जुर्माने की टिप सेवा बुक में होगी अंकित :-

आरटीआई कार्यकर्ता राजकुमार मिश्रा बताते हैं कि, नगर पालिका परिषद के तत्कालीन जन सूचना अधिकारी तथा इंजीनियर शुभेंदु कुमार श्रीवास्तव पर राज्य सूचना आयोग द्वारा 25 हजार रुपए जुर्माना लगाया गया है। वही जुर्माने की टिप उनके सेवा बुक में भी अंकित की जाएगी। ऐसे जन सूचना अधिकारी जो सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के नियमों को पालन करने से नकारते हैं। उनके लिए माननीय राज सूचना आयोग का यह निर्णय आरटीआई आवेदन के प्रति जिम्मेदारी ना निभाने पर कड़ी कार्यवाही का एक उदाहरण है।

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