पैसा दो….बसों से गांजा भेजो या बारूद…….पहुॅचा देंगे ठिकाने तक…….ताक पर है लोगो की सुरक्षा…..बडी घटना की प्रतिक्षा……कडाई से वाहनो की जॉच जरुरी

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बैकुंठपुर।

प्राईवेट बसो के हाल अब ये हो चले हैं कि यात्री बसों में गांजा भेजो या गैर कानूनी सामान, ड्राइवर कंडक्टर को इससे कोई मतलब नहीं है। उनका मतलब सामान परिवहन करने के बदले मिलने वाले पैसों से है। पैसो दो और कुछ भी सामान लोड कर दो, गंतव्य तक यह सामान आसानी से पहुंच जाता है।

विगत दो दिनो में सूरजपुर में गांजे की बडी खेप पकडाने के बाद बरबसपुर में भी गांजे की बडी खेप नागपुर पुलिस ने पकडा। कार एवं इसके बाद भी यात्री बसों में सामान भेजने का खेल चल रहा है। परिवहन और बस संचालक को इस बात की जानकारी है, लेकिन कंडक्टर और ड्राइवरों पर ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।

बताया जाता है कि कोरिया जिले में इस तरह का ही खेप आ रहा है। पूर्व में कई बार गांजा की खेप बस के माध्यम से कई बार ला चुका है। केस की जांच के दौरान अफसरों को पता चला कि बसों के माध्यम से कई बार तस्कर बिना शख्स के गांजा की खेप बस से पहुंचाते है और फिर आदतन अपराधियों द्वारा सप्लाई किया जाता है।

बताया जाता है कि यात्री बसों में बिना बुकिंग व बिना जांच कराए कंडक्टर को 100 से 200 रुपए देकर कोई भी लगेज बिना जांच के कहीं भी भेजा जा सकता है, फिर चाहे वो गांजा हो या बारूद। बैकुंठपुर, चरचा व पटना पुलिस द्धारा पहले भी कई बार इस तरह कार्यवाई में बनारस, बिहार पटना व मध्य प्रदेश से आने वाली बसो से बरामद किया है।

बताया जाता है कि बस ड्राइवर और कंडेक्टर की मनमानी का हाल यह है कि बस सामान बस में रखा दो और ड्राइवर-कंडक्टर को पैसा देकर उसकी सूचना दे दो। सुरक्षा के लिए ड्राइवर-कंडेक्टर का नंबर ले लो और बस की फोटो खीचकर पार्सल रिसीव करने वाले शख्स को पूरी जानकारी दे दो। पार्सल भेजने वाले शख्स से पैेसे मिलते ही ड्राइवर-कंडक्टर अपना नंबर देते है और बस संबंधित ठिकाने में पहुंचने का समय बताते हुए पार्सल रीसिवर द्वारा शेष पैसा देने पर पार्सल देने की बात कहते है।

यात्री बसों को जांचने की जिम्मेदारी परिवहन विभाग की है। नियमानुसार परिवहन विभाग की फ्लाइंग टीम को सरप्राइज चेंकिग करके यात्री और उसमें ढोए जा रहे सामान की जांच करनी है और नियम विरूद्ध बसों का परिचालन होने पर ड्राइवर, कंडेक्टर और संचालक पर कार्रवाई करनी है।

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