Baikunthpur @ Tahkikat News
कोरिया कलेक्टर के एक्शन के बाद अब कोरिया जिले के आम लोगो को जिले के पुलिस कप्तान से भी शहर में गलत कारोबार पर अकूंश लगाने की मांग की जा रही है। एैसा इसलिए है कि कोरिया जिले के नये पुलिस अक्षिधक संतोष सिंह की छवी अपराध को खत्म करने वाली रही है। यही कारण है कि शहर के लोग अपने पुलिस कप्तान से उम्मीद लगाये बैठी है इसके कुछ गलत नही है। शहर में प्रतिबंधित नशीली दवाओं का कारोबार बड़े स्तर पर चल रहा है। दवा दुकानो पर कार्यवाई के साथ साथ कोरिया जिला प्रशासन को इस ओर भी ध्यान देने की जरुरत है। ताकी अर्तंराज्यी अपराध पर नकेल कसी जा सके। बीते एक सालो में कई मेडिकल स्टोर संचालक इस अवैध कारोबार में पकड़े गए थे। इसमें ओडगीनाका में चल रहे मेडिकल स्टोर शामिल रहे है। यहा के मेडिकल स्टोर पर कई बार प्रतिबंधित नशीली दवा बिक्री करते हुए पाया जाने के बाद कार्यवाई की गई थी। यहां से भी प्रतिबंधित दवाओं का अवैध कारोबार चल रहा था। इसके बाद भी अवैध कारोबार पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। सूत्र बता रहे हैं कि शहर में चल रहे प्रतिबंधित दवाओं के कारोबार के तार पडोसी राज्यो में यूपी के वाराणसी और झारखण्ड के गढवा सहित देश के अन्य बड़े शहरों से जुड़े हैं। मोटी कमाई करने के लिए मेडिकल संचालक नियमों के दरकिनार कर जिंदगियों से खेल रहे हैं।
पडोसी राज्यो से जुड़े हैं नशे के तार
कोरिया जिले में नशीली दवा का अवैध कारोबार से जुड़े कुछ मेडिकल स्टोर्स संचालकों का संपर्क पडोसी राज्य यूपी और झारखण्ड के वाराणसी और गढवा जैसे बड़ों शहरों के दवा कारोबारियों से है, जहां से प्रतिबंधित व नशीली दवाइयां खरीद कर जिले के युवाओ का भविश्य बर्बाद कर रहे हैं। एैसे मामलो में कभी बैकुन्ठपुर से चिरमिरी जा रही सीटी बस में बैकुन्ठपुर के महलपारा में बस से नशीली दवा कोतवाली पुलिस ने पकडा था। जिसके अपराध में बस के डायवर पर केस चल रहा है । वही पर चरचा पुलिस ने गत वर्ष बनारस से चिरमिरी आ रही साई बस के डिक्की से बडी मात्रा में नशीली दवार्दयो का जखीरा पाया था। जिसके बाद मामले को ले देकर निपटा भी दिया गया था। तो चरचा पुलिस में पदस्त पुलिसकर्मी को ओमनी समेत ऐसे ही करोबार को करने के अपराध में सरगुजा पुलिस ने दबोचा था तो गढवा से सीरप ला रहे बैकुन्ठपुर के मझगवॉ निवासी को बलरामपुर पुलिस ने पकडा था। शहर के डबरीपारा से नशीले पदार्थे के कारोबार के तार कई बार जुडे पाये ये है। इसलिए यदि कोरिया एसपी इस मोहल्ले को अपनी निगरानी रख ले तो शहर के बहुत से अपराध पर अकुंश लगाई जा सकती है।
बैगर पर्ची के बेची जाती है दवाईया
प्रतिबंधित दवाएं दोगुने से ज्यादा दामों पर बेच रहे हैं। मनोरोग, अनिद्रा और तनाव कम करने की यह प्रतिबंधित दवाएं मेडिकल स्टोर संचालक बगैर डॉ. की पर्ची के बेच रहे हैं, इन्हीं दवाओं का उपयोग बड़ी संख्या में नशेड़ी और अपराधी भी कर रहे हैं।
शहर में ये है हकीकत
पुरानी पर्ची पर मिल रही हैं नशे, नींद की दवाएं।
डॉक्टर द्वारा लिखी गई पर्ची की फोटोकॉपी को भी मान्य कर रहे हैं।
20 से 40 रुपए की दवाएं 100 से 150 रुपए में बगैर पर्ची बिक रही हैं।
दवाएं बेचने ये जरूरी
मरीज के पास डॉक्टर का लिखा ओरिजनल पर्ची होना चाहिए।
दवा खरीदने के बाद पर्ची की कॉपी मेडिकल स्टोर पर ही जमा करना होती है।
मेडिकल स्टोर संचालक उतनी ही दवाई दे सकता है, जितने दिन की डॉक्टर ने लिखी है।
100 रुपए की टैबलेट 200 से 300रु में
बगैर डॉक्टर पर्ची के प्रतिबंधित दवाएं लोगों को आसानी से मिल रही हैं। सूत्र बता रहे कि कुछ पान ठेले वाले भी नशीले पदार्थ बेच रहे हैं। शहर ही नहीं आउटर के मेडिकल स्टोर में भी बिना पर्ची के दवाएं बेच रहे हैं। 50 से 100 रुपए के टेबलेट को 300 रुपए में बेचा जा रहा है।
सबसे ज्यादा है इन नशीली दवाएं की डिमांड
नींद के लिए दी जाने वाली अल्प्राजोलैम टैबलेट का सबसे ज्यादा अवैध कारोबार हो रहा है। क्लोनाजेपैम व अल्प्राजोलैम (नींद के लिए), कोडीन (खांसी का सिरप), एसिटालोप्रैम (डिप्रेशन, सुसाइडल थॉट के इलाज), एटीजोलैम (नींद व चिंता संबंधी) की भी मांग है।
उत्तेजना बढ़ा देती हैं नशीली दवाएं
जिला स्वास्थ्य सलाहकार डॉ. प्रिंस जायसवाल ने बताया कि नशीली दवाओं को सीधे तौर पर खाने से शरीर में रक्त के प्रवाह को कम कर देती हैं। डॉक्टर की सलाह के बिना ऐसी दवाएं लेनेे पर चक्कर, घबराहट, बोलने में दिक्कत आदि होती है। ज्यादा नशीली दवा खाने से पागल भी हो जाते है।
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