Baikunthpur @ Tahkikat News
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर से महालय श्राद्धपक्ष की शुरुआत हुई। बताया जा रहा है कि इस बार श्राद्ध पक्ष पूरे सोलह दिन का रहेगा। विशेष यह है कि पक्षकाल में विशिष्ट योग व ग्रह नक्षत्रों की प्रबल स्थिति पितरों के निमित्त किए गए श्राद्ध व दान पुण्य का पूर्ण शुभफल प्रदान करेगी। धर्मशास्त्र के जानकारों के अनुसार श्राद्ध पक्ष में पितरों के निमित्त तर्पण व पिंडदान तीर्थ पर आकर करना चाहिए। पितृकर्म के लिए श्राद्धकर्ता की मौजूदगी आवश्यक है, तभी इसका पूर्णफल प्राप्त होता है। सहित अन्य घाटों पर लोग अपने पूर्वजों का आव्हान करने पहुंचेंगे। उसके बाद प्रतिदिन तर्पण किया जाएगा।
ब्ताया जा रहा है कि इस बार 16 दिन के श्राद्ध पक्ष में पांच सर्वार्थसिद्धि योग बन रहा है। जो कई सालों में बना है। जिसमें एक अमृत गुरु पुष्य योग तथा गजछाया योग का महासंयोग रहेगा। इस दुर्लभ पक्षकाल में पितरों के निमित्त श्राद्ध करने से पितृ प्रसन्न होकर सुख,शांति व वंशवृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
श्रद्धा व्यक्त करने का पर्व है श्राद्ध पक्ष
पितृ पक्ष में माता-पिता के प्रति तर्पण करके श्रद्धा व्यक्त की जाती है। मान्यता है कि बिना पितृ ऋण से मुक्त हुए जीवन को निरर्थक माना जाता है। इस बार पितृ पछ पर 21 को प्रतिपदा, 22 को द्वितीया, 23 को तृतीया, 24 को चतुर्थी, 25 को पंचमी, 26 को षष्ठी, 27 को सप्तमी, 28 को कोई श्राद्ध नहीं होगा। 29 को अष्टमी, 30 को मातृ नवमी, एक अक्तूबर को दशमी, दो को एकादशी, तीन को द्वादशी, चार को त्रयोदशी, पांच को चतुर्दशी और छह अक्तूबर को अमावस्या श्राद्ध के साथ पितृ विसर्जन होगा।
इसलिए लगता है पितृदोष
परिवार में किसी की अकाल मृत्यु, अपने माता-पिता आदि सम्मानीय जनों के अपमान, मरने के बाद माता-पिता का उचित ढंग से क्रियाकर्म और श्राद्ध और उनके निमित्त वार्षिक श्राद्ध आदि न करने से पितृ दोष लगता है। श्राद्ध के 10 प्रकारों में से एक प्रकार को महालय कहा जाता है। पितृ दोष से मुक्ति के लिए हर सनातनी को वर्ष भर में पितरों की मृत्यु तिथि पर जल, तिल, जौ, कुश, पुष्प आदि से उनका श्राद्ध करना चाहिए। गो-ग्रास देकर एक, तीन, पांच ब्राह्मणों को भोजन कराने से पितृगण संतुष्ट होते हैं।
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