Baikunthpur @ Tahkikat News
छइ पर आज शाम पहली अर्घ्य दे आस्थावान लोग अनी सुख समृद्धि और सौभाग्य का आर्षिवाद मागेंगे। इसके लिए बैकुन्ठपुर और चरचा के विभिन्न घाटो में अतिंम तैयारी कर ली गई है। बुद्धवार की शाम लोग अपने आराध्य से आर्षिवाद से कामना के लिए भक्ति भाव से परिपूर्ण होकर घाटो पर अर्ध्य देने पहुॅचेगें। उगते सूर्य को अर्घ्य देने की रीति तो कई व्रतों और त्योहारों में है लेकिन डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा आमतौर पर केवल छठ व्रत में है। मान्यता है कि सुबह के वक्त सूर्य की आराधना से सेहत बेहतर होती है दोपहर में सूर्य की आराधना से नाम और यश बढ़ता है शाम के समय सूर्य की आराधना से जीवन में संपन्नता आती है।
मान्यता है कि हिंदुओं के ज्यादातर त्योहार में आमतौर पर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है लेकिन छठ में ही डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। धर्म के जानकारो की माने तो पुराणों में सप्तमी तिथि का स्वामी सूर्य को माना गया है इसलिए सप्तमी तिथि को सूर्य देव को अर्घ्य देने के साथ ही छठ व्रत पूर्ण होता है। इस व्रत का आरंभ षष्ठी तिथि को होता है जिसमे भगवान ब्रह्मा की मानस पुत्री और सूर्य देव की बहन षष्ठी मैय्या की पूजा होती है इसलिए इसे छठ व्रत के नाम से जाना जाता है।
इसलिए देते हैं डूबते सूर्य को अर्घ्य
धर्म के जानकारो के अनुसार, सूर्य को सुबह के वक्त अर्घ्य देने से स्वास्थ्य सही रहता है और दोपहर में नाम और यश बढ़ता है। वहीं शाम के समय अर्घ्य देने से जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं रहती है। माना जाता है कि भगवान सूर्य शाम के वक्त अपनी दूसरी पत्नी प्रत्युषा के साथ रहते हैं और प्रसन्न भाव में रहते हैं जिससे इस समय व्रत रखकर अर्घ्य देने से सुख-सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
सूर्य को अर्घ्य देने के लाभ
माना जाता है कि शाम के वक्त सूर्य को अर्घ्य देने से कानूनी मामले और मुकदमे में फंसे लोगों को फायदा होता है। साथ में जो छात्र बार-बार परिक्षा में असफल रहता है और जिन्हें पेट की समस्या लगातार बनी रहती है, उन्हें शाम के समय सूर्य को अर्घ्य जरूर देना चाहिए। सूर्यदेव को अर्घ्य देने से जीवन में सामाजिक, मानसिक और आर्थिक सभी प्रकार की समस्याओं से मुक्ति मिलती है।
इस तरह दिया जाता है अर्घ्य
सूर्य को अर्घ्य देते समय कुछ सावधानी बरतनी चाहिए, अगर आप विधिवत रूप से यह तरीके अपनाते हैं तो आपको भगवान संपन्नता का आशीर्वाद देते हैं। मान्यताओं के अनुसार, सबसे पहले आप एक बांस के सूप में केला सहित पांच प्रकार के फल रखें और उसमें प्रसाद एवं गन्ने को रखें। इसके बाद पीले रंग के नए कपड़े से सभी फलों को ढक दें। दीप जलाकर दोनों हाथों से सूप को पकड़ें और तीन बार डूबकी मारकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दें।
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