बौद्धिक विकलांग बच्चों के साथ डॉक्टर एकता लंगेह ने गुजारे खुशनुमा पल
ईश्वर की द्धारा दी गई जीवन में सबसे अमुल्य और किमती है यह कहना है कोरिया कलेक्टर की पत्नी और सामाजिक कार्यो में बेहद बढ चढकर सहभागिता निभाने वाली और सौम्य हद्धय की डॉ. एकता लंगेह बैकुठंपुर के शासकीय बौद्धिक मन्दता वाले बालकों विघालय पहुॅच जिस मातृत्व भाव को प्रकअ किया उससे वहा के बच्चे गदगद हो गये। उन्होने कहा कि अच्छा स्वास्थ्य व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाता है। हालाँकि, बौद्धिक रूप से अक्षम लोगों में सामान्य आबादी की तुलना में अधिक स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। मामले को और अधिक जटिल बनाने वाली बात यह है कि अधिक गंभीर विकलांगता वाले लोग अक्सर अपने स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं को शब्दों में नहीं बता सकते हैं, जिसके कारण स्वास्थ्य समस्याओं का निदान नहीं हो पाता है और उनका इलाज नहीं किया जाता है। यह प्रशंसनीय है कि ये स्थितियां बौद्धिक विकलांगता वाले लोगों में स्वास्थ्य समस्याओं की बढ़ती घटनाओं के कारण समस्या व्यवहार को बनाए रखने के लिए सुदृढीकरण आकस्मिकताओं के साथ बातचीत कर सकती हैं। यह पेपर समस्या व्यवहार और सुदृढीकरण प्रक्रियाओं को प्रभावित करने वाली सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं की समीक्षा करता है। उक्त बातें डॉ. एकता लंगेह ने जिला मुख्यालय में बौद्धिक मानसिक दिव्यांग बच्चों मिलने के बाद उपस्थित लोगों से कहीं। इस दौरान उन्होने दिव्यांग बच्चों के साथ समय भी गुजारा।

आर्थिक रूप से कमजोर शारीरिक व मानसिक दिवयांग बच्चों के बीच समय बीताकर उनकी सुख सुविधाओं के लिए प्रयास करने के लिए डॉ. एकता लंगेह को जाना जाता रहा है। इसके अलावे भी सामाजिक सरोकारिता के कार्यों मंे डा. लंगेह क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बना रही हैं। इसी कडी मे उन्होने जिला मुख्यालय स्थित शासकीय बौद्धिक मन्दता वाले बालकों के लिए बने विशेष विद्यालय में पहुंचकर बच्चों का हाल-चाल जाना।
निरीक्षण के बाद दिवयांग बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए फिजियोथैरेपिस्ट की ड्यूटी लगाने के साथ ही बच्चों को चाकलेट और जूस का वितरण भी किया गया। इस दौरान डा लंगेह ने बच्चों के रहने वाले कमरों का भी निरीक्षण किया। इस बीच सांस्कृतिक आयोजन के माध्मम से बच्चों का मनोरंजन भी किया गया । जिसमें बच्चों ने एक से बढकर एक कविताओं की प्रस्तुति दी। फिजियोथैरेपिस्ट सप्ताह में दो दिन उप्स्थिति देंगे।

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