अनुमति नही होने के बावजूद शर्मा अस्ताल ने किया था ईलाज….हुई थी मरिज की मौत
पहली जॉच में अस्पताल पर 302 की अपराध दर्ज कराने की गई थी अनुशंसा
कोरिया कलेक्टर के पत्र के अनुपालन में लगभग 4 महीने बाद जिले के स्वास्थ्य विभाग को बैकुंठपुर के निजी शर्मा अस्पताल में वर्ष 2021 में हुई मौत के संबंध में जांच दल गठित करना ही पड़ा । बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य महकमें के आला अधिकारी जांच के आदेश को लटकाने चाहते थे इस कारण कलेक्टर के आदेश के उपरांत भी आज तक जांच दल गठित नहीं किया गया था । वहीं पर खबर प्रकाशित होने के उपरांत स्वास्थ्य विभाग में हलचल शुरू हुई । और अतंत जाच दल का गठन जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ आर एस सेंगर को करना पडा। इस सबंध में जानकारी देते हुए उन्होने बताया कि शमा्र अस्पताल महपारा बैकुंठपुर के लिए चार सदस्यी जांच दल का गठन किया है हालांकि उन्होंने जांच दल के सदस्यों का नाम नहीं बताया किंतु उनका कहना था कि जांच दल में दो डॉक्टर और दो अन्य स्वास्थ्य महकमे के कर्मचारी रहेंगे । अब देखना होगा कि जो जांच दल बनाया गया है वह मामले में लीपापोती करता है या निष्पक्ष जांच करके आगे कार्रवाई को सौंपता है। क्योंकि पूर्व में भी इस मामले की जिले के अपर कलेक्टर के नेतृत्व में पांच सदस्यी टीम बनाकर अस्पताल की गहनता से जांच किया गया था। जिसके बाद जाच दल के द्धारा शर्मा अस्पताल पर आपीसी की धारा 302 के तहत अपराध दर्ज करने का की अनुशंसा की गई थी । वहीं पर कोरिया कलेक्टर के द्वारा एक बार पुनः मामले की जांच के लिए 09 फरवरी 2024 को लिे के मुख्य चिकित्सा में स्वास्थ्य अधिकारी को आदेश किया गया । जिस पर काफी टालमटोल के बाद अंतत जांच दल का गठन करना ही पड़ा ।
क्या दिया था कलेक्टर ने आदेश
09 फरवी 2024 को कोरिया कलेक्टर ने पत्र लिखकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को जाच कर रिपोर्ट देने को कहा, मामले में जांच अधिकारी के द्वारा की गई कार्रवाई की अनुशंसा का अनुपालन नहीं हो होने पर कार्यालय कलेक्टर कोरिया ने सुनील तिवारी की शर्मा अस्पताल, महलपारा, बैकुंठपुर में दिनांक 09 मई 2021 को ईलाज के दौरान मौत के संबंध में जांच कर बताने को कहा गया है कि क्या मरीज की मृत्यु डॉक्टर या अस्पताल द्वारा की गई लापरवाही अथवा चूक से हुई है।
जाच दल को सुप्रिम कोर्ट के निर्देेशो का पालन जरुरी
सर्वाेच्च न्यायालय के द्वारा 05.08.2005 को जैकब मैथ्यू बनाम पंजाब राज्य एवं अन्य (2005) के आदेश के पालन में आरोपी डॉक्टर की ओर से जल्दबाजी या लापरवाही के आरोप का समर्थन करने के लिए किसी अन्य सक्षम डॉक्टर द्वारा विश्वसनीय राय लेने को कहा गया है। जिनके द्धारा यह तय किया जाना है कि जल्दबाजी, लापरवाही या चूक आरोपी डॉक्टर या अस्पताल के द्धारा किया गया है या नही। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि जॉच निष्पक्ष हो इस बात का ध्यान जॉचकर्ता डाक्टरो को भी रखना होगा।
बगैर अनुमति किया ईलाज, बेहद गंभीर
शर्मा अस्पताल पर स्वास्थ्य संस्थाओं के तहत उलंघन एवं एपीडेमिक डिजीज एक्ट-1897 व भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 186 तथा आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 का उलंघन के कारण सिविल सेवा आचरण अधिनियम 1965 के नियमों का उलंघन मानते हुए जाच दल ने थाना प्रभारी बैकुंठपुर को सूचित किया था कि संचालक शर्मा अस्पताल डॉ. राकेश कुमार शर्मा के द्वारा कोविड-19 के ईलाज हेतु अधिकृत न होने के बावजूद कोविड से संक्रमित मरिज का ईलाज किया गया। जिस कारण मरीज सुनील तिवारी की मृत्यु होना पाया गया।


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