सडक चौडीकरण के लिए पिछले वर्ष शहर में चलाया गया था हस्ताक्षर अभियान…………

अब एक बार फिर से बैकुंठपुर विधायक और पूर्वमंत्री भैयालाल राजवाडे ने जन मानस की परेशानियो के मददेनजर प्रदेश के वित्तमंत्री से बैकुंठपुर की सडक चौडीकरण के लिए बजट का प्रावधान करने को मिलकर अपनी मांग रखा है। अब आगे देखना है कि सडक चौडीकरण के लिए भाजपा की सरकार कितनी गंभीरता दिखाती है।

गौरतलब हो कि तीन दशको से कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर में सड़क चौड़ीकरण दिवास्वप्न की तरह ही रही है। इस दौरान कई बार चौडीकरण की कोशिशे की गई किन्तु भाजपा और कांग्रेस दोनो दलो की सरकारो के साथ अलग अलग समय पर दोनो ही दलो के स्थानिय विधायक भी सरकार से इसको पूरा नही करा पाये। यही कारण रही कि तीन दशको से सड़क चौड़ीकरण की मांग होती रही फिर भी कुछ मुठठी भर लोगो को संरक्षित करने के लिए दोेनो राजनितिक दलो ने हजारो लोगो की मांगो को दरकिनार करते रहे ।

हस्ताक्षर अभियान भी रहा था बेअसर

जनता के द्धारा, जनता के लिए चुनी सरकारो ने बीते वर्षो में जनता की आवाज को किस प्रकार से नकारने का कृत्य किया है वह आज तक बैकुंठपुर की जनता नही भूली है। बीते वर्षों से शहर के युवाओं के द्वारा लगातार हस्ताक्षर अभियान चलाकर जिला प्रशासन सहित सत्तारूढ़ दल के सभी शीर्ष नेताओं के समक्ष कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर की सड़क चौड़ीकरण की मांग रखी गई । जिस पर शहर वासियों को आश्वासन के अतिरिक्त आज तक कोई भी ठोस परिणाम नहीं मिला । हालांकि इस दौरान बैकुंठपुर से गुजरने वाली मुख्य सड़क जोकि खरवत से जमगहना तक जाती है जिस पर डामरीकरण करा कर छोउ दिया गया।

सडक किसका है कोई नही बोलता

वर्षो से पडे इस खस्ताहाल पड़े मुख्य सड़क पर गत वर्ष एनएच 43 के ठेका कंपनी के द्वारा सड़क जितनी थी उतनी ही चौड़ी बना दी गई। उसके बाद जिला प्रशासन की ओर से शहर में र्चचा का दौर चला कि पहले एनएच सडक का निर्माण करेगा फिर उसके बाद जिला प्रशासन की ओर से सडक चौडीकरण कराया जायेगा। शहर में फैली यह र्चचा सिर्फ अफवाह ही साबित हुई। दुर्भाग्य कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के बनने के 2 दशक बाद भी उहापोह की स्थिति बनी हुई है। अब तो पीडब्लूडी डिपाटमेंट भगवान भरोसे है विभाग के जिम्मेदार सिर्फ कमिश्न के चक्कर में लगे रहते हैं। जनता की परेशानी से उन्हे कोई लेना देना नही रह गया हैं।

एक कलेक्टर ने ठाना तो रातो रात हो गया तबादला

बैकुंठपुर की राजनिति कुछ इस कदर हावी रही है कि आज से लगभग चार वर्ष की पहले की बात है उस समय के तत्कालीन कलेक्टर भोस्कर विलास संदीपन ने बैकुंठपुर शहर में खरवत से लेकर जनगहना तक सड़क चौड़ीकरण का खांका खींच दिया था। इस दौरान उन्होंने सर्वे का कार्य भी पूरा करा लिया गया था किंतु इसी दौरान सत्तारूढ़ दल के नाराज जिम्मेदारों ने उनका तबादला रातो रात करा दिया। उसके बाद सड़क चौड़ीकरण जो ठंडे बस्ते में गई फिर किसी जिम्मेदार ने इसकी कोशिश ही नही की।

14 किलो मीटर सडक तीन दशक का इंतजार

बैकुंठपुर वासियो को बिहार के दशरथ मांझी से सबक लेकर सडक निमार्ण के लिए खुद मैदान में उतरना होगा तभी हमारी अगली पीढी सडक पर सुरक्षित चल सकेगी। गौरतलब हो कि बैकुंठपुर के खरवत शहर होते हुए जमगहना तक कुल 14 किलोमीटर की सड़क विगत 4 वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़ी हुई थी अब मरम्त हो गई है परन्तु शकरी सडक के कारण आज भी समस्या से निजात नही मिल पाया है।

जाम और अतिक्रमण बडी समस्या

शहर रोज जाम की समस्या से जूझ रहा है। जिससे लोग परेशान है। फिर भी यातायात की व्यवस्था सुदृढ़ नहीं हो सकी है। प्रशासन भी मौन साधे बैठा है। बैकुन्ठपुर में जाम की समस्या फैव्वारा चौक से लेकर ओडगीनाका तक लगातार बना रहता है। शहर में सड़क जाम की समस्या का सबसे बड़ा कारण सड़क पर दोनों तरफ अतिक्रमण कर लगने वाली दुकान है। इन दुकानों को सुबह के 9 बजे से ही सड़क के दोनों किनारे सजा दी जाती है। ऐसे में शहर की सड़कें संकीर्ण बन जाती है। शहर में वन वे ट्रैफिक नहीं है। जिसके कारण एक ही दिशा से वाहनों का आना व जान लगा रहता है। ऐसे में सड़क जाम की समस्या होना स्वभाविक है।

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