जिले में मानसून के बावजूद लोग बारिश को तरस रहे हैं मौसम विभाग के बारिश के तमाम दावे के बावजूद जिले में बारिश नही हो रही है। विगत दिनो से लगातार बादल छाए हुए हैं। यहां तक की अधिकतम तापमान भी 43 डिग्री से लुढ़क कर 33 डिग्री पर आ चुका है। इसके बावजूद गर्मी के तेवर कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। गर्मी के साथ-साथ उमस भी लोगों की परेशानी को बढ़ा रही है। उमस के कारण लोग छाया में भी पसीने से तरबतर हुए जा रहे हैं। राहत की बात यह है कि अब लू नहीं चल रही व धूप का असर भी पहले से कम है।
7 दिन के बाद भी मानसूनी बारिश का इंतजार
आमतौर पर देखा जाए तो जिले में मॉनसून 15 जून तक प्रवेश करता था, लेकिन इस बार मानसून के जिले में जल्द प्रवेश की बात भी गलत साबित हुई अब तो हालात यह हैं कि 25 जून तक छिटपुट बारिश को छोड दे तो अब तक मानसूनी बारिश देखने को नही मिला है। जबकि जिले में मानसून 18 जून को प्रवेश करने की बात कही गई थी। जिले में मानसून प्रभावी कब तक होगा कहना मुश्किल है। वैसे मौसम विभाग रोज पूर्वानुमान में बारिश होने की आशंका व्यक्त करने साथ साथ अर्लट भी जारी करता है। लेकिन नतिजा ढाक के तीन पात ही निकलता है। अब लोगो को विभाग का अनुमान बेमानी लगने लगा है।
सूखने लगी हैं सब्जियों के फसल
इस भीषण गर्मी, तीखी धूप की वजह से जिले में सब्जी की फसल भी सूखने लगी है। किसानों द्वारा अपने खेतों में झिंगी, नेनुआ, लौकी, करेला, तोरई, भिंडी, बैगन, अगला फूलगोभी आदि की फसल लगाई गई है पखवाडे भर पहले जहा खेतो में लगी फसलें जल रही थी। गत महिनो से भीषण गर्मी की वजह से जहां नदी, तालाब पूरी तरह सूख चुके हैं वही किसी प्रकार बोरिंग के माध्यम से किसान अपनी सब्जी की फसल को जिंदा रखने का प्रयास कर रहे हैं।
किसान की टकटकी आसमान पर
किसानों का कहना है कि मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार इस वर्ष झमाझम वर्षा की आस लगाई जा रही थी। इसे लेकर किसानों ने धान की नर्सरी डालने में तेजी बरती। नर्सरी तैयार हो गई पर किसान वर्षों के आस लगाई बैठी है। मौसम का मिजाज इतना बदल गया है। प्रतिदिन आसमान में बादल छाने के साथ ही किसानों के माथे पर वर्षा नही होने से चींता की लकीरें दिखने लगी हैं। धूप छांव का सिलसिला पिछले एक सप्ताह से चल रहा है परंतु वर्षा नहीं हुई। एैसे में किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।
बारिश न होने से किसान चिंतित
अनूकूल बारिश न होने से सूखे जैसे हालात हो रहे हैं। पानी के अभाव में खेत सूख गए है। धान की रोपाई का काम बाधित हो गया है। खेतो से नमी गायब होने से किसानों की समस्या बढ़ रही है। सिंचाई के लिए नलकूप का सहारा लेना पड़ा है। समय से पहले आए मानसून से लोगो को उम्मीद थी की बारिश अच्छी होगी। मनूसने की निशक्रियता से किसानों के मंसूबो पर पानी फिरता नजर आ रहा है।




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