निलंबन पर एकजूट डाक्टरो ने शासन के खिलाफ खोला मोर्चा……सैकडो मरिज ईलाज न मिलने से रहे परेशान
कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के जिला अस्पताल में जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ राजेंद्र बांसरिया को प्रदेश के स्वास्थ्य महकमें के द्धारा मरीज के परिजन से पैसे लेकर इलाज करने के आरोप में निलंबित कर दिया एवं उन्हें अंबिकापुर के जेडी ऑफिस में अटैच कर दिया। शासन के आदेश के उपरांत शुक्रवार की सुबह से पहले तो जिला अस्पताल में सुबह सभी प्रमुख डॉक्टर की बैठक हुई। जिसके उपरांत उन्होंने शासन के इस निर्णय के खिलाफ एकमत होकर निर्णय के विरुद्ध जाते हुए काम नहीं करने का निर्णय लिया । इस दौरान उन्होंने इसकी जानकारी जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कोरिया एवं कोरिया कलेक्टर को पत्र के माध्यम से सौप दिया।
छत्तीसगढ़ डॉक्टर एसोसिएशन की ओर से जारी पत्र में कहा गया कि कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के सिविल सर्जन एवं अस्पताल अधीक्षक डॉ राजेंद्र बनसरिया का निलंबन अन्यायपूर्वक प्रक्रिया के तहत किया गया है व उनके खिलाफ एक पक्षीय कार्रवाई की गई है। उन्होंने धनराशि लेकर ऑपरेशन नहीं किया है पत्र में कहा गया है कि एकतरफा कार्रवाई करते हुए मुख्य चिकित्सा में स्वास्थ्य अधिकारी कोरिया के द्वारा सचिव छत्तीसगढ़ लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को डॉक्टर बनसरिया के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया था जिस पर यह पूरी करवाई शासन की ओर से की गई है।
पत्र में डॉक्टर एसोसिएशन ने कहा है कि इस प्रकरण में शासन के द्वारा जांच टीम गठित नहीं किया गया और न ही मौखिक एवं लिखित पत्राचार किया गया है। यह कार्रवाई नियम विरुद्ध है। शासन द्वारा जिन दो बिंदुओं का उल्लेख कर सिविल सर्जन को निलंबित किया गया है उसमें धनराशि की मांग एवं मरीज का उपचार नहीं करने का उल्लेख किया गया है जो पूर्णत निराधार है । इसलिए शासन तत्काल अपने आदेश को शून्य करें एवं सिविल सर्जन के ऊपर की गई कार्रवाई को वापस ले । अन्यथा आज आपतकालिन सेवा जारी रहेगी और शनिवार से पूरी तरीके से जिला अस्पताल में काम बंद किया जायेगा।
मरिज की मा ने लगाया आरोप
मामले में चिरमिरी हल्दीबाडी निवासी मरीज की मां कलावती केवट उम्र 45 साल ने मीडिया में बयान देते हुए कहा कि उसका लड़का विकास केवट उम्र 20 वर्ष का एक्सीडेंट दूबछोेला में हुआ जिससे उसके लडके की हाथ टूट गई। जिसके बाद वो 21 जून की रात में अपने लड़के को लेकर डॉक्टर बनसरिया के निवास पर पहुंची । जहां पर डॉक्टर के द्वारा कच्चा प्लास्टर करके यह कहा गया कि 26 या 27 जून को आना तब ऑपरेशन कर देंगे और 15 हजार आपरेशन के नाम पर मांग की बात भी कही गई। इसके बाद 27 जून गुरुवार को मरीज की मां एवं उसकी बहन दोनों उसे लेकर जिला अस्पताल बैकुंठपुर पहुंचे । जहां पर डॉक्टर के द्वारा उसका पूर्व का प्लास्टर कटा गया एवं उसे ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। इसके बाद उसकी बहन से पैसे की मांग की गई। उसकी बहन ने उसकी मां को पूरी बात बताई जिस पर मरीज की मां ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को फोन लगाया एवं सारे मामले की जानकारी दी । जिस पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने जिला अस्पताल के अस्पताल अधीक्षक डॉक्टर को फोन लगाकर फटकार । इसके बाद मरीज का ऑपरेशन गुरुवार की शाम में कर दिया गया एवं अभी वह जिला अस्पताल बैकुंठपुर में भर्ती है जहां पर उसका उपचार चल रहा है। इस पूरी घटना के बाद प्रदेश का स्वास्थ्य महकमा हरकत में आया हुआ है।
शासन ने यह दिया आदेश
डॉ. बंसारिया के इस कृत्य को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 का उल्लंघन माना गया है। अतः राज्य शासन ने डॉ. राजेन्द्र बंसारिया को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 (1) (क) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। डॉ. राजेन्द्र बंसारिया को मुख्यालय कार्यालय संभागीय संयुक्त संचालक, सरगुजा संभाग, अंबिकापुर निर्धारित किया गया है। सक्षम अधिकारी की अनुमति और पूर्व स्वीकृति के बिना उन्हें मुख्यालय नहीं छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। निलंबन अवधि में डॉ. राजेन्द्र बंसारिया मूलभूत नियम 53 के तहत जीवन निर्वाह भत्ते के नियमानुसार पात्र होंगे।
हमने शासन के आदेश का पालन किया
कोरिया जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर एस सेंगर ने कहा कि डॉक्टरो के द्वारा मुझ पर जो आरोप लगाए जा रहे हैं वो अब करेंगे भी क्या। उन्होंने साफ कहा कि मुझे शासन की ओर से मौखिक तौर पर आदेश दिया था कि वह डॉ. राजेन्द्र बनसरिया के द्वारा इलाज के नाम पर पैसे एवं इलाज न करने को लेकर मरीज के परिजन का बयान लेकर शासन को भेजें । इस पर उनके द्वारा चिरमिरी निवासी मरीज की माता कमली बाई का बयान लेकर शासन को भेज दिया । उन्होंने साफ कहा कि उनके पास जो आदेश आया था उन्होंने इसका पालन किया है । जो भी कार्रवाई की जा रही है वह शासन की ओर से की जा रही है।
सेवा बाहल रखने की कोशिस जारी
व्यवस्था को बाहाल रखने के संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कोरिया ने कहा कि वर्तमान में वे जिले के दूसरे ब्लॉक के डॉक्टरो से संपर्क में है अभी तक तीन से पांच डॉक्टरों के द्वारा हड़ताल की स्थिति में अपनी सेवा देने पर सहमति जाता दी गई है । एसईसीएल से भी सहयोगी लिया जायेगा। हम पूरी तरीके से मामले पर नजर बनाए हुए हैं यदि शासन के आदेश के विरोध में डॉक्टर हड़ताल पर जाते हैं तो जिला अस्पताल में मरीजों की इलाज की सुविधा देने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा ।

परिजनों पर बनाया जा रहा है दबाव
बताया जा रहा है कि जिला अस्पताल के डॉक्टरो के द्वारा मरिज के परिजनों पर अनावश्यक तौर पर दबाव बनाए जा रहा है कि मरीज की मॉ अपना बयान को वापस ले ले । इस दौरान सुबह 11 बजे से मरीज की मां डॉक्टरो के द्वारा अनावश्यक दबाव से बचने के लिए जिला अस्पताल के परिसर में छुपती फिर रही है। डाक्टरो का यह कृत्य बेहद दुखद और गंभीर है कि अपनी गलतियों पर परदेदारी करने की इस तरह की कोशिश की जा रही है । यदि किसी ने गलत किया है तो उसे उसकी सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरीके की गलती की पुनरावृत्ति ना हो । इसका भी इंतजाम शासन प्रशासन की ओर से किया जाना चाहिए।

डिप्टी कलेक्टर डटी रही अस्पताल में
कोरिया कलेक्टर द्वारा मामले पर संज्ञान लेते हुए शुक्रवार की सुबह से ही जिले के डिप्टी कलेक्टर प्रियंका गुप्ता की ड्यूटी जिला अस्पताल की व्यवस्था को देखने के लिए लगा दी गई । वेे जिला अस्पताल में रही एवं मरीज को और डॉक्टर से बात करती रही।

इससे पूर्व भी इन पर लग चुका है आरोप
दिसंबर 2023 में एक ग्रामीण का पैर टूटने के कारण उसे जिला अस्पताल बैकुंठपुर में भर्ती कराया वह तीन हफ्ते तक जिला अस्पताल में भर्ती रहा। डॉक्टर ने पैर टूटने की जानकारी दी और कच्चा प्लास्टर कर दिया। डॉ राजेंद्र बंसारिया ने मरीज के परिजनों से कहा कि ऑपरेशन करना पड़ेगा। परिवार वालों ने ऑपरेशन करने की सहमति दे दी तो डॉक्टर बंसारिया ने ऑपरेशन के लिए 12 हजार रुपए की मांग की। उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल में एनेस्थीसिया के डॉक्टर नहीं हैं। इसके लिए प्राइवेट डॉक्टर बुलाकर ऑपरेशन कराना पड़ता है। इसके बाद उसे मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर रिफर कर दिया गया जहां इलाज किया गया। जिसके बाद मिडिया में मामला आने के बाद जेडी आफिस से जिले के सीएचएमओ को जाच के लिए मामला आया था तक जिले के सीएचएमओ और सबंधित डाक्टरो ने मिलकर मरिज के परिजनो के साथ मिलकर अपने अनूकूल बयान करवा लिया और मामला दबा दिया गया था।


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