छत्तीगसढ़ पटवारी संघ के प्रदेश सरकार को अल्टीमेटम के बाद सोमवार को प्रदेश भर के पटवारी संघ के साथ मंगलवार को कोरिया जिले के पटवारी संघ भी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चला गया। संघ का कहना है कि हमारे द्धारा कलेक्टर को ज्ञापन नही सौपा गया था सोमवार को ज्ञापन सौपे जाने के बाद मंगलवार से जिले का पटवारी संघ हडताल पर चला गया।
हडताल के संबंध में संघ ने बताया कि प्रदेश संघ की तरफ से राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा को ज्ञापन भेजा गया था जिसमें उनसे पहले ही कहा गया था कि हमारी समस्या का समाधान नहीं होने पर 8 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जायेगें। किन्तु सरकार की ओर से साकारत्मक जवाब नही मिलने के कारण मजबूरनयह निर्णय लेना पडा।
विदित हो कि पटवारी संघ ने प्रदेश के राजस्व मंत्री को ज्ञापन भेजकर 32 सूत्रीय मांगें रखा था। पटवारी संघ की तरफ से जारी बयान में कहा है कि पटवारी भुईयां साफ्टवेयर में आ रही दिक्कत से परेशान हैं। अगर सरकार ये परेशानी दूर नहीं करती है, तो पटवारी का पद ही समाप्त कर दिया जाए। संघ का कहना है कि जो मांगे रखी गई है वे सभी विगत कई वर्षों से लंबित मांगें हैं, निराकरण न होने की वजह से प्रदेश के सभी पटवारी निराश और हताश हैं।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि सबसे ज्यादा समस्या भुईयां साफ्टवेयर की वजह से हो रही है। इस साफ्टवेयर में कई खामियां हैं जिन्हें ठीक नहीं किया जा रहा है। संघ के अनुसार त्रुटिपूर्ण खसरे जो बैंक में बंधक हैं ऐसे खसरों को साफ्टवेयर में ठीक या विलोपित नहीं किया गया है। न ही एनआईसी द्वारा उसे विलोपित किया गया है। पटवारी आईडी में संकलन, विलोपन, संशोधन का ऑप्शन नहीं है। इसके बावजूद कई जिलों में संकलन, विलोपन संशोधन के नाम पर पटवारियों के खिलाफ दुर्भावनापूर्वक कार्रवाई की जा रही है। इस पर रोक लगाई जाए। कर्जदार किसानों द्वारा कर्ज चुका देने के बाद भी ऑनलाईन भुईयां से बैंक बंधक नहीं हटाया जाता है। ऐसे मामलों की शिकायत होने पर सारा दोषारोपण पटवारियों पर होता है।
पटवारी संघ का कहना है कि ऑनलाईन काम करने के लिए आज तक किसी प्रकार की सुविधा नहीं दी गई है। कंप्यूटर, लैपटॉप प्रिंटर, स्कैनर, इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं करई गई है। पटवारी अपने संसाधन से काम करते हैं। इस काम के लिए अतिरिक्त भत्ता दिया जाए। ऑनलाईन नक्शा, बटांकन संशोधन पहले पटवरी आईडी में संशोधित कर राजस्व निरीक्षक की आईडी में भेजा जाता है। इस वजह से जब तक राजस्व निरीक्षक की आईडी से अनुमोदन नहीं होता है तब तक उसी नक्शे से संबंधित अन्य बटांकन या संशोधन नहीं किया जा सकता है, जिसके कारण अनावश्यक विलंब होता है। पटवारी द्वारा अनुनोदन के लिए भेजा गया नक्शा बंटाकन पटवारी आईडी में नहीं दिखता जिस्से त्रुटि की संभावना रहती है। नक्शा का सर्वर अधिकाशतः खुलता नहीं है। हर बार दुबारा लॉगिन करना पड़ता है। इस समस्या का निराकरण आज तक नहीं किया गया।
संघ का कहना है कि डिजीटल हस्ताक्षर 100 प्रतिशत करने के लिए शासन स्तर पर दबाव बनाया जाता है। पटवारी खुद अपने खर्च से डिजीटल टोकन बनाते हैं इसके बाद भी उच्चाधिकारी प्रताड़ित करते हैं। ऑनलाईन रजिस्ट्री होने के बाद नामांतरण के लिए पटवारी की आईडी में आता है जिसमें क्रेता-विक्रेता से संबंधित सारी जानकारी अंग्रेजी में रहती है जिसे हिंदी में टाइप करना पड़ता है। लिपिकीय त्रुटि हो सकती है। इसके लिए पटवारी को दोषी समझा जाता है। वर्तमान में प्रदेश स्तर पर 100 प्रतिशत नक्शा, बटांकन का दबाव बनाया जा रहा है।


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