पंडालों पूजा की तैयारी जोरो पर…..तैयार की जा रही दूर्गा प्रतिमाए और परिसर

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नवरात्रि महोत्सव 03 से 12 अक्तूबर तक मनाया जाएगा

बैकुंठपुर।

जिले के बैकुंठपुर समेत सभी क्षेत्रो में नवरात्रि की तैयारी चल रही है। इस बार का नवरात्रि महोत्सव 03 अक्टूबर से लेकर दशहरे तक यानी 12 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। इस वर्ष बैकुंठपुर, चरचा, पटना सहित आसपास क्षेत्र में मां अपने विराट स्वरूप में पंडालों में विराजेंगी। पूजा की तैयारियां तेज हो गई हैं। पूजा को लेकर बैकुंठपुर जामपारा पूजा समिति के प्रमुख अमित चिकनजूरी ने बताया कि जामपारा में इस बार भव्य और दिव्य माता की मूर्ति का निर्माण कराने के लिए कलकत्ता से विशेष कारिगरो को टिम बूलाई गई हैं। उन्होने बताया कि इस पूजा की मूर्ति के निर्माण के लिए सिर्फ 1 लाख दिये गये हैं। पंडालों में विराट स्वरूप में मां विराजेंगी। इस बार धूमधाम से दुर्गा पूजा आयोजित किया जा रहा है।

चित्र – कोलकाता के कारिगरो द्वारा तैयार की जा रही है माता की मूर्ति


वही पर दूसरे पूजा समितियो ने भी दूर्गा पूजा समितियो ने पहले ही मूर्तियों का आर्डर दे दिया है। बताया जा रहा है कि कम दाम की मूर्तियों की मांग ज्यादा है। इस बार मिट्टी, रस्सी, श्रृंगार के सामान, बांस व मजदूरी में काफी वृद्धि हो गई है। बावजूद इसके मूर्तिकारों ने मूर्तियों का दाम नहीं बढ़ाया है, ताकि लोगों के उत्सव में कमी न आए। ऐसी भी मूर्तियां इस बार बनाई जा रही हैं, जिसमें आभूषण, परिधान सब मिट्टी का है। प्रतिमाओं को सजाने के लिए बाजार से श्रृंगार के सामान नहीं लाने होंगे।

निर्माण सामग्री की किमतो में बेतहाशा वृद्धि

मूर्तिकारो का कहना है कि दिन-प्रतिदिन परिस्थितियां प्रतिकूल होती जा रही हैं। बांस की कीमत दो सौ थी, इस साल 250 रुपये में मिल रहा है। दो हजार रुपये प्रति ट्राली मिट्टी मिल जाती है पैरा मिल नहीं रहा है। सारे निर्माण सामग्री मंहगे दामो पर मिलने के कारण मूर्तियो के दाम भी मंहगे हो गये हैं। निर्माण सामग्री का दाम बढ़ जाने से मूर्तियों की लागत बढ़ गई है। लेकिन लोग पहले के दाम पर मूर्तियां मांग रहे हैं। आभूषण, परिधान सभी मिट्टी का बनाने से मूर्तियों का खर्च बढ़ जाता है। पिछले दो साल पांच-पांच फीट की मूर्तियां स्थापित की गई थीं। कोविड प्रोटोकाल के साथ उत्सव मनाया गया था। इस साल धूमधाम से मनाने की तैयारी है। बडी मूर्ति स्थापित किये जाने की तैयारी चल रही है।

चित्र — पूजा के लिए तैयार किया जा रहा है मंदिर परिसर

03 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि

शारदीय नवरात्रि गुरुवार 03 अक्टूबर से आरंभ होंगी और इस पर्व का समापन शनिवार 12 अक्टूबर को होगा। मान्यता है कि महालया के दिन जब पितृगण धरती से लौटते हैं तब मां दुर्गा अपने परिवार और गणों के साथ पृथ्वी पर आती हैं, जिस दिन नवरात्र का आरंभ होता है उस दिन के हिसाब से माता हर बार अलग-अलग वाहनों से आती हैं।

शारदीय नवरात्रि का पर्व काफी धूमधाम से मनाया जाता है। इसमें मां दुर्गा की प्रतिमाएं विराजित की जाती है, साथ ही क्षेत्र में गरबा और रामलीलाओं का आयोजन किया जाता है। इस 09 दिन के महापर्व के पहले दिन घटस्थापना की जाती है और मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा भी की जाती है। नवरात्रि के नौ दिनों में व्रत भी रखा जाता है। पूरे नियमों के साथ मां दुर्गा की आराधना की जाती है।


ये है मूहूर्त

पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का आरंभ 03 अक्टूबर की सुबह 12.19 मिनट से होगा और इसका समापन अगले दिन 04 अक्टूबर की सुबह 2.58 मिनट पर होगा।

डराने वाले संकेत

यूं तो मां दुर्गा का वाहन सिंह को माना जाता है लेकिन हर साल नवरात्रि के समय तिथि के अनुसार माता अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर धरती पर आती हैं यानी माता सिंह की बजाय दूसरी सवारी पर सवार होकर भी पृथ्वी पर आती हैं। माता दुर्गा आती भी वाहन से हैं और जाती भी वाहन से हैं। इस बार हाथी पर माता का आगमन इस बात की ओर संकेत कर रहा है कि इस साल खूब अच्छी वर्षा होगी और खेती अच्छी होगी। देश में अन्न धन का भंडार बढ़ेगा। मां दुर्गा की सवारी जब डोली या पालकी पर आती है तो यह अच्छा संकेत नहीं है। मां दुर्गा का पालकी पर आना सभी के लिए चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

दुर्गा पंडालों में भी तैयारी शुरू

ज्यादातर दुर्गा पूजा समितियों ने पंडाल और मूर्ति स्थापना की तैयारियां शुरू कर दी हैं। माता रानी की मूर्तियों को कलाकार तैयार कर रहे हैं। खरवत दूर्गा पूजा समिति के गणेश राजवाडे ने बताया कि 03 अक्टूबर से दुर्गा पूजा शुरू की जाएगी। बारिश के कारण इस बार तैयारियो में खासी परेशानी हो रही है।

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